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FIIT JEE का फर्जीवाडा, NEET पेपर लीक, एजुकेशन माफिया और WEBDUNIA की पत्रकारिता

नवीन रंगियाल-

ईआईटी और जेईई की तैयारी कराने वाली फिट्जी संस्था FIIT JEE का हाल ही में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इंदौर, भोपाल, नागपुर, जयपुर समेत कई शहरों में पहले तो कोचिंग के लिए एडवांस में करोड़ों की फीस ले ली। बाद में पता चला कि कई शहरों के सेंटर्स की फैकल्टी को वेतन नहीं मिल रहा है इसलिए उन्होंने पढ़ाना बंद कर दिया है। देखते ही देखते कई सेंटर्स में कक्षाओं में सन्नाटा पसर गया। वेबदुनिया ने इंदौर में भी पड़ताल की तो क्लास नहीं, एडमिशन नहीं और कोई मौजूद नहीं।

शुरूआत में यह खबर एक दो मीडिया हाउस ने प्रकाशित की, जब मैंने हमारे संस्थान वेबदुनिया के लिए थोड़ी अंदर जाकर पड़ताल की और इस खबर को प्रोमिनेंटली प्रकाशित किया तो फिट्जी वालों के हलक सूख गए।

कहीं से मेरा मोबाइल संपर्क निकालकर मुझे कॉल किए और कहा गया कि आप ख़बर हटा लें और इसके बदले में जो और जैसा चाहे वे हमारा कल्याण करने के लिए तैयार हैं। वे विज्ञापन या किसी भी तरह की डील के लिए तैयार थे, मैंने उनसे कहा कि आप मामले में अपना पक्ष रख दें, हम खबर के साथ आपका पक्ष भी लिखेंगे, जैसा कि आमतौर पर जर्नलिज्म के एथिक्स के तहत किया जाता है, लेकिन वे खबर हटाने के ऐवज में हमें किसी भी तरह ओब्लाइज्ड करने पर अड़े रहे। तब मैंने उन्हें कहा कि हम अपनी मुक्ति नहीं चाहते हैं, हम आपका श्राप लेकर ही मरेंगे, क्योंकि मामला देशभर के हजारों स्टूडेंट और उनके मां- बाप से जुड़ा है। करोड़ों फीस फसी हुई है सो अलग।

हमारी उनसे पक्ष रखने की अपील के बावजूद उनकी पीआर एजेंसी के आला अधिकारी लगातार मुझे हैदराबाद और दिल्ली से अप्रौच करते रहे। 24 घंटों में कई कॉल किए गए, कई बार व्हाट्सएप कॉल किए गए, सैंकड़ों मैसेज किए। (इन कॉल्स और मैसेज के स्क्रीन शॉट मैं यहां लगा रहा हूं) हमारे पास रिकॉर्डिंग भी है। उन्होंने यहां तक कहा की मैनेज हो जाओ, मेरी नौकरी का सवाल है, लेकिन हम कैसे मैनेज होते, यहां तक कि हमने वेबदुनिया के लिए विज्ञापन के लिए भी हां नहीं कही, क्योंकि यह हमारे जमीर का सवाल था।

इसमें दिलचस्प पहलू ये था कि फिट्जी के बाशिंदों ने वेबदुनिया से ख़बर हटाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी, क्योंकि यह ख़बर उन्हें सिर्फ़ वेबदुनिया पर ही प्रमुखता से नज़र आई, साफ़ है कि देश के अन्य मीडिया हाउस ने या तो इस खबर को लिया नहीं या उसे अंडरप्लै किया या फिर वे मैनेज हो गए। (ठीक जैसे वेबदुनिया को मैनेज करने की कोशिश की गई)

सवाल उठता है की जो मीडिया जहीर- सोनाक्षी की शादी पर मरी-मरी जा रही है, जो नीट पेपर लीक मामले में तह तक जाकर इस केस के तार तार लेकर आ रही है उसे फिट्जी सेंटर शटडाउन होने में कोई दिलचस्पी क्यों नहीं है?

वहीं, वेबदुनिया ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेरते हुए फिट्जी के फर्जीवाड़े का फॉलोअप भी किया। उस खबर को भी हमने फिट्जी के संरक्षकों तक पहुंचाया। इस खबर के पीछे हौंसले के तौर पर सीनियर मैनेजमेंट और वेबदुनिया टीम पीछे खड़ी रही।

बहरहाल, यह अभी सिर्फ़ शुरुआत है, देश में कॉरपोरेट कोचिंग माफिया किस हद तक पसर गया है और कब वो अचानक से वो स्टूडेंट और उनके परिजनों के सपनों का मटियामेट कर सकते हैं फिटजी इसकी सिर्फ एक बानगीभर है। राजस्थान के कोटा से आए दिन बच्चों के आत्महत्या की खबरें सामने आती है, अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोचिंग में तैयारी करने वाला छात्र क्या सोचता होगा, उस पर कितना प्रेशर होगा कि वो सुसाइडल मानसिकता तक चला जाता है। क्या कॉर्पोरेट कोचिंग संस्थानों का ये मतलब है कि फीस के लिए लाखों करोडों वसूलों और बच्चों के भविष्य को अधर में लटका दो। क्या हम अभी भी इन कोचिंग संस्थानों को संस्थान कहेंगे या यह मानेंगे कि ये एजुकेशन माफिया में तब्दील हो चुके हैं, ठीक अस्पताल माफियाओं की तरह। ऐसे जनसमुदाय और स्टूडेंट से जुडे मामलों में मीडिया की भूमिका पर भी संदेह के घेरे में है।

नीचे देखें बातचीत के स्क्रीन शॉट…

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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