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डीबी कॉर्प को दोहरा झटका : आलिया शेख के ट्रांसफर पर स्टे, सुनील कुकरेती का 42 लाख का क्लेम पास

महिला मजीठिया क्रांतिकारी आलिया शेख को ईद से पहले मिली जबर्दस्त ईदी, सुनील कुकरेती के 42 लाख के क्लेम पर लेबर कमिश्नर ने लगाई मोहर

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में डी. बी. कॅार्प लि. के मुंबई स्थित माहिम वाले कार्यालय में कार्यरत रिसेप्शनिस्ट आलिया इम्तियाज शेख को रमजान के महीने में इंडस्ट्रियल कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। आलिया के ट्रांसफर पर इंडस्ट्रियल कोर्ट ने रोक लगा दी है।

बता दें कि मजीठिया क्रांतिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह के बाद मुंबई में आलिया इम्तियाज शेख ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार अपने बकाये की मांग को लेकर 17 (1) का क्लेम महाराष्ट्र के कामगार आयुक्त कार्यालय में लगाया था, जिसकी लंबी सुनवाई चली और कामगार आयुक्त कार्यालय की सहायक कामगार आयुक्त नीलांबरी भोसले ने डी. बी. कॅार्प लि. कंपनी को निर्देश दिया कि आलिया शेख का पूरा बकाया, जो कि मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार बनता है, उसे तत्काल दिया जाए। लेकिन इस कंपनी (डी. बी. कॅार्प लि.) ने ये बकाया नहीं दिया।

इसी बीच कंपनी का प्रबंधन मुंबई हाई कोर्ट चला गया, जहां हाई कोर्ट ने धर्मेन्द्र प्रताप सिंह और आलिया इम्तियाज शेख के साथ-साथ उनकी एक और सहयोगी लतिका आत्माराम चव्हाण के बकाये में से पचास प्रतिशत रकम तत्काल हाई कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया, जिसके बाद डी. बी. कॅार्प लि. कंपनी माननीय सुप्रीम कोर्ट गई और सुप्रीम कोर्ट ने डी. बी. कॅार्प लि. को वापस मुंबई हाई कोर्ट भेजते हुए साफ कह दिया कि उसे नहीं लगता कि इस मामले में दखल देना चाहिए।

इसके बाद डी. बी. कॅार्प लि. कंपनी ने इन तीनों कर्मचारियों का आधा बकाया पैसा हाई कोर्ट में जमा तो करा दिया, मगर इससे पहले कंपनी ने अपने प्रिंसिपल करेस्पॅान्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का ट्रांसफर मुंबई से सीकर (राजस्थान), जबकि लतिका चव्हाण का ट्रांसफर सोलापुर कर दिया गया। हालांकि धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने ट्रांसफर को स्थानीय इंडस्ट्रियल कोर्ट में चुनौती दी और इंडस्ट्रियल कोर्ट ने उनके ट्रांसफर पर रोक लगा दी।

जस्टिस मजीठिया वेर्ज बोर्ड के अनुसार, अपना बकाया मांगने के 21 महीने के बाद डी. बी. कॅार्प लि. ने अपने यहां कार्यरत रिसेप्शनिस्ट आलिया इम्तियाज शेख का भी 24 मई, 2018 को पुणे ट्रांसफर कर दिया और उन्हें वहां पर 1 जून, 2018 को ज्वाइन करने का फरमान सुना दिया। इस पर आलिया ने अपने एडवोकेट एस. पी. पांडे के जरिये कंपनी द्वारा किए गए ट्रांसफर को इंडस्ट्रियल कोर्ट में चुनौती दी।

चूंकि इस समय अदालतों में अवकाश चल रहा है, अत: इंडस्ट्रियल कोर्ट के विद्वान न्यायाधीश एस. डी. सूर्यवंशी ने अपने चेंबर में इस पूरे मामले की एक जून को सुनवाई की और पाया कि आलिया इम्तियाज शेख का ट्रांसफर गलत है और इस ट्रांसफर पर उन्होंने रोक लगा दी। रमजान के महीने में ईद से पहले मिली इस ईदी पर आलिया इम्तियाज शेख काफी खुश हैं।

डी. बी. कॅार्प लि. को दूसरा झटका तब लगा, जब सुनील कुकरेती द्वारा महाराष्ट्र के लेबर डिपार्टमेंट में किए 42 लाख रुपए के क्लेम पर मोहर लगाते हुए असिस्टेंट लेबर कमिश्नर ने आर्डर पास कर दिया ! जाहिर है कि इस संस्थान ने उक्त आदेश को नजरंदाज किया तो सुनील कुकरेती के पक्ष में कंपनी के विरुद्ध शीघ्र ही आरआरसी (रेवेन्यू रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी कर दिया जाएगा। बहरहाल, इन दोनों कर्मचारियों ने मुंबई हाई कोर्ट में कैविएट लगा दी है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
9322411335

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1 Comment

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  1. नितीन

    June 5, 2018 at 2:52 pm

    बढिया

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