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मजीठिया वेज बोर्ड की मांग करने वाले दिव्य भास्कर, अहमदाबाद के 45 कर्मी किए गए बर्खास्त

अहमदाबाद : मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने व अन्य मांगें उठाने वाले कर्मचारियों को दिव्य भास्कर अखबार ने बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है. अखबार ने लगभग 45 कर्मचारियों को बाहर कर दिया है. इनमें प्रिन्टिंग, मैन्टेनन्स, यूटिलिटी, इलेक्ट्रिकल और अन्य डिपार्टमेंट के कर्मचारी शामिल हैं. दिव्य भास्कर मैनेजमेंट के इस रवैये के विरोध में भास्कर के कर्मचारी करीब एक हफ्ते से जगह-जगह धरना-प्रदर्शन का मन बना रहे हैं. साथ ही लेबर कोर्ट के माध्यम से अपने हक की लड़ाई आगे बढ़ा रहे हैं. उनको गुजरात मजदूर सभा के यूनियन व कुछ राजनीतिक दल भी समर्थन दे रहे हैं.

अहमदाबाद : मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने व अन्य मांगें उठाने वाले कर्मचारियों को दिव्य भास्कर अखबार ने बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है. अखबार ने लगभग 45 कर्मचारियों को बाहर कर दिया है. इनमें प्रिन्टिंग, मैन्टेनन्स, यूटिलिटी, इलेक्ट्रिकल और अन्य डिपार्टमेंट के कर्मचारी शामिल हैं. दिव्य भास्कर मैनेजमेंट के इस रवैये के विरोध में भास्कर के कर्मचारी करीब एक हफ्ते से जगह-जगह धरना-प्रदर्शन का मन बना रहे हैं. साथ ही लेबर कोर्ट के माध्यम से अपने हक की लड़ाई आगे बढ़ा रहे हैं. उनको गुजरात मजदूर सभा के यूनियन व कुछ राजनीतिक दल भी समर्थन दे रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने डेढ़ वर्ष पूर्व मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने के आदेश अखबारों को दिये थे. वेज बोर्ड लागू हो जाने पर पत्रकार/गैर पत्रकार कर्मचारियों को, अधिकांश अखबारों में वर्तमान में मिल रहे वेतन से करीब तीन-चार गुना अधिक मिलने लगेगा. लेकिन तमाम अखबार वेज बोर्ड लागू करने से बचने की कोशिश कर रहे हैं और मामले को कानूनी दांव पेंच में उलझाने के साथ ही कर्मचारियों को परेशान व नौकरी से निकालने की जुगत में लगे हैं. दैनिक भास्कर में बडे़ पैमाने पर हुई निलंबन की कार्रवार्इ भी इसी का हिस्सा है.

मजीठिया वेज बोर्ड लागू कराने के लिए भास्कर के निलंबित कर्मचारी भी अब आरपार की लड़ाई को तैयार हैं. कर्मचारियों की तरफ से एक अवमानना याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में पहले ही डाली जा चुकी है. देखना होगा कि मजीठिया वेज बोर्ड लागू कराने के लिए कर्मचारियों का यह चौतरफा संघर्ष क्या रंग लाता है. हालांकि आम जनता के हक, समस्याओं को उठाने वाले पत्रकारों की आवाज बहुत कम अखबार-मीडिया माध्यमों के जरिये ही सामने आ रही है, लेकिन पत्रकार-कर्मचारी भी संघर्ष में डटे हुए हैं.

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