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भाजपा और मोदी का सिंगल ब्रांड रिटेल सौ फीसदी एफडीआई मंजूरी का पुराना विरोध जुमला हो गया

Paramendra Mohan : 2012 की बात है, भ्रष्टाचार-घोटालों के आरोपों में घिरी मनमोहन सरकार ने सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी एफडीआई लागू करने का फैसला लिया था। इससे भारतीय छोटे व्यापारियों का बर्बाद होना और विदेशी कंपनियों का फायदा होना तय था। ये बड़े विदेशी ब्रांड भारतीय बाजार से सस्ता माल खरीदकर उससे बने उत्पाद का एक बड़ा भाग ग्लोबल मार्केट में बेचते, लेकिन खरीदी को लोकल सोर्सिंग बताकर छूट पाते।

Paramendra Mohan : 2012 की बात है, भ्रष्टाचार-घोटालों के आरोपों में घिरी मनमोहन सरकार ने सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी एफडीआई लागू करने का फैसला लिया था। इससे भारतीय छोटे व्यापारियों का बर्बाद होना और विदेशी कंपनियों का फायदा होना तय था। ये बड़े विदेशी ब्रांड भारतीय बाजार से सस्ता माल खरीदकर उससे बने उत्पाद का एक बड़ा भाग ग्लोबल मार्केट में बेचते, लेकिन खरीदी को लोकल सोर्सिंग बताकर छूट पाते।

राष्ट्रवादी पार्टी भाजपा के होते कांग्रेस के लिए ये राष्ट्रविरोधी प्रस्ताव का मंजूर हो पाना नामुमकिन था और ऐसा ही हुआ। उस वक्त नमो गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने गुजरात में एक रैली की और उसमें दो टूक कहा-मैं हैरान हूं कि प्रधानमंत्री (मनमोहन सिंह) कर क्या रहे हैं? रिटेल के लिए एफडीआई को परमिट दे दिया गया है। छोटे व्यापारियों की दुकानों में ताला लगाने का निर्णय लिया गया है। रिटेल में ऐसा मार्केट शुरू होगा तो हिंदुस्तान के छोटे व्यापारियों के पास कौन खरीदी करने आएगा।’ 2014 में वक्त बदला, राष्ट्रविरोधी सरकार सत्ता से बाहर हुई, राष्ट्रवादी सरकार बनी, सरकार बदली तो सोच भी बदली, सोच बदली तो ये सच सामने आया कि दरअसल मनमोहन के जिस फैसले से देश पीछे जा रहा था, नरेंद्र मोदी के उसी फैसले से देश आगे बढ़ेगा और अब सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी एफडीआई को मंजूरी दे दी गई।

अब नमो सीएम नहीं, बल्कि पीएम हैं और अब वो ये नहीं कह रहे हैं कि हिंदुस्तान के छोटे व्यापारियों के पास कौन खरीदी करने आएगा, बल्कि अब ये कहा जा रहा है कि इससे रोजगार और कमाई बढ़ेगी। यही बात मनमोहन 2012 में कह रहे थे तब भाजपा बवाल काट रही थी। ये है राजनीतिक राष्ट्रवाद और जनता भाजपा के इसी सत्तावादी राष्ट्रवाद को असली राष्ट्रवाद समझ बैठी थी। अब भाजपा और खुद नमो का सिंगल ब्रांड रिटेल सौ फीसदी एफडीआई मंजूरी का पुराना विरोध जुमला हो गया क्योंकि मनमोहन नीति में ही इन्हें रोजगार, कमाई, विकास दिखने लगा है, तो अपनी नीति से पलट गए।

अब अगर यशवंत सिन्हा नमो सरकार के इस ताजा फैसले का विरोध करते हुए याद दिला रहे हैं कि हम विपक्ष में थे तो पुरजोर विरोध करते रहे, लेकिन अब उसे ही मंजूरी देकर भाजपा नीतियों से भटक गई है, तो एक साथ तमाम भाजपा समर्थक यशवंत सिन्हा को सत्तालोलुप, गद्दार, राष्ट्रविरोधी करार देते हुए टूट पड़ेंगे। अब अगर कांग्रेस ये याद दिलाए कि खुद भाजपा जिस नीति का विरोध कर रही थी, उसे ही मंजूरी देकर लागू कर रही है तो भाजपा समर्थक कांग्रेस को भ्रष्टाचार-घोटालों की जननी और 60 साल में देश को बर्बाद करने वाली पार्टी बताकर मौजूदा फैसले को राष्ट्रवादी बताने लगेंगे।

राष्ट्रवाद के राजनीतिकरण और भाजपा का कांग्रेसीकरण देश की आम जनता के लिए कितना घातक होने जा रहा है, इसका अंदाजा अगर कोई लगा पाए तो उसे ये अंदाजा भी हो जाएगा कि देश के आर्थिक विकास और रोजाना किसी न किसी संस्था या एजेंसी के हवाले से जो ढिंढोरा पीटा जा रहा है, उस चमक के पीछे एक स्याह सच छिपा है और वो स्याह सच ये है कि न तो देश के आर्थिक एकीकरण से आम उपभोक्ताओं को पहले से कम दाम में सामान मिल रहा है और न ही चार साल में किसी भी क्षेत्र में रोजगार सृजन में कोई तरक्की हुई है,अगर किसी भी क्षेत्र में रोजगार पहले से ज्यादा मिल रहे हों, तो आप बताएं। हां एक क्षेत्र में निश्चित रूप से तरक्की हुई है और वो क्षेत्र है पलटासन, क्योंकि राजनीति का असली आसन यही है, सत्तासन।

कई न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके पत्रकार प्रमेंद्र मोहन की एफबी वॉल से.

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