ब्यूरो चीफ की हत्या से दुखी संपादकीय टीम ने मनाया काला दिवस, ‘हिंदुस्तान’ निकला ब्लैक एंड ह्वाइट

बिहार के सीवान में शुक्रवार शाम अपराधियों ने हिंदुस्तान अखबार के पत्रकार राजदेव रंजन की गोली मारकर हत्या कर दी। पत्रकार राजदेव रंजन को 5 गोली मारी गई। पत्रकार की हत्या के अगले दिन अखबार ने अपना पहला पन्ना ब्लैक एंड वाइट रंग में छापा है। अखबार बिहार में इसे ‘काला दिवस’ के रूप में दिखाया है। पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या शादी की सालगिरह से एक दिन पहले की गई। रंजन पर हमला करने वाले 4 की संख्या में थे। पुलिस ने दावा किया है कि इन 4 में से 2 की पहचान कर ली गई है। सीवान के एसपी ने बताया कि पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में ले लिया है। राजदेव रंजन को 5 गोलियां लगी जिसमें 1 सिर में और दूसरी गर्दन और 3 पेट में गोली लगी है।

इस हत्या के बाद हर तरफ से विरोध झेल रही राज्य सरकार में शामिल दलों के तरफ से प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। जेडीयू प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा, ‘आप जो चाहते हैं कहिए… अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है और वह जल्द ही पकड़े जाएंगे। राज्य सरकार अपने काम को लेकर प्रतिबद्ध है। 48 घंटे में अपराधी पकड़े जाएंगे। आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि सीवान में जो घटना हुई वो दुखद है पर हम आश्वस्त करते हैं कि तुरंत कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को बक्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी चिल्ला चिल्ला कर सरकार की छवि खराब कर रही है लेकिन उसके अपने राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश में क्या हुआ?

वहीं राज्य में बीजेपी का बड़ा चेहरा सुशील कुमार मोदी ने नीतीश सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा कि सीवाम शाहबुद्दीन के प्रभाव वाला क्षेत्र है। अभी तक कभी पत्रकारों पर हमला नहीं हुआ लेकिन अब हत्या हो रही है। मनोरमा देवी की गिरफ्तारी हो नहीं रही है और उसके बाद ये घटना हुई है। हम लोग बड़ी मेहनत से लालू जी के 15 साल के जंगलराज से बिहार को वापस लाए थे लेकिन अब लोगों में डर बैठा हुआ है कि कहीं फिर से जंगलराज वापस आ रहा है।

लोकजनशक्ति पार्टी (एलजेपी ) प्रमुख रामविलास पासवान ने कहा कि हम लोग तीन महीने से बिहार में राष्ट्रपति शासन की मांग कर रहे हैं। जब गया में आदित्य की हत्या हुई तो हमने सीबीआई जांच की मांग की थी और राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी थी। चिराग राष्ट्रपति से मिलने गए थे। हम इस सीवान की घटना की भी सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि बिहार में अब बिना बिलंब किए राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि नीतीश लालू दोनों चुप हैं। बीजेपी उनसे सवाल पूछती है कि आखिर कब तक वो ऐसे चुप रहेंगे? गिरिराज सिंह ने कहा कि नीतीश पहले बिहार संभालें फिर प्रधानमंत्री बनने का सपना देखें। तेजस्वी यादव गया में एक व्यक्ति की हत्या होती है तो उसे पठानकोट में हुए आतंकी हमले से जोड़ रहे हैं। अंधेर नगरी चौपट राजा और अब सीवान में पत्रकार की हत्या हो गई है।

इस बीच, नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) ने बिहार के सीवान में दैनिक हिन्दुस्तान के पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या की कड़ी निंदा की है। झारखंड के चतरा और बिहार में पत्रकारों की हत्या के खिलाफ एनयूजे और दिल्ली पत्रकार संघ की तरफ से केंद्रीय गृह मंत्री के आवास पर प्रदर्शन किया जाएगा। एनयूजे ने रंजन की हत्या में बिहार के एक माफिया सरगना के गुर्गों पर शक जताया है। अक्टूबर 2005 में भी रंजन पर अखबार के दफ्तर में घुसकर हमला किया गया था। एनयूजे ने पत्रकार के परिजनों को 20 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग भी की है।

एनयूजे के अध्यक्ष रासबिहारी ने बताया कि बेखौफ अपराधियों ने 13 मई की रात को सीवान में हिन्दुस्तान के ब्यूरो चीफ पत्रकार राजदेव रंजन की गोली मारकर हत्या कर दी। उन्हें करीब से गोली मारी गई। रंजन कार्यालय से वापस लौट रहे थे। रात आठ बजे के करीब टाउन थाना क्षेत्र के ओवरब्रिज के समीप अज्ञात अपराधियों ने उन्हें गोली मार दी। अपराधी मोटरसाइकिल पर थे और घटना को अंजाम देकर भागने में कामयाब रहे। एक गोली उनके सिर और दूसरी गर्दन में लगी। गंभीर रूप से जख्मी राजदेव रंजन को पुलिस अस्पताल ले गई, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत गई। 46 वर्षीय राजदेव रंजन सीवान के महादेवा मिशन कंपाउंड मोहल्ले में रहते थे। उन्होंने कहा कि इससे एक दिन पहले अपराधियों ने झारखंड के चतरा में पत्रकार इंद्रदेव यादव की ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी थी।

रासबिहारी ने बताया कि इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने भी पत्रकारों की हत्या को गंभीरता से लिया है। आईएफजे की तरफ से कहा गया है कि मीडिया के लिए भारत पहले ही असुरक्षित माना जाता है। इन हत्याओं से मीडिया में दहशत व्याप्त है। आईएफजे की तरफ से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दक्षिण एशिया के पत्रकार संगठनों की तरफ से पत्र भेजा जाएगा। एनयूजे के महासचिव रतन दीक्षित ने पत्रकारों की हत्या के खिलाफ बड़े पैमाने पर आन्दोलन करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पिछले साल देश में आठ पत्रकारों की हत्या हुई थी और 120 से ज्यादा हमले हुए थे। पत्रकारों की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों की तुरंत गिरफ्तार कारणों का खुलासा किया जाए। एनयूजे बिहार के महासचिव राकेश प्रबीर ने कहा कि राज्य में विधानसभा चुनाव के दौरान भी दो पत्रकारों की हत्या हुई थी। पत्रकारों की हत्या के बाद बिहार की मीडिया में खौफ पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि रंजन की हत्या के बाद पुलिस अपराधियों को पकड़ने के लिए कोई तत्परता नहीं दिखा रही है। घटना के विरोध में बिहार में जगह-जगह प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

एनयूजे से संबद्ध दिल्ली पत्रकार संघ (डीजेए) के अध्यक्ष अनिल पांडेय और महासचिव आनंद राणा ने कहा कि झारखंड और बिहार में पत्रकारों ही हत्या के खिलाफ मीडिया जगत में भारी नाराजगी है। इससे पहले फरीदाबाद में महिला पत्रकार की रहस्यमय हालात में मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की हत्या के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ज्ञापन दिया जाएगा।

बिहार के सीवान जिले में हिन्दी दैनिक हिन्दुस्तान के ब्यूरो चीफ राजदेव रंजन की नृशंस हत्या की इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट (आईएफडब्लूजे) ने कड़े शब्दों में निंदा की है। आईएफडब्लूजे के राष्ट्रीय महासचिव परमानंद पाडे व उपाध्यक्ष हेमंत तिवारी ने एक साझा बयान में बिहार में पत्रकार की दिन-दहाड़े हत्या पर रोष जताते हुए कहा है कि इस घटना से यह साफ हो गया है कि राज्य में कानून का राज धवस्त हो गया है। उन्होंने कहा कि हाल के कुछ दिनों में पत्रकारों पर बढ़ते हमलों की घटनाओं से भी सरकारों ने कोई सबक नही सीखा है। आईएफडब्लूजे ने बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार से अपराधियों के तुरंत गिरफ्तारी की मांग करते हुए राज्य में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने को कहा है। हेमंत तिवारी ने राजरंजन देव के परिवार को २५ लाख रुपये की सहायता पर परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की है।

The Indian Federation of Working Journalist (IFWJ) has strongly condemned the brutal killing of a journalist in Bihar on Friday. The Bureau Chief of Siwan district, Bihar, Raj Ranjan Dev was sprayed with bullets by miscreants in daylight on Friday. The National Secretary General of IFWJ, Parmanand Pandey and National Vice-President Hemant Tiwari in a joint statement said that the gory killing of journalist in Bihar has exposed the law and order situation in the state. Expressing concern over the growing attacks and killing of scribe in the country IFWJ office-bearers said that it seems government has not learnt any lesson from it. Demanding immediate arrest of culprits, IFWJ office-bearers said that strict measures should be taken to ensure safety and security of journalists. Hemant Tiwari has demanded compensation of Rs 25 lakh to the family of slain journalist and government job of the kin.

अब राजदेव नहीं रहे, टारगेट में कलमकार

योगेश मिश्रा, छत्तीसगढ़
yogeshmishra333@gmail.com

तो सुन लीजिये, एक और कलमकार की साँसे बन्द कर दी हैं, बिहार के किसी हत्यारे ने, एक बार फ़िर एक पत्रकार का परिवार छाती पीट रहा है, एक बार फ़िर एक चौथे खंभे का एक हिस्सा ख़तम कर दिया गया है। दुःखद ख़बर है, कि नितिशराज बिहार के सीवान में दैनिक अख़बार हिन्दुस्तान के ब्यूरो चीफ राजदेव रंजन की गोली मारकर हत्या कर दी गई है, बिहार के सीवान में नगर थाने के स्टेशन रोड स्थित फल मंडी के पास बाइक सवार अपराधियों ने शुक्रवार की देर शाम लगभग आठ बजे दैनिक अखबार के ब्यूरो प्रभारी राजदेव रंजन की गोली मार कर हत्या कर दी।

गत दिनों गुरूवार को झारखंड के चतरा के पत्रकार इंद्रदेव यादव की भी हत्या कर दी गई थी, इन घटनाओं के बाद हमेशा की तरह फ़िर से पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा होना लाज़मी है, बिहार की इस घटना पर अभी से विभिन्न पत्रकार संगठनों ने सरकार के ख़िलाफ़ भौहें ताननी भी शुरु कर दी हैं, हो सकता है कल विभिन्न राष्ट्रीय पत्रकार संगठन अपने अपने प्रदेशों में शासन से एक बार फ़िर पत्रकारों की सुरक्षा, पत्रकारों की जान बचाने वाले कानून के मसौदे को हरी झंडी दिखाने की अर्ज़ी लगाते दिख जाये, ये होता आया है, होना भी चाहिए, पर क्या सिर्फ़ ज्ञापन और विज्ञापनों की दुनिया में खबरें ढूंढने वाले हमारी पत्रकार बिरादरी ज्ञापन-ज्ञापन खेलती रहेगी? बिहार में हुए पत्रकार की हत्या के मामले में आगे जो भी पहलू आये, पर इतना तो तय है कि देश के विभिन्न राज्यों में पत्रकारों की हालत बेहद चिंताजनक है, एक सर्वे की मानें तो बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओड़िसा समेत अनेक राज्यों में लगभग हर महीने पत्रकारों से दुर्भावना, मारपीट की ख़बरें आती रहीं हैं, बाक़ायदा प्रेस काउंसिल ने इस विषय में कई बार ‘घुड़की’ भी दी है, पर फ़िर भी पत्रकारों के साथ हमले, उनकी हत्या जैसे संगीन अपराधों का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है।

मीडिया24न्यूज़ एजेंसी की जर्नलिस्ट टीम के सर्वे ये भी बतलाते हैं कि कई प्रदेशों के ग्रामीण इलाकों में तो पत्रकारों से दुर्भावना, मारपीट आम बात है, बल्कि हैरत की बात ये भी है कि ऐसे मामले सामने नहीं आ पाते, और लोकल स्तर पर रहने वाला पत्रकार हमला करने वाले शख़्स की शिकायत करने को ‘जल में रहकर मगर से बैर’ सा लेता है। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पत्रकार को जिंदा जलाने के मामले में तो सुप्रीम कोर्ट को दख़ल देना पड़ा है, बीते साल जुलाई में देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई में बीयर बार वालों ने राघवेंद्र नामक पत्रकार की बेदर्दी से हत्या कर दी थी, मध्यप्रदेश में व्यापम मामले की रिपोर्टिंग करने गए टीवी पत्रकार की मौत पर कोहराम मचा ही था, मध्यप्रदेश में खनन माफियाओं का तो अफसरों, पत्रकारों पर वाहन चढ़ा देना आम घटना बनती दिखी गई, छग में बस्तर के पत्रकार बस्तर से दिल्ली तक पत्रकारों के उत्पीड़न के मसले पर हुंकार भर रहे हैं, काफ़ी देर से रायपुर के आउटर में होने के कारण राजदेव की मौत पर चैनलों के स्लॉट, हेडलाइंस नहीं देख पाया हूँ, पर अगर अपनी बिरादरी के एक भाई की मौत पर फ़िर हम न्याय नहीं दिला पाये, जवाबदारों के हलफ़ से जवाब नहीं निकलवा पाये, तो हमें अपने आप पर शर्म आनी ही चाहिये, और खुदकी सुरक्षा ही ना कर पाने के बाद हम आमलोगों को ढांढस बांधें, तो ये बेमानी होगी।



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Comments on “ब्यूरो चीफ की हत्या से दुखी संपादकीय टीम ने मनाया काला दिवस, ‘हिंदुस्तान’ निकला ब्लैक एंड ह्वाइट

  • भारत में अच्छें पत्रकारों के ऊपर लगातार हमले होते रहे है। पहले गुंडे बदमाश अपने मनमाफिक या सरकारी कर्मचारी गलत कार्य को छुपाने हेतु दबाव बनाते है ।जब यही लोग दबाव न बनता देख पत्रकारों की हत्या करवाते है । हमारे मीडिया संगठन तो पच्चासों है लेकिन किसी ने भी पत्रकारों के हित कोई अच्छी लड़ाई नही लड़ी … कोई संगठन बना के नेता के पास पहुचंना चाह रहा है कोई राज्यसभा का टीकट पाना चाह रहा है ।पत्रकारों की बाधांए दूर नही हुई है आज कोई भी व्यक्ति कह देता है पत्रकार है तो क्या हुआ । कुछ सरकारी कर्मचारी पत्रकारों को मनमाफिक ब्लेंम लगाते है और कुछ चिल्लम चट्टू उसको छापते है … प्रेस कांसिल ऑफ इंडिया के पास कुछ पत्रकार तो पहुच ही नही पाते है ।पहले हम तरफ से मजबूत हो जायें ताकि किसी भी पत्रकार को कुछ हुआ तो सरकार को भी पलटने का माद्दा हमलोग रख सके ।

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  • pawan joshi says:

    God give courage to late sri rajdev family to face emotional and programmed crime of so called mafia of different field. In rajasthan also such situation is seen and mafia against fair media-men tightening grip with politician,police and owner of major media house.
    As a president of Sikar jila patrakar sangh society I criticize and demand strong action against culprits so mediamen can say truth to people.

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