घोटाले में फंसे हिंदुस्तान अखबार की मालकिन व संपादकों को बचाने के लिए एक आईपीएस अफसर आगे आया

मुंगेर के तत्कालीन एसपी बाबू राम ने हिंदुस्तान की चेयरपर्सन शोभना भरतिया, संपादक क्रमशः शशि शेखर, अक्कू श्रीवास्तव, बिनोद बंधु, मुद्रक अमित चोपड़ा को बचाने के लिए न्याय रूपी देवी की गर्दन ही काट दी… तत्कालीन पुलिस अधीक्षक बाबू राम ने प्रतिवेदन संख्या-04 उस रात में एक बजे लिखी थी जिस रात उनका मुंगेर में अंतिम दिन था… बिहार के सीएम नीतीश कुमार के न्याय-रथ का चक्का टूट गया प्रतीत होता है… सबसे बड़ी बात है कि अभियुक्त शोभना भरतिया की उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में एफआईआर रद्द करनेवाली याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं…

शोभना भरतिया को राहत दिलाने के लिए नियम विरुद्ध काम करने से नहीं हिचक रहे अफसर.

बिहार का एक जिला मुंगेर है । 18 नवंबर, 2011 को सामाजिक कार्यकर्ता मंटू शर्मा ने न्यायालय के आदेश में मुंगेर कोतवाली में दैनिक हिन्दुस्तान नामक हिन्दी दैनिक के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि अखबार प्रकाशन करनेवाली कंपनी के जिम्मेबार पदाधिकारीगण ने भागलपुर स्थित प्रिंटिं स्टेशन से अवैध ढंग से बिना निबंधन के दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण का मुद्रण, प्रकाशन और वितरण 03 अगस्त 2001 से 30 जून, 2011 तक लगतार करते रहे।

नामजद अभियुक्त द प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन लगातार करते रहे। सूचक मंटू शर्मा ने नामजद अभियुक्तों के विरूद्ध यह भी आरोप लगाया कि कंपनी ने इसी नाम के दैनिक हिन्दुस्तान के पटना संस्करण के लिए प्रेस रजिस्ट्रार से प्राप्त निबंधन संख्या आर0 एन0 आई0 नं0-44348 (वर्ष 1986) जो पटना संस्करण के लिए प्रेस -रजिस्ट्रार ने आवंटित किया था, को छल, धोखाधड़ी और जालसाजी की नीयत से भागलपुर और मुंगेर संस्करणों की प्रिंट लाइन पर उस पूरी अवधि में छापते रहे और मुंगेर जिला प्रशासन के सभी सरकारी विभागों, पटना स्थित सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग और नई दिल्ली स्थित डी0ए0वी0पी0 से सरकारी विज्ञापन प्राप्त करते रहे व बिना निबंधन वाले मुंगेर संस्करण में मुद्रित और प्रकाशित करते रहे।

अभियुक्तों ने प्रकाशित सरकारी विज्ञापनों के विरूद्ध विपत्र संबंधित सरकारी विभागों में जमाकर चेक और बैंक-ड्राफ्ट के माध्यम से संबंधित सरकारी विभागों से कई करोड़ रूपया का भुगतान सरकारी खजाना से प्राप्त किया और सरकारी खजाना को वर्षों तक लगातार लूटने का काम किया।

प्राथमिकी दर्ज होने के पांच माह बाद 21 अप्रैल, 2012 को मुंगेर के तात्कालीन पुलिस उपाधीक्षक ऐ0के0 पंचालर ने पर्यवेक्षण-टिप्पणी -01 (जिसका ज्ञापांक संख्या-430। मु0, 21 अप्रैल, 1012 है) जारी की। उन्होंने पृष्ठ संख्या-20 पर पारा नं0-02 में अपना मंतव्य द प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 के प्रावधानों के उल्लंघन के संबंध में कुछ इस प्रकार दिया- ”अनुसंधान एवं पर्यवेक्षण के क्रम में आये तथ्यों से यह स्पष्ट है कि भागलपुर, मुजफ्फरपुर एवं मुंगेर से पी0आर0बी0 एक्ट, 1867 में निहित प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए दैनिक हिन्दुस्तान समाचार-पत्र का मुद्रण। प्रकाशन अनवरत किया जा रहा है।”

तत्पश्चात, 30 अप्रैल, 2012 को मुंगेर के तात्कालीन पुलिस अधीक्षक पी0कन्नन ने प्रतिवेदन-02 जारी किया और प्रतिवेदन की पृष्ठ संख्या-06 के अंतिम पारा में द प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 के प्रावधानों के उल्लंघन के संबंध में यह मंतव्य दिया कि – ”अनुसंधान एवं पर्यवेक्षण के क्रम में आये उपर्युक्त तथ्यों से यह स्पष्ट होना पाया गया कि भागलपुर, मुजफ्फरपुर एवं मुंगेर से पी0आर0बी0 एक्ट-1867 में निहित प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए दैनिक हिन्दुस्तान समाचार-पत्र का मुद्रण-प्रकाशन अनवरत किया जा रहा है ।”

तत्पश्चात, 17 दिसंबर, 2012 को पटना उच्च न्यायालय ने इस कांड के नामजद अभियुक्त व मेसर्स हिन्दुस्तान प्रकाशन समूह (दी हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड, प्रधान कार्यालय-18-20, कसतूरबा गांधी मार्ग, नई दिल्ली) की चेयरपर्सन व पूर्व कांग्रेसी सांसद शोभना भरतिया की एफ0आई0आर0 रद्द करने वाली याचिका क्रिमिनल मिससेलिनियस नं0-2951 (वर्ष 2012) को खारिज करते हुए पी0आर0बी0 एक्ट, 1867 के उल्लंघन पर अपना मंतव्य न्यायालय के अंतिम आदेश के पारा नं0-12 में इस प्रकार दिया-

दोनों पक्षों के विधिवेत्ता को सुना। यह प्रतीत होता है कि विवादग्रस्त सवाल यह उठाया गया है कि क्या अभियुक्तों ने प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धाराएं 5(2सी), 5(3) और 19 (सी) के प्रावधानों का पालन किया है या नहीं? यह और भी प्रासांगिक बन जाता है मुंगेर के जिला पदाधिकारी (उस समय मुंगेर के डी0एम0 कुलदीप नारायण थे) की चिट्ठी के आलोक में जो 27 सितंबर, 2012 को उच्च न्यायालय को लिखी है जिसमें जिला पदाधिकारी ने जो लिखा है निम्नवत है-

‘‘…आज सुबह दैनिक हिन्दुस्तान के एक ही तिथि के मुंगेर संस्करण, लखीसराय शहर के पूर्व बिहार संस्करण और भागलपुर संस्करण की प्रतियों की पड़ताल की गई, तो पाया गया कि सभी तीनों संस्करणों में एक ही संपादक, एक ही प्रकाशक, एक ही मुद्रक, एक ही स्थानीय संपादक, एक ही टेलीफोन नंबर और एक ही आर0एन0आई0 नम्बर प्रकाशित हैं। इस प्रकार, यह प्रतीत होता है कि एक ही निबंधन और एक ही आर0एन0आई0 नंबर पर भिन्न-भिन्न कन्टेन्ट भिन्न-भिन्न जिलों के लिए मुद्रित, प्रकाशित और वितरित किए जा रहे हैं। चूंकि कन्टेन्ट भिन्न हैं, इसलिए वे सभी भिन्न-भिन्न अखबार समझे जायेंगे और उन सभी को भिन्न-भिन्न आर0एन0आई नम्बर होनी चाहिए।”

(पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर मुंगेर के तत्कालीन जिला पदाधिकारी कुलदीप नारायण ने दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण की कानूनी स्थिति की जांच की थी और जांच रिपोर्ट को पटना उच्च न्यायालय को सुनवाई के दौरान भेजा था।)

पटना उच्च न्यायालय ने अंतिम आदेश में पृष्ठ संख्या-6 के पारा नं0-13 में यह भी मंतव्य दिया कि – जिला पदाधिकारी की चिट्ठी ने उच्च पुलिस पदाधिकारियों की अनुसंधान रिपोर्टों को भी संलग्न किया है जो दर्शाता है कि घटनास्थल का हिस्सा मुंगेर भी है और दर्शाता है कि जांच पूरी प्रगति में है ।

(डी0एम0 कुलदीप नारायण ने अपनी जांच-रिपोर्ट के साथ तत्कालीन डी0एस0पी0 ऐ0के0 पंचालर और एस0पी0 पी0 कन्नन की क्रमशः पर्यवेक्षण-टिप्पणी और प्रतिवेदन-02 के साथ-साथ एक ही तिथि के दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण, भागलपुर संस्करण और लखीसराय जिले के पूर्व बिहार संस्करण की मूल प्रतियां भी पटना उच्च न्यायालय के अवलोकनार्थ भेजीं थीं।)

तत्पश्चात, 11 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने प्रमुख नामजद अभियुक्त शोभना भरतिया की एफ0आई0आर0 रद्द करने से जुड़ी क्रिमिनल अपील याचिका नं0-1216 आफ 2017 को खारिज करते हुए पुलिस को यथाशीघ्र जांच पूरा करने का आदेश दिया।

तत्पश्चात, 30 नवंबर, 2018 को मुंगेर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक बाबू राम ने प्रतिवेदन संख्या-04 अपने कार्यालय के ज्ञापांक -640 सी0आर0 जारी किया और पृष्ठ संख्या-4 के प्रथम पारा में अपना मंतव्य दिया कि- ”वादी पक्ष (मंटू शर्मा) का तर्क उचित प्रतीत नहीं होता है कि अभियुक्त पक्ष के द्वारा भागलपुर संस्करण तथा मुंगेर संस्करण के संबंध में डिकलेरेशन निबंधन संबंधित जिलों के सक्षम पदाधिकारियों के समक्ष फाइल किया जाना बाध्यकारी था।”

पुलिस अधीक्षक बाबू राम ने प्रतिवेदन संख्या-04 में अंतिम पृष्ठ संख्या-05 के पारा नं0-02 में अपना अंतिम मंतव्य दिया कि –”वादी पक्ष (मंटू शर्मा) के इस दावे के समर्थन में कि अभियुक्तों के द्वारा पी0आर0बी0 एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन कर भागलपुर तथा मुंगेर संस्करण का प्रकाशन किया गया है, पी0आर0बी0 एक्ट के प्रावधानों के आलोक में सही होना प्रतीत नहीं होता है।”

अब दैनिक अखबार के मुद्रण, प्रकाशन और वितरण को रेगुलेट करने के लिए द प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 और संशोधित कानून द रजिस्ट्रेशन आफ न्यूजपेपर्स (सेन्ट्रल) रूल्स, 1956 क्या कहता है, मैं यहां पेश कर रहा हूं-

द प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा -05 कहती है कि- द प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 के प्रावधानों का पालन के बिना पूरे देश में कोई भी अखबार किसी भी कीमत पर प्रकाशित नहीं होंगे।

द प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 5(3) में मूल अखबार के जिला-जिलावार या राज्य-राज्यवार नए संस्करणों के लिए प्रावधान को इस प्रकार स्पष्ट किया है- ”जितनी बार मुद्रण या प्रकाशन का स्थान परिवर्तित होता है, उतनी बार नवीन घोषणाएं अवश्य करनी होंगीं।”

(नवीन घोषणाएं का तात्पर्य है जिला-जिलावार या राज्य-राज्यवार नए संस्करणों के लिए निबंधन प्रमाणपत्र और निबंधन संख्या प्रेस-रजिस्ट्रार (नई दिल्ली) से प्राप्त करने के वास्ते नवीन आवेदन-पत्र संबंधित जिलों के जिला पदाधिकारियों के समक्ष समर्पित करना।)

पूरे देश में दैनिक अखबारों के मुद्रण, प्रकाशन और वितरण को रेगुलेट करने के लिए भारत सरकार की ओर से नई दिल्ली में प्रेस-रजिस्ट्रार की नियुक्ति पी0आर0बी0 एक्ट, 1867 के तहत की गई है।

प्रेस-रजिस्ट्रार ने मूल दैनिक अखबारों के जिला-जिलावार और राज्य-राज्यवार संस्करणों के लिए पी0आर0बी0 एक्ट, 1867 के प्रावधानों के आलोक में दो अलग-अलग विभागीय गाइडलाईन्स जारी की है, और दोनों अलग-अलग गाइडलाइन्स में हर जिला-जिलावार संस्करण के लिए नया निबंधन प्रमाण-पत्र और नया निबंधन-संख्या लेने की कानूनी बाध्यता की व्याख्या की है।

प्रेस-रजिस्ट्रार (नई दिल्ली) ने अखबारों के रजिस्ट्रेशन के लिए जारी गाइडलाइन्स नामक विभागीय सर्कुलर में स्टेप-02 के तीसरे और चैथे पारा में उल्लेख किया है कि यदि अखबार के मुद्रण और प्रकाशन का स्थान अलग-अलग जिलों में हैं, तो दोनों जिलों से अलग-अलग डिक्लेरेशन (नया निबंधन प्रमाण पत्र के लिए आवेदन) देना होगा। अखबार के मुद्रक को अखबार के मुद्रण-स्थान वाले जिले से और प्रकाशक को अखबार के प्रकाशन वाले जिले से डिक्लेरेशन (आवेदन) देना पड़ेगा।

प्रेस-रजिस्ट्रार ( नई दिल्ली) ने दैनिक अखबार के टाइटिल वेरिफिकेशन के लिए जारी गाइडलाइन्स में कालम नं0-05 के पारा नं0-6(4) में भी दैनिक अखबारों के जिला-जिलावार संस्करणों के अलग-अलग निबंधन प्रमाण पत्र लेने की कानूनी बाध्यता की स्पष्ट व्याख्या की है-

”समाचार-पत्र के मालिक प्रकाशक एक ही राज्य के अन्य जिलों से जिलावार उसी भाषा में उसी टाइटल के समाचार-पत्र (एग्जिस्टिंग पब्लिकेशन) के नए संस्करणों को प्रकाशित करना चाहते हैं, तो मालिक प्रकाशक को पत्र के टाइटल-वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं है। परन्तु, उसी राज्य के अन्य जिलों के संस्करणों के लिए समाचार पत्र के मालिक प्रकाशक को प्रेस-रजिस्ट्रार के समक्ष सीधे भी नए संस्करणों के लिए निबंधन प्रमाण-पत्र और निबंधन-संख्या प्राप्त काने के लिए जरूरी कागजातों के साथ घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन) दाखिल करने होंगे और प्रेस-रजिस्ट्रार जिला मजिस्ट्रेट से प्राप्त अभि-प्रमाणित घोषणा पत्र के आधार पर नए संस्करण के लिए प्रकाशक मालिक को नया निबंधन प्रमाण-पत्र और नया निबंधन-संख्या जारी करेगा।”

वादी मंटू शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, मुख्य मंत्री(बिहार), पुलिस महानिदेशक(बिहार) को ई-मेल भेजकर पूरे मामले में तात्कालीन पुलिस अधीक्षक बाबू राम के द्वारा सरकारी विज्ञापन के अवैध प्रकाशन और सरकारी खजाना लूटने के मामले में पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर डी0एम0 के द्वारा समर्पित जांच रिपोर्ट और उच्च न्यायालय के दिए मंतव्य को दर-किनार कर मुकदमा के आधार को कमजोर करने और नामजद प्रभावशाली अभियुक्तों, जिसमें कांग्रेस की पूर्व सांसद शोभना भरतिया, प्रधान संपादक शशि शेखर, कार्यकारी संपादक संपादक अक्कू श्रीवास्तव, उप-स्थानीय संपादक बिनोद बंधु और मुद्रक और प्रकाशक अमित चोपड़ा भी शामिल हैं, को लाभ पहुंचाने के मामले में उच्चस्तरीय जांच कराने और अपने पद का दुरूपयोग करनेवाले पुलिस अधीक्षक बाबू राम के विरूद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू करने की प्रार्थना की है।

वादी मंटू शर्मा ने शिकायत की है कि पूरे देश में एस0पी0 बाबू राम पहले आई0पी0एस0 हैं जिन्होंने कानून के प्रावधानों, प्रेस-रजिस्ट्रार (नई दिल्ली) के विभागीय सर्कुलरों, डी0एस0पी0 की पर्यवेक्षण-टिप्पणी, एस0पी0 के प्रतिवेदन-02, डी0एम0 की जांच-रिपोर्ट, पटना उच्च न्यायालय के द्वारा डी0एम0 की जांच रिपोर्ट पर संतोष व्यक्त करने और डी0एम0 की जांच रिपोर्ट को अंतिम आदेश में हू-बहू शामिल करने और डी0एस0पी0 और एस0पी0 की जांच रिपोर्ट पर संतोष व्यक्त करने को ठेंगा दिखाते हुए अपने प्रतिवेदन-04 में लिखा कि दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण के लिए पी0आर0बी0 एक्ट, 1867 के प्रावधानों के तहत निबंधन कराना कानूनी बाध्यता नहीं प्रतीत होती है।

यह मामला देश के बहुचर्चित दैनिक हिन्दुस्तान समाचार पत्र की चेयरपर्सन, मालकिन, उद्योगपति और पूर्व कांग्रेसी राज्य सभा सांस़द श्रीमती शोभना भरतिया एवं समाचार पत्र दैनिक हिन्दुस्तान से जुड़े अन्य आरोपियों क्रमशः शशि शेखर (प्रधान संपादक), अक्कू श्रीवास्तव (कार्यकारी संपादक), बिनोद बंधु (उप-स्थानीय संपादक) के विरूद्ध माननीय मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, मुंगेर के न्यायालय में दायर परिवाद-पत्र संख्या- 993सी0। दिनांक- 2011 में भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420। 471। 476 एवं प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धाराएं 8।बी।, 14 और 15 में माननीय मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ।मुंगेर। के आदेशानुसार कोतवाली थाना कांड संख्या-445। 2011 के तहत दर्ज प्राथमिकी के आलोक में दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर दैनिक हिन्दुस्तान समाचार पत्र के भागलपुर एवं मुंगेर संस्करण के फर्जी प्रकाशन के द्वारा केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकारों के विज्ञापन मद में अवैध तरीके से करोड़ों रूपयों की निकासी से जुड़ा है।

प्रश्न उठता है कि विगत दशक से बिहार में जनता दल यू और भाजपा की सरकार है। फिर जनता दल यू और भाजपा के कौन बड़े लोग हैं जो कांग्रेस की पूर्व सांसद व प्रथम अभियुक्त शोभना भरतिया और अभियुक्त संपादकों शशि शेखर, अक्कू श्रीवास्तव और बिनोद बंधु को सरकारी खजाना लूटने से जुड़े बड़े आर्थिक अपराध के मामले में बचाने के लिए पर्दे के पीछे से सक्रिय हैं? यह तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्य मंत्री नीतिश कुमार ही पता लगा सकते हैं।

खबर यह भी आ रही है कि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक बाबू राम ने प्रतिवेदन संख्या-04 उस रात में एक बजे लिखी थी जिस रात उनका मुंगेर में अंतिम दिन था। देश की जांच एजेंसी को इस हिन्दु को भी जांच के दायरे में लेने की जरूरत है। फिलहाल तो आईपीएस बाबू राम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराए जाने की संभावना को भी टटोला जा रहा है कि उन्होंने आखिर कैसे गलत टिप्पणी लिखकर गलत लोगो का साथ देने का काम किया।

श्रीकृष्ण प्रसाद (अधिवक्ता) की रिपोर्ट. मोबाइल नं0-9470400813

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