मोदी राज में पीड़ित पत्रकार ने लिख डाली किताब-‘जीएसटी 100 झंझट’, आप भी मंगाएं और पढ़ें

Sanjaya Kumar Singh : जीएसटी पर मेरी फेसबुक पोस्ट – “जीएसटी 100 झंझट” पुस्तक रूप में बस अभी छप कर आई है। प्रकाशक हैं कौटिल्या। ऑर्डर करने के लिए लिंक यह रहा : https://kautilya.in/products/gst-100-Jhanjhat

Rajaram Tripathi : बहुत-बहुत बधाई भाई Sanjaya Kumar Singh मेरा विनम्र अनुरोध है की एक किसान को उसकी उपज को अलग राज्यों में अलग-अलग रूपों में जैसे धान को चावल बनाकर थोक अथवा चिल्हर बेचने पर क्या-क्या टैक्स लगेंगे और कितना कितना टैक्स लग सकता है आयकर जीएसटी आदि, यदि वही किसान अपनी उगाई ही चीजों से कोई प्रोडक्ट बनाता है जैसे अपने उगाए हुए आलू से अगर चिप्स बनाता है तो उसको क्या , कैसे टैक्स लगना चाहिए??? अगर आर्गनिक हो तो कोई छूट? किसान अगर खेती के अलावा अन्य कोई धंधा न करता हो तो उस पर आयकर कैसा लगना चाहिए यह सारे मसले आयकर जीएसटी तथा एक्साइज टैक्स में अंधों के हाथी की तरह व्यवह्रृत किए जा रहे हैं , जिस अधिकारी को जैसा समझ में आ रहा है वैसे फैसले दे रहा है , कुल मिलाकर कुएं में भांग पड़ी हुई है। अगर इस पर आप कुछ प्रकाश डालें तथा मार्गदर्शन दें तो बड़ी मेहरबानी होगी तथा लाखों किसान लाभान्वित होंगे।

Sanjaya Kumar Singh : कहने के लिए खेती टैक्स मुक्त है पर भड़ास के कार्यक्रम में मैंने आपको सुना था – सरकारी अधिकारी अपनी इच्छा से कानून का दुरुपयोग कर सकते हैं, करते हैं और आमतौर पर गरीब पैसे नहीं देता है, पैसे वाले पैसे देकर अपना काम चलाते हैं। जीएसटी भी ऐसा ही है। कहने को 20 लाख तक का कारोबार करने वाले टैक्स से मुक्त हैं पर कुछ नियम ऐसे हैं कि अधिकारी किसी को कभी भी परेशान कर सकते हैं। जीएसटी की किताब में मैंने यही बताने / समझाने की कोशिश की है। भड़ास के कार्यक्रम में ही डॉक्टर अजेय अग्रवाल ने साबित किया था कि मीडिया वालों ने उनके खिलाफ गलत खबर दिखाई, यह उनके लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन है, वे सुप्रीम कोर्ट से जीत गए। सुप्रीम कोर्ट ने माफी नामा चलाने का आदेश दिया। नहीं चला। कुछ नहीं हुआ। लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन करने की भी कार्रवाई नहीं हुई। कानून ऐसे ही हैं कि गलत हुआ है तो ले-देकर निपटाओ नहीं तो मामला सालों तलेगा लाभ कोई नहीं। इन्हीं स्थितियों के कारण वकील भी जीएसटी से लगभग मुक्त रखे गए हैं। पत्रकारों को सुवधाएं दी जाती हैं (अब तो मीडिया संस्थानों को मिलती हैं) और सब ऐसे ही चल रहा है ताकि जनता संगठित होकर विरोध न करे। जनता को बताने के लिए किताब लिखी जा सकती है पर वह बीमारी की जानकारी है, इलाज तो नहीं। यह सरकार भ्रष्टाचार खत्म करने के नाम पर सत्ता में आई थी पर सबसे ज्यादा भ्रष्ट सेवा कर रही है। और इतनी सफलता से कर रही है कि आम आदमी ना समझ रहा है, न समझने को तैयार है। उसे धर्म और मंदिर का नशा दे दिया गया है।

Manoj Jha : Sanjay jee any plans to publish in English? Suggest send a copy to PM- Shree Modi , FM Arun Jaitley & GST implementers – Hasmukh Adhya on my account.

Sanjaya Kumar Singh : This is for the voters. Hope, they will take care. If not, English translation will be a useless exercise – they know what they have done.

Vipul Rastogi : बहुत ही उम्दा। मैं जानता हूँ कि इसमें आपके कितने महीनों की मेहनत लगी हुई है। आम आदमी जो कि जीएसटी के विषय में लगभग कुछ नही जानता है, अगर एक बार इस किताब को पढ़ ले तो सारा रायता जो फैलाया गया था, समझ में आ जायेगा।

सौजन्य : फेसबुक

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