मोदी राज में बेरोजगारी चरम पर, UPSC एक्जाम देने वालों के लिए भी बुरी खबर, सीटों की संख्या घटी

Ravish Kumar : यूपीएससी देने वाले दस लाख छात्रों के लिए बुरी खबर… सीटों की संख्या घटी… 2018 में यूपीएससी की परीक्षा के लिए सीटों की संख्या छह साल में सबसे कम है। 2018 की यूपीपीएसी परीक्षा के लिए नोटिफिकेशन आ गया है। 782 सीटों के लिए परीक्षा हो रही है। 2017 की तुलना में 198 सीटें कम हैं। यह पिछले छह साल में सबसे कम है। आई ए एस आई पी एस की संख्या कम हो रही है तो सोचिए बाकी अधिकारियों की संख्या में किस स्तर और रफ़्तार से कटौती हो रही होगी।

देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले में देश के सबसे अमीर अम्बानी परिवार का दामाद शामिल

यह घोटाला भी अच्छे दिनों की गिनती में आ जायेगा…. 

Girish Malviya : देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले में देश के सबसे अमीर अम्बानी परिवार का दामाद शामिल… यदि यह हेडलाइन आपको आज के अखबारों में, न्यूज़ चैनलों की ब्रेकिंग न्यूज़ में नहीं दिखाई दे रही है इसका मतलब है कि मीडिया पूरा बिक चुका है जो ऊपर लिखा है वह 100 प्रतिशत सत्य है लेकिन कोई बताएगा नहीं! कल जिस नीरव मोदी का नाम पीएनबी घोटाले में सामने आ रहा है उसके सगे भाई निशाल मोदी से, धीरूभाई अंबानी की बेटी, मुकेश ओर अनिल अंबानी की बहन दीप्ति सलगांवकर की बेटी इशिता की शादी हुई है. सीबीआई ने एफआईआर में निशाल का भी नाम लिया है.  कल पीएनबी बैंक में जो घोटाला सामने आया है उसने पूरे विश्व मे भारतीय बैंकिंग व्यवस्था की इज्जत की धज्जियाँ बिखेर दी है. पोस्ट लम्बी है पर पूरी जरूर पढियेगा. वैसे पता नहीं मीडिया इसे किस तरह से दिखाएगा. पर वास्तव में यह घोटाला बताता है कि हमारी बैंकिंग व्यवस्था की चाबी किस तरह के भ्रष्ट लोगों के हाथ में आ गयी है.

मोदी ने एक अच्छा मौका बकलोली-थेथरई में गंवा दिया, राहुल गांधी के जरूर अच्छे दिन ला दिए : यशवंत सिंह

Yashwant Singh :  मोदी ने एक अच्छा मौका बकलोली-थेथरई में गंवा दिया। बढ़ता आतंकवाद, गिरती इकानामी, चढ़ती महंगाई, उग्र बेरोजगारी, भयावह करप्शन और तेज होते जातीय-धार्मिक हमलों के बाद भी भाजपाई अगर 2019 में जीतने के सपने देख रहे हैं तो वाकई उनकी मानसिक स्थिति खराब है। राहुल गांधी को एक मौका देना बनता है। लिख लो, मेरा वोट अब राहुल गांधी को, 2019 में। मोदी ने जो दिन दिखा दिए, उसके आधार पर कह सकता हूँ कि उनसे सौ गुना ज्यादा समझदार नेता साबित होंगे राहुल गांधी, मेरा ये दावा है। कह सकते हैं कि मोदी ने अपनी करनी से राहुल गांधी के अच्छे दिन जरूर ला दिए हैं। बेहद दुखी और त्रस्त जनता अब राहुल गांधी पर ही दांव लगाएगी.

गोलीबारी और सर्जिकल स्ट्राइक कर सिर्फ गाल बजाने से काम नहीं चलेगा मोदी जी

आतंकी हमले नहीं होंगे, यह कौन सुनिश्चित करेगा… जम्मू के सुंजवान में शनिवार तड़के आतंकियों ने एक बार फिर नापाक हरकत की। सुंजवान सैन्य शिविर में केवल सैनिक ही नहीं बल्कि उनके परिजन भी थे। इस हमले का संदेह जैश-ए-मोहम्मद पर ही जा रहा है। इससे पहले उरी और पठानकोट पर भी आतंकियों ने इसी तरह हमला किया था। पिछले साल सेना ने 213  आतंकियों को मार गिराया, यह उनकी हताशा का परिचायक है। लेकिन इस तथ्य से मन को बहलाया नहीं जा सकता है। पाकिस्तान की ओर से सीमा पर गोलीबारी, घुसपैठ का सिलसिला थम नहीं रहा है। शायद ही कोई दिन बीतता हो, जब हमारे जवान शहीद न होते हों। इस बार हमले में शहीद हुए लेफ्टिनेंट मदन लाल चोधरी की एक रिश्तेदार गर्भवती थीं, वे भी घायल हुई पर उन्हें किसी तरह बचाया गया और उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया।

कांग्रेसी सरकार चल रही है या भाजपा की… जनता फर्क नहीं कर पा रही… देखें संघियों की शाहखर्ची

उत्तराखंड की त्रिवेंद्र रावत वाली भाजपा सरकार ने नौ महीने में 69 लाख रुपए केवल चाय-नाश्ते पर खर्च कर दिए

Yashwant Singh : उत्तराखंड सरकार ने मेहमानों के चाय-नाश्ते पर बीते 9 महीने में सरकारी फंड से 68 लाख 59 हजार 865 रुपए खर्च कर दिए. हेमंत सिंह गौनियां नाम के आरटीआई एक्टिविस्ट ने 19 दिसंबर 2017 को अप्लीकेशन लगाई थी. इसमें पूछा गया था कि त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से अब तक चाय-पानी तक कितना सरकारी पैसा खर्च हुआ? 19 साल आरएसएस के प्रचारक रहे त्रिवेंद्र रावत ने 18 मार्च, 2017 को उत्तराखंड के नौवें सीएम के रूप में शपथ ली थी.

सुंजवां सैनिक अड्डे पर हमला मोदी सरकार के मुंह पर करारे तमाचे हैं : डॉ. वेदप्रताप वैदिक

इस आतंकी हमले का अर्थ क्या है? जम्मू के सुंजवां सैनिक अड्डे पर आतंकवादियों ने फिर हमला कर दिया। 5 भारतीय जवान शहीद हो गए और अन्य पांच-छह लोग घायल हो गए। यह हमला पाकिस्तान के आतंकवादियों ने ही किया है, ऐसा जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक का दावा है। यह हमला अफजल गुरु और मकबूल बट को हुई फांसी के दिन किया गया है। इसी अड्डे पर 2003 में भी हमला हो चुका है। तब 12 जवान मारे गए थे।

आम्रपाली से ठगे गए निवेशक बोल रहे- ‘Modi and Yogi have no plans to give us relief’

Yashwant Singh : आम्रपाली से ठगे गए फ्लैट बायर्स ने अपने व्हाट्सअप ग्रुप में मुझे भी जोड़ रखा है, क्योंकि पीड़ितों में से एक मैं भी हूं। हजारों लोगों से अरबों रुपए वसूलने वाले अनिल शर्मा को इतनी बड़ी ठगी, धोखेबाजी और छल करने के बावजूद मजाल है कोई छू ले।

मोदी और तोगड़िया : ये जंग हिंदू चहरे के लिए है!

देश में इन दिनों एक सवाल सबके पास है कि प्रवीण तोगड़िया और बीजेपी सरकार के बीच आखिर तकरार है क्या? क्या वजह है कि तोगड़िया ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और क्या वजह है कि वो ये कह रहे हैं कि एनकाउंटर की साजिश रची जा रही है। तो जरा लौटिए 2017 दिसंबर के महीने में, क्यों कि संघ से जुड़े सूत्र कहते हैं कि विश्व हिंदू परिषद जो कि संघ की अनुषांगिक शाखा है, इसके इतिहास में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव करवाए गए। इसकी सबसे बड़ी वजह ये थी कि संघ के भीतर ही दो खेमे बन गए थे। एक खेमा चंपत राय को अध्यक्ष के रूप में देखना चाहता है तो दूसरा खेमा प्रवीण तोगड़िया को अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के रुप में देखना चाहता था। लिहाजा तय किया गया कि इसके लिए चुनाव करवाए जाएंगे।

मोदी जी का इंटरव्यू और जी न्यूज के सामने पकौड़े वाला….

Nitin Thakur : सुधीर सर ने जो इंटरव्यू लिया उसे जर्नलिज़्म के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाए. छात्रों को वो हुनर सिखाया जाए कि एकतरफा संवाद करनेवाले नेता के भाषण के बीच में सवालनुमा टिप्पणी कुशलतापूर्वक घुसाकर कैसे इंटरव्यू होने का भ्रम पैदा किया जाता है. मोदी जी ने बाकायदा समझाया कि कैसे ज़ी न्यूज़ के बाहर पकौड़े तलनेवाले को 200 रुपए रोज़ाना का रोज़गार मोदीकाल में मिला है।

मोदी और तोगड़िया : कभी दोस्त थे, आज दुश्मन बन बैठे… जानिए अंदर की कहानी

हमेशा से कहा जाता रहा है कि “जर, जोरू और जमीन” के कारण पक्के दोस्तों में ही नहीं, भाइयों में भी दुश्मनी हो जाती है। धीरूभाई अंबानी के देहावसान के बाद अंबानी भाइयों में छिड़ा युद्ध इस सत्य की मिसाल है। इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है। हालांकि इतिहास इस बात का भी गवाह है कि “जर, जोरू और जमीन” के साथ इसमें “तख्त” भी जोड़कर इसे “जर, जोरू, जमीन और तख्त” कहा जाना चाहिए। “जर” यानी धन, “जोरू” यानी स्त्री, “जमीन” यानी चल-अचल संपत्ति, और “तख्त” यानी सत्ता। इतिहास उन उदाहरणों से भी भरा हुआ है जहां तख्त के लिए पुत्र ने पिता को कारागार में डाल दिया या भाई ने भाई को मार डाला। राजा की वफादार सेना अलग होती थी और युवराज की वफादार सेना अलग, या अलग-अलग राजकुमारों की सेनाएं अलग-अलग रही हैं और उनमें युद्ध हुए हैं।

नेतन्याहू इजरायल से ‘भाग’ कर आये हैं भारत, जानिए क्यों…

Mithilesh Priyadarshy : नेतन्याहू इजरायल से ‘भाग’ कर आये हैं. उनके अपने देश में लोग उनसे इस्तीफ़ा मांग रहे हैं. क्योंकि उनपर गैस के सबसे बड़े उत्पादक कोबी मेमोन (भारत का अम्बानी) को एक बड़े सौदे में फ़ायदा पहुँचाने का आरोप लगा है. और यह बात बड़े दिलचस्प तरीके से सामने आई है. नेतन्याहू का बेटा कोबी मेमोन के बेटे से एक वेश्या को देने वास्ते कुछ उधार माँगता है, ‘भाई, मेरे बाप ने तुम्हारे लिए 20 अरब डॉलर का सौदा करवाया है और तुम मुझे 400 शेकेल ‘पंइचा’ नहीं दे सकते?’ बस तब से बवाल कटा पड़ा है.

अमित शाह का केस लड़ ने वाला वकील सुप्रीम कोर्ट में जज बना, जिस जज ने शाह को बरी किया वह राज्यपाल बन गया

भारत में न्यायपालिका को लेकर बहस जारी है. सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने जो विद्रोह कर सुप्रीम कोर्ट के भीतर सब कुछ ठीक न चलने की जो बात कही है, उसके दूरगामी मायने निकाले जा रहे हैं. इसी दौर में कुछ लोगों ने कुछ घटनाओं की तरफ ध्यान दिलाया. जैसे अमित शाह का जो केस एक वकील लड़ रहा था, उसे सुप्रीम कोर्ट में जज बना दिया गया. सुप्रीम कोर्ट के जिस जज ने अमित शाह को बाइज्जत बरी किया, उसे रिटायरमेंट के बाद राज्यपाल बना दिया गया.

भाजपा और मोदी का सिंगल ब्रांड रिटेल सौ फीसदी एफडीआई मंजूरी का पुराना विरोध जुमला हो गया

Paramendra Mohan : 2012 की बात है, भ्रष्टाचार-घोटालों के आरोपों में घिरी मनमोहन सरकार ने सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी एफडीआई लागू करने का फैसला लिया था। इससे भारतीय छोटे व्यापारियों का बर्बाद होना और विदेशी कंपनियों का फायदा होना तय था। ये बड़े विदेशी ब्रांड भारतीय बाजार से सस्ता माल खरीदकर उससे बने उत्पाद का एक बड़ा भाग ग्लोबल मार्केट में बेचते, लेकिन खरीदी को लोकल सोर्सिंग बताकर छूट पाते।

मोदी अपने अहंकार में किसी दूसरे का रुख जानने-समझने को तैयार ही नहीं हैं

पी. के. खुराना

गुजरात विधानसभा चुनावों के बाद संसद का संक्षिप्त सत्र चला और समाप्त हो गया। गुजरात विधानसभा चुनावों के समय हमने अमित शाह और नरेंद्र मोदी का नया रूप देखा। वहां किसानों में गुस्सा था, बेरोजगारी को लेकर नौजवानों में गुस्सा था, आरक्षण के मुद्दे पर पटेल समाज तथा अन्य पिछड़ी जातियों के लोग नाराज थे। नोटबंदी और जीएसटी के कारण व्यापारी वर्ग नाराज था। जीएसटी का सर्वाधिक विरोध सूरत में हुआ। सारे विरोध के बावजूद भाजपा अपनी सत्ता कायम रखने में सफल रही और विजय रूपाणी मुख्यमंत्री के रूप में कायम हैं।

सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी FDI : क्यों साहेब, तब देश बिक रहा था… अब तो ये देशभक्ति है ना?

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डॉ राकेश पाठक

स्वदेशी के पैरोकार अब कहाँ गायब हैं… अंततः मोदी सरकार ने सिंगल ब्रांड रिटेल में सौ फीसदी सीधे विदेशी निवेश (FDI ) के लिए दरवाज़े खोल कर लाल कालीन बिछा दिए हैं। अब तक इस तरह के निवेश की सीमा 49 फीसदी थी।इस फैसले के बाद “वालमार्ट” जैसी भीमकाय कंपनियां भारत में खुदरा व्यापार में सौ फीसदी निवेश कर धंधा कर सकेंगीं सो भी बेरोकटोक। लेकिन यह फैसला करते वक्त सत्ताधारी पार्टी यह भूल गयी कि वो इसी एफडीआई के विरोध में कैसे धरती आसमान एक कर देती थी । सरकार के मुखिया नरेंद्र दामोदर दास मोदी, वित्त मंत्री अरुण जैटली भूल गए कि कांग्रेस की सरकार में ऐसे निवेश के विरोध में क्या कहते-बोलते थे?

वरिष्ठ पत्रकार अजय सेतिया बोले- प्रधानमंत्री मोदी ने ब्यूरोक्रेसी को बेलगाम कर दिया है

Ajay Setia : मैं इसे पत्रकारिता पर हमला मानता हूं। यूआइडीएआई ने जिस तरह आधार कार्ड का डाटा बेचे जाना का भंडा फोड़ करने वाली ट्रिब्यून की रिपोर्टर रचना खेरा पर केस दर्ज किया है, यह लोकतंत्र के चौथे खंभे को नोचने वाली घटना है। ब्यूरोक्रेसी ने नरेंद्र मोदी को यह बता रखा था कि यह डाटा एक दम सुरक्षित है, उसी भरोसे मोदी सरकार सुप्रीमकोर्ट में सुरक्षा की गारंटी दे रही थी। सुप्रीमकोर्ट के फैसले से ठीक पहले ट्रिब्यून की रिपोर्टर ने आधार कार्ड के गोरख धंधे की पोल खोल कर रख दी , तो अफसरों के रंग में भंग पड़ गया। वे तिलमिला उठे है और उन्होंने रिपोर्टर पर ही एफआईआर दर्ज करवा दी है। ऐसा नहीं है कि लोकतंत्र के चौथे खंभे पर हमले के लिए सिर्फ अधिकारी जिम्मेदार हैं । जिम्मेदार वे सब भी हैं, जिन्होंने ब्यूरोक्रेसी को बेलगाम बना दिया है।

पीएम के गृहनगर में भाजपा फ्लॉप, गुजरात में 6 मंत्री चुनाव हारे, हिमाचल में भाजपा के भावी सीएम हारे

पीके खुराना

जीत-हार के चुनावी सबक : हिमाचल प्रदेश और गुजरात के चुनाव अपने आप में अनोखे रहे। पहली बार ऐसा हुआ कि चुनाव के दौरान और चुनाव के बाद हम सबको गहराई से सोचने पर विवश किया। बहुत से विश्लेषण हुए और विद्वजनों ने अपनी-अपनी राय रखी। सच तो यह है कि हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा के चुनाव परिणामों में मतदाताओं ने सत्तारूढ़ दल, विपक्ष और चुनाव आयोग को अलग-अलग संदेश दिये हैं। आइये, इन संदेशों को समझने का प्रयत्न करते हैं। नरेंद्र मोदी ने गुजरात जीत कर दिखा दिया है लेकिन उनकी जीत में हार का कसैला स्वाद भी शामिल है।

कश्मीर समस्या का एकमात्र हल

पी.के. खुराना

2014 के लोकसभा चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी ने कई नारे उछाले थे, उनमें से एक नारा था — “मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सीमम गवर्नेंस”। मोदी ने तब यह नारा देकर लोगों का दिल जीता था क्योंकि इस नारे के माध्यम से उन्होंने आश्वासन दिया था कि आम नागरिकों के जीवन में सरकार का दखल कम से कम होगा। लेकिन आज हम जब सच्चाई का विश्लेषण करते हैं तो पाते हैं कि यह भी एक जुमला ही था। अमित शाह ही नहीं खुद मोदी भी गुजरात के विधानसभा चुनाव के लिए गुजरात में प्रचार कर रहे हैं। अमित शाह के साथ बहुत से विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी राज्य में दिन-रात एक किये दे रहे हैं। लगता है मानो देश की सारी सरकारें गुजरात में सिमट आई हैं। गुजरात विधानसभा चुनावों के कारण संसद का सत्र नहीं बुलाया जा रहा है ताकि संसद में असहज सवालों से बचा जा सके, वे सवाल मतदाताओं की निगाह में न आ जाएं। इसी प्रकार चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय को प्रभावित करने के सफल-असफल प्रयास न तो गवर्नेंस हैं और न ही “मिनिमम गवर्नमेंट” के उदाहरण हैं।

2019 के अंत तक बंद होंगे 90% छोटे और मध्यम अखबार बंद हो जाएंगे!

आज़ादी के 70 साल बाद अभी वर्तमान का यह समय छोटे और मध्यम अखबारो के लिए सबसे कठिन है। यदि सरकार के DAVP पॉलिसी को देखा जाय तो लघु समचार पत्रों को न्यूनतम १५ प्रतिशत रुपये के रूप में तथा मध्यम समाचार पत्रों को न्यूनतम ३५ प्रतिशत रुपये के रूप में विज्ञापन देने का निर्देश है। गौरतलब है कि भारत विविधताओं का देश है यहां विभिन्न भाषाएं हैं। ग्रामीण तथा कस्बाई इलाकों में भिन्न-भिन्न प्रकार के लोग रहते हैं। बड़े अखबार समूह की पहुंच वहां तक नहीं है। यदि विज्ञापन के आवंटन में भाषा और मूल्य वर्ग का ध्यान नहीं रखा गया तो निश्चित ही उस विज्ञापन की पहुंच विस्तृत तथा व्यापक नहीं होगी और विज्ञापन में वर्णित संदेश का प्रसार पूरे देश के समस्त क्षेत्रों तक नहीं हो पायेगा। पूर्व मंत्री द्वारा राज्यसभा में एक प्रश्र के उत्तर में नीति के पालन की बात कही गयी थी। परन्तु आज वह बयान झूठ साबित हो रहा है।

चार महीने पहले रेल टिकट कटाने वाले इंजीनियर का दिवाली पर घर जाने का सपना ‘वेटिंग’ ही रह गया!

Yashwant Singh : हरिद्वार में कार्यरत इंजीनियर गौरव जून महीने में तीन टिकट कटाए थे, दिल्ली से सहरसा जाने के लिए, अपनी बहनों के साथ। ट्रेन आज है लेकिन टिकट वेटिंग ही रह गया। चार्ट प्रीपेयर्ड। लास्ट मोमेंट में मुझे इत्तिला किया, सो हाथ पांव मारने के बावजूद कुछ कर न पाया। दिवाली अपने होम टाउन में मनाने की उनकी ख्वाहिश धरी रह गई। दिवाली के दिन अपने जिला-जवार में होने की चार महीने पहले से की गई तैयारी काम न आई।

क्या वाकई नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है?

Dilip Khan : हार्ड वर्क वाले अर्थशास्त्री मोदी जी जब सत्ता में आए तो इन्होंने आर्थिक सलाह परिषद को ख़त्म कर दिया। जब अर्थव्यवस्था की बैंड बजने लगी तो दो दिन पहले यूटर्न लेते हुए परिषद को फिर से बहाल कर दिया। अर्थशास्त्री नरेन्द्र मोदी ने आंकड़ों को ‘खुशनुमा’ बनाने के लिए GDP गणना के पुराने नियम ही ख़त्म कर दिए। लेकिन गणना के नए नियमों के मुताबिक़ भी GDP दर तीन साल के न्यूनतम पर आ गई है। पुराना नियम लागू करे तो 3% का आंकड़ा रह जाता है।

गोरों की तरह बदमाश है भारत में कालों की सरकार!

अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों… तो क्या ऐसा ही वतन आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वालों ने हमारे हवाले किया था, जैसा हमने इसे बना दिया है? क्या ऐसे ही वतन के लिए भगत सिंह और उनके साथियों ने हंसते हंसते फांसी का फंदा चूमा था? देश को आजाद कराने के लिए हिंदुओं की ही तरह मुसलमानों ने भी आपस में मिलकर अंग्रेजी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था। गोरों की सरकार ने अपनी फौज के माध्यम से हिंदुओं, सिखों, मुसलमानों आदि पर बेइंतिहा जुर्म ढाये। ईसाई अंग्रेजों के अत्याचार की चपेट में इसलिए नहीं आये कि वे खुद ईसाई व इससे मिलती-जुलती कौम के थे।