iimc वाले पढ़ाई कराए जाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं!

दीपांकर पटेल-

IIMC तो आंदोलन की भूमि बन चुका है, यहां हर साल आंदोलन होते ही हैं, और हर आंदोलन वाजिब मुद्दों के लिए होते हैं. छात्रों ने पूरी कोर्स फीस पूरी भरी, लाखों में भरी, इस कोर्स फीस में गेस्ट फैकल्टी के आने जाने का हवाई खर्च भी शामिल होता है, ना गेस्ट फैकल्टी उड़कर पढ़ाने आये ना हवाई किराया लगा, फिर भी छात्रों से हवाई जहाज की फीस भी जोड़कर ली गयी.

बताया गया देर-सवेर ऑफलाइन क्लास करने को मिलेगी ही.
लेकिन अब छात्रों का हौसला जवाब दे गया है. नौ महीने का कोर्स नौ दो ग्यारह होने की कगार पर है.

अब ऑफ़लाइन क्लास शुरू करवाने के लिए छात्रों ने संघर्ष छेड़ दिया है.


क्लासेज़ ऑफलाइन होनी चाहिए या नहीं, सुरक्षित है या नहीं
ये बताने वाला मैं कोई स्वास्थ्य वैज्ञानिक नहीं हूं. दुनिया भर में स्कूल कॉलेजेज बंद हैं, जाहिर है वायरस ख़तरनाक है सीधा रिस्क नहीं लिया जा सकता, पर दूसरे रास्ते तलाशने ही होंगे, सिर्फ ऑनलाइन से काम नहीं बनेगा.

लेकिन हां छात्रों को बधाई और दाद इस बात के लिए दी जानी चाहिए कि उन्होंने आंदोलन की संस्कृति को कैंपस में जिंदा रखा है.

और शिक्षण संस्थाओं को भी चाहिए कि ऐसे जरूरी कदम उठाएं जिससे बेहद सीमित संख्या में ही सही पर इन छात्रों को क्लासरूम कल्चर की थोड़ी हवा दी जाय, वरना ऐसे तो इन बच्चों का पूरा सत्र कोरोना की आंधी की भेंट चढ़ ही चुका है.

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