क्या मुकुल रॉय की राह चल पड़ेंगे चिदम्बरम?

चिदंबरम को गिरफ्तार न करने का राज…. चिदंबरम की गिरफ्तारी में CBI के टालमटोल से सियासी साजिश की बू आ रही है. कहीं यह BJP के inorganic विस्तार का हिस्सा तो नहीं. इस आशंका से कांग्रेस आलाकमान का दम फूल रहा है. जहां तक CBI / IB के आसूचना तंत्र की काबिलियत का सवाल है, तो चिदंबरम जैसा चर्चित व्यक्तित्व इतनी आसानी से लोदी रोड इलाके से इतनी देर तक गुम नहीं हो सकता. कांग्रेस नेतृत्व ही नहीं कई शीर्ष BJP नेता भी उनके नजदीकी संपर्क में बताये जा रहे हैं. वो चाहकर भी सर्विलेंस से दूर नहीं जा सकते हैं.

चिदंबरम की गिरफ्तारी में देरी से अब कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व भयभीत है. कहीं मुकुल रॉय की तरह दबाब में आकर आइनेक्स के आरोपी चिदंबरम के साथ बीजेपी कोई deal ना कर ले. बंगाल में मुकुल रॉय ने जो हाल ममता का कर रखा है उससे ज्यादा बुरा हाल चिदंबरम दस जनपथ का करवा सकते हैं. यहीं वजह है कि प्रियंका के बाद राहुल गाँधी ने चिदंबरम के प्रति solidarity दिखाई है. कांग्रेस के बाकी दिग्गज भी लामबंद हैं.

चिदंबरम का इतिहास कभी कट्टर कांग्रेसी का नहीं रहा है. वह मतलब के पुराने यार हैं. देवगौड़ा के गैर कांग्रेस सरकार के वित्त मंत्री रह चुके हैं.

वरिष्ठ पत्रकार आलोक कुमार की एफबी वॉल से.

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