कवि और पत्रकार चितरंजन रावल नहीं रहे

Rajaram Tripathi : हिन्दी के अनन्य सेवक, प्रखर व्यंगकार, कवि, लेखक, शिक्षाविद, मेरे अनन्य सखा, अग्रज, भाई चितरंजन रावल कल रात्रि महाप्रयाण कर गये। आप दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय मासिक पत्रिका “ककसाड़” के आधार स्तम्भों में से एक थे, बस्तरान्चल की साहित्यिक पत्रिका “चेलिक” के मेरे प्रबन्ध संचालक थे। आपकी प्रकाशित कविता संग्रह “कुचला हुआ सूरज” बस्तर के साहित्य संसार में मील का पत्थर कहा जाता है।

आप नव रचनाकारों के लिए चलती फिरती सुलभ पाठशाला थे। मेरे सुषुप्त रचनाकार को जगाने एवं मुझे साहित्यिक जगत में सक्रिय भूमिका निभाने के लिये उन्मुख करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। बमुश्किल दो हफ्ता पहले ही तो उन्हें “इन्द्रावती सम्मान २०१५” से सम्मानित किया गया था। सचमुच सम्मान भी आप को पाकर धन्य हो गया। उनका जाना हिन्दी साहित्य के लिए तथा बस्तर के साहित्यिक जगत के लिए तो यह एक वज्राघात है ही, व्यक्तिगत रूप से, मेरे लिए भी यह एक अपूरणीय क्षति है। सैकड़ों स्मृतियाँ मन मस्तिष्क में कौन्ध रही हैं, पर शब्द साथ नहीं दे रहे हैं। शब्द मौन हुए जा रहे हैं, इसलिए, भाई, आप जहां भी हों, आप को शाश्वत शान्ति, विश्रान्ति मिले। आमीन।

कई पुरस्कार से सम्मानित जाने-माने कृषि उद्यमी राजाराम त्रिपाठी के फेसबुक वॉल से.

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