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आहत पत्रकार ने नौकरी छोड़कर दैनिक भास्कर के मालिकान और संपादक पर किया मानहानि का केस

दैनिक भास्कर की एक खबर से मर्माहत झारखंड के गिरिडीह जिले के प्रतिष्ठित अधिवक्ता अजय कुमार सिन्हा ने अखबार के मालिक रमेश चंद्र अग्रवाल समेत स्टेट हेड ओम गौड़ और धनबाद यूनिट के प्रभारी स्थानीय संपादक राकेश पाठक पर मानहानि का केस किया है। मालूम हो कि 23 अप्रैल 2016 को एक खबर में अधिवक्ता को आरोपी लिखा गया था। किसी मामले में उनके घर पुलिस गयी थी, मगर खबर में श्री सिन्हा को आरोपी बताया गया था।

दैनिक भास्कर की एक खबर से मर्माहत झारखंड के गिरिडीह जिले के प्रतिष्ठित अधिवक्ता अजय कुमार सिन्हा ने अखबार के मालिक रमेश चंद्र अग्रवाल समेत स्टेट हेड ओम गौड़ और धनबाद यूनिट के प्रभारी स्थानीय संपादक राकेश पाठक पर मानहानि का केस किया है। मालूम हो कि 23 अप्रैल 2016 को एक खबर में अधिवक्ता को आरोपी लिखा गया था। किसी मामले में उनके घर पुलिस गयी थी, मगर खबर में श्री सिन्हा को आरोपी बताया गया था।

इस खबर के छपने पर अखबार के विधि संवाददाता और अधिवक्ता अंजनी कुमार सिन्हा (अजय कुमार सिन्हा के छोटे भाई) ने अखबार को बाय बाय बोल दिया। खबर से पूरा परिवार इतना मर्माहत हुआ कि अखबार को लीगल नोटिस भेजा गया था। मगर, अखबार प्रबंधन ने कोई पहल नहीं की तो आखिरकार 31 मई को दैनिक भास्कर प्रबंधन पर गिरिडीह मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में केस दर्ज किया।

क्या थी खबर?

मालूम हो कि कोई शरारती तत्व भास्कर के विधि संवाददाता अंजनी सिन्हा, उनके भाई अधिवक्ता अजय कुमार सिन्हा के नाम से पिछले एक साल से फर्जी धमकी भरी चिट्ठियां हाई प्रोफाइल लोगों को भेजा करता था। इसी तरह की एक चिट्ठी में एयरपोर्ट और पटना जंक्शन व विधानसभा अध्यक्ष को उड़ाने की धमकी दी गयी थी। इस चिट्ठी में निवेदक की जगह विधि संवाददाता अंजनी सिन्हा, उनके भाई अधिवक्ता अजय कुमार सिन्हा का नाम था।

दोनों भाईयों को चिट्ठी में नक्सली संगठन भाकपा माओवादी का लीडर लिखा गया था। इस चिट्ठी पर सच्चाई जांचने पहुंची पुलिस वाली खबर में सभी अखबारों ने विधि संवाददाता अंजनी सिन्हा, उनके भाई अधिवक्ता अजय कुमार सिन्हा का पक्ष भी लिया था। गया पुलिस को गिरिडीह पुलिस से ये जानकारी मिली कि इस परिवार को कुछ शरारती लोग पिछले एक साल से फर्जी चिट्ठी भेज कर परेशान कर रहे हैं। जबकि खुद विधि संवाददाता अंजनी सिन्हा के अखबार में जो खबर छपी उसमें उनका या उनके भाई अधिवक्ता अजय कुमार सिन्हा का पक्ष नहीं लिया गया। साथ ही उन्हें आरोपी बताया गया। इसी बात से सिन्हा परिवार नाराज था और अखबार प्रबंधन के खिलाफ केस किया गया।

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