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सुनिए जावड़ेकर के बोल, क्रास मीडिया स्वामित्व से खतरा नहीं, बड़ा अखबार छोटे अखबार वालों को नहीं दबा सकते

पुणे : सत्ता में आते ही नेताओं के होश और बोल दोनों बदल जाते हैं. क्रास मीडिया आनरशिप एक बड़ा मसला है और यह मसला लोकतंत्र की सेहत से जुड़ा हुआ है. जब कुछ लोग पूरे देश के मीडिया के मालिक हो जाते हैं और हर जगह उन्हीं का अखबार और चैनल दिखता बिकता है तो वह मिनटों में किसी भी नेता, अफसर से डील कर आम जन के मुद्दों को ब्लैकआउट कर डालते हैं. बड़ा अखबार वाला छोटे अखबार वालों को लगातार दबाता रहता है. दैनिक जागरण जैसे अखबार का उदाहरण दिया जा सकता है जो अपने से छोटे कई अखबारों को खरीद चुका है. इन सबके बावजूद केंद्र की भाजपा सरकार के सूचना एवं प्रसारण मत्री प्रकाश जावड़ेकर कहते हैं कि क्रास मीडिया स्वामित्व से खतरा नहीं है और बड़ा अखबार वाला छोटे अखबार वालों को नहीं दबा सकते.

पुणे : सत्ता में आते ही नेताओं के होश और बोल दोनों बदल जाते हैं. क्रास मीडिया आनरशिप एक बड़ा मसला है और यह मसला लोकतंत्र की सेहत से जुड़ा हुआ है. जब कुछ लोग पूरे देश के मीडिया के मालिक हो जाते हैं और हर जगह उन्हीं का अखबार और चैनल दिखता बिकता है तो वह मिनटों में किसी भी नेता, अफसर से डील कर आम जन के मुद्दों को ब्लैकआउट कर डालते हैं. बड़ा अखबार वाला छोटे अखबार वालों को लगातार दबाता रहता है. दैनिक जागरण जैसे अखबार का उदाहरण दिया जा सकता है जो अपने से छोटे कई अखबारों को खरीद चुका है. इन सबके बावजूद केंद्र की भाजपा सरकार के सूचना एवं प्रसारण मत्री प्रकाश जावड़ेकर कहते हैं कि क्रास मीडिया स्वामित्व से खतरा नहीं है और बड़ा अखबार वाला छोटे अखबार वालों को नहीं दबा सकते.

जावड़ेकर ने पुणे में एक प्रोग्राम में मीडिया की प्रतिस्पर्धात्मक भावना पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि कॉस मीडिया स्वामित्व में भारत जैसे लोकतंत्र को कोई खतरा नहीं हैं. जावडे़कर ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारतीय लोकतंत्र बहुत मजबूत हैं और यहां सभी को आगे बढ़ने के लिए बराबर के अवसर दिये जाते हैं. यहां बड़ा अखबार छोटे अखबार वालों को नहीं दबा सकते.” मैं प्रतियोगी भावना पर ज्यादा विश्वास करता हूं. उन्होंने कहा प्रेस की आजादी और जिम्मेदारी हमेशा जीवंत रहेगी. उन पर कभी भी शिकंजा नहीं कसा जायेगा. मोदी सरकार प्रेस की आजादी सुनिश्चित करेगी. एक अन्य कार्यक्रम में जावड़ेकर ने कहा कि सरकार पूरे देश में वनों का क्षेत्रफल वर्तमान के 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 33 प्रतिशत करने की योजना बना रहीं है. देश में लगभग 23 प्रतिशत वनों का क्षेत्रफल है, इनमें से कई क्षेत्र विकृत वन क्षेत्र हैं. सरकार इसे अगले एक दशक में बढ़ाकर 33 प्रतिशत करने की योजना बना रही है इस उद्देश्य के लिए समयबद्ध कार्रवाई कार्यक्रम बनाया जायेगा.

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