एचटी बिल्डिंग के सामने धरना देते हुए मरे मीडियाकर्मी का पुलिस ने लावारिस के रूप में किया अंतिम संस्कार

रविंद्र को नहीं मिल पाया अपनों का कंधा… साथियों का आरोप- HT प्रबंधन के दबाव में पुलिस ने लावारिस के रुप में किया अंतिम संस्‍कार… नई दिल्‍ली। 13 साल तक न्‍याय के लिए संघर्ष करने के बाद बुधवार की अंधेरी रात में मौत की आगोश में हमेशा-हमेशा के लिए सो जाने वाले हिंदुस्‍तान टाइम्‍स के कर्मी रविंद्र ठाकुर को ना ही परिजनों का और ना ही अपने संघर्ष के दिनों के साथियों का कंधा मिल पाया। मंगलवार धनतेरस के दिन दिल्‍ली पुलिस ने उसकी पार्थिव देह का अं‍तिम संस्‍कार कर दिया। उसके अंतिम संस्‍कार के समय न तो उसके परिजन मौजूद थे और न ही उसके संस्‍थान के साथी।

रविंद्र ठाकुर के साथियों का आरोप है कि पुलिस ने हिंदुस्‍तान प्रबंधन के दबाव में जानबूझकर ऐसे दिन और समय का चुनाव किया कि जिससे कि हम उसके अंतिम संस्‍कार में पहुंच ही ना सके। उन्‍होंने बताया कि मंगलवार दोपहर को उन्‍हें दिल्‍ली पुलिस की तरफ से फोन आया कि रविंद्र के शव को अंतिम संस्‍कार के लिए सराय काले खां स्थित श्‍मशान घाट ले जाया जा रहा है। ये वो समय था जब वे दिल्‍ली हाईकोर्ट में थे और उनके केस की सुनवाई किसी भी समय शुरु हो सकती थी। जब तक हमारी सूचना पर दूसरे साथी श्‍मशान घाट पहुंचते तब तक पुलिस रविंद्र का अंतिम संस्‍कार करवा कर लौट चुकी थी।

उन्‍होंने बताया कि हम पुलिस से पहले दिन से ही मांग कर रह रहे थे कि यदि रविंद्र के परिजन नहीं मिल पाते हैं तो उसकी पार्थिव देह को हमें सौंप दिया जाए, जिससे उसका अंतिम संस्‍कार हम खुद कर सके। ऐसे में अचानक ऐसे समय में फोन आना जब हम हिंदुस्‍तान प्रबंधन से चल रही न्‍याय की लड़ाई से संबंधित एक केस के सिलसिले में कोर्ट में थे, दाल में कुछ काला है कि ओर संकेत करता है। पुलिस चाहती तो हमें समय रहते सूचित कर सकती थी, जबकि हम लगातार पुलिस के संपर्क में थे। उनका आरोप है कि पुलिस प्रबंधन पर दबाव बनाती तो रविंद्र के हिमाचल प्रदेश स्थित गांव का पता मिल जाता और आज उसके शव का लावारिस के रुप में अंतिम संस्‍कार नहीं होता। उन्‍होंने बताया कि इससे हम सकते में है। हमें ऐसी कतई उम्‍मीद नहीं थी कि बिड़ला जी के आदर्शों पर खड़ा यह मीडिया ग्रुप अपने एक कर्मचारी की मौत के बाद भी उसके परिजनों को उसके अंतिम संस्‍कार से महरुम रखने में अपनी ताकत का बेजा इस्‍तेमाल करेगा।

2004 में रविंद्र ठाकुर को हिंदुस्‍तान टाइम्‍स ने लगभग 400 अन्‍य कर्मियों के साथ निकाल दिया था। कड़कड़डूमा कोर्ट से जीतने के बावजूद भी ये कर्मी अभी तक सड़क पर ही हैं और अपनी वापसी के लिए अभी भी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। रविंद्र कस्‍तूरबा गांधी स्थित हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की बिल्डिंग के बाहर ही रात को सोता था, जहां वह और उसके साथी अपने हक के लिए आंदोलन करते थे। बुधवार रात उसी धरनास्‍थल पर उसका निधन हो गया। समय के थपेड़ों ने रविंद्र को अंर्तमुर्खी बना दिया था। जिस वजह से वह अपने साथियों से अपने परिजनों के बारे में कुछ बात नहीं करता था।

पूरे प्रकरण को समझने के लिए इसे भी पढ़ें…xxx xxx

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ब्रेकिंग न्यूज़ लिखते-लिखते जब हम खुद ही ब्रेक हो गए…

Ashwini Sharma :  ”ब्रेकिंग न्यूज़ लिखते लिखते जब हम खुद ही ब्रेक हो गए…, अपनों ने झाड़ा पल्ला जो बनते थे ख़ुदा वो भी किनारे हो गए..” साल 2005 में मुंबई इन टाइम न्यूज़ चैनल के बंद होने के बाद मैंने ये पंक्तियां लिखी थीं..तब मेरे साथ इन टाइम के बहुत से पत्रकार बेरोज़गार हुए थे..कुछ को तो नौकरी मिल गई लेकिन कुछ बदहाली के दौर में पहुंच गए..वैसे ये कोई नई बात नहीं है कई चैनल अखबार बड़े बड़े दावों के साथ बाज़ार में उतरते हैं..बातें बड़ी बड़ी होती हैं लेकिन अचानक गाड़ी पटरी से उतर जाती है..जो लोग साथ चल रहे होते हैं वो अचानक मुंह मोड़ लेते हैं..जो नेता अफसर कैमरा और माइक देखकर आपकी तरफ लपकते थे वो भी दूरी बना लेते हैं..

कई बार तो अपनों को भी मुंह मोड़ते देखा है..आज मैं ये सब इसलिए लिख रहा हूं..क्योंकि कुछ दिन पहले ही देश के नामचीन अखबार हिंदूस्तान टाइम्स अखबार की ऑफिस के सामने ही एक पत्रकार ने तड़पते तड़पते दम तोड़ दिया..तेरह साल पहले चार सौ लोगों को नैतिकता की बात करने वाले अखबार ने एक झटके में निकाल दिया था..वो तेरह साल से अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहा था..मिलता तो खा लेता.. न मिले तो भूखे सो जाता..आसपास के दुकानदारों और कुछ जानने वालों के रहमोकरम पर वो ज़िंदा था..

कोर्ट कचहरी मंत्रालय सत्ता मीडिया सब कुछ दिल्ली में होने के बाद भी सब आंखों में पट्टी बांधे थे..सो आखिरकार उस कमजोर हो चुके इंसान ने एचटी के ऑफिस के सामने ही दम तोड़ दिया..मैं यही कहूंगा कि ये घटना उन सभी लोगों के लिए एक सबक है जो किसी न किसी मीडिया हाउस में तैनात हैं..मेरा मानना है कि हालात अच्छे भी हो तो मुगालता नहीं पालना चाहिए और हो सके किसी असहाय भाई की मदद अवश्य करें..

‘भारत समाचार’ चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत टीवी पत्रकार अश्विनी शर्मा की एफबी वॉल से.

मूल खबर…

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निष्ठुर एचटी प्रबंधन ने नहीं दिया मृतक मीडियाकर्मी के परिजनों का पता, अब कौन देगा कंधा!

नई दिल्ली। अपने धरनारत कर्मी की मौत के बाद भी निष्ठुर हिन्दुस्तान प्रबंधन का दिल नहीं पिघला और उसने दिल्ली पुलिस को मृतक रविन्द्र ठाकुर के परिजनों के गांव का पता नहीं दिया। इससे रविन्द्र को अपनों का कंधा मिलने की उम्मीद धूमिल होती नजर आ रही है।

न्याय के लिए संघर्षरत रविन्द्र के साथियों का आरोप है कि संस्थान के गेट के बाहर ही आंदोलनरत अपने एक कर्मी की मौत से भी प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा और उसने प्रेस परिसर में शुक्रवार को आई दिल्ली पुलिस को रविन्द्र के गांव का पता मुहैया नहीं कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन के पास रविन्द्र का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है, उसने जानबूझकर बाराखंभा पुलिस को एड्रेस नहीं दिया। उन्होंने बताया कि किसी भी नए भर्ती होने वाले कर्मी का HR पूरा रिकॉर्ड रखता है। उस रिकॉर्ड में कर्मी का स्थायी पता यानि गांव का पता भी सौ प्रतिशत दर्ज किया जाता है। रविन्द्र के पिता रंगीला सिंह भी हिन्दुस्तान टाइम्स अखबार से 1992 में सेवानिवृत्त हुए थे। ऐसे में उनके गांव का पता न होने का तर्क बेमानी है। रंगीला सिंह भी इसी संस्थान में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में कार्यरत थे, जबकि रविन्द्र डिस्पैच में।

रविन्द्र के साथियों ने बताया कि रविन्द्र अपने बारे में किसी से ज्यादा बात नहीं करता था। बस इतना ही पता है कि वह हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले का रहनेवाला है और उसका घर पंजाब सीमा पर पड़ता है। वह दिल्ली में अपने पिता, भाई-भाभी आदि के साथ 118/1, सराय रोहिल्ला, कच्चा मोतीबाग में रहता था। कई साल पहले उसका परिवार उस मकान को बेचकर कहीं और शिफ्ट हो गया था। रविन्द्र की मौत के बाद जब उनके पड़ोसियों से संपर्क किया तो वे उनके परिजनों के बारे में कुछ भी नहीं बता पाए। उनका कहना था कि वे कहां शिफ्ट हुए, उसकी जानकारी उन्हें भी नहीं है। रविन्द्र के परिजनों ने शिफ्ट होने के बाद से आज तक उनसे कोई संपर्क नहीं किया है। रविन्द्र के संघर्षरत साथियों का कहना है प्रबंधन के असहयोग के चलते कहीं हमारा साथी अंतिम समय में अपने परिजनों के कंधों से महरूम ना हो जाए।

उन्होंने देश के सभी न्यायप्रिय और जागरूक नागरिको से रविन्द्र के परिजनों का पता लगाने के लिए इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर और फारवर्ड करने की अपील की। उनका कहना है कि अखबार कर्मी के दुःखदर्द को कोई भी मीडिया हाउस जगह नहीँ देता, ऐसे में देश की जनता ही उनकी उम्मीद और सहारा है। यदि किसी को भी रविन्द्र के परिजनों के बारे कुछ भी जानकारी मिले तो उनके इन साथियों को सूचना देने का कष्ट करें…
अखिलेश राय – 9873892581
महेश राय – 9213760508
आरएस नेगी – 9990886337

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट
9322411335

मूल खबर…

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कर्मचारी एचटी डिजिटल स्टीम्स लिमिटेड के, वेतन अभी भी दे रही एचएमवीएल

कई कर्मचारियों से त्यागपत्र लेने के बाद भी नहीं दिया गया पुराना बकाया… शोभना भरतिया के स्वामित्व वाले अखबार हिन्दुस्तान से खबर आ रही है कि यहां कर्मचारियों को पुरानी कंपनी से इस्तीफा दिलाकर नयी कंपनी में भले ही ज्वाईन करा लिया गया है मगर पटना सहित कई जगह रिजाईन लेने के बाद भी कई कर्मचारियों को उनका पुराना हिसाब नहीं दिया गया है। यही नहीं, हिंदुस्तान अखबार की कंपनी का नाम कल तक हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड था मगर अब एक नयी कंपनी खोलकर अखबार प्रबंधन ने उसका नाम रख दिया एचटी डिजिटल स्टीम्स लिमिटेड। इस नई कंपनी में जबरिया कर्मचारियों को पुरानी कंपनी से त्यागपत्र दिलाकर 1 जनवरी 2017 से ज्वाईन करा दिया गया है।

पटना से तो ये भी खबर आ रही है कि यहां कई कर्मचारियों से त्याग पत्र लेने के बाद भी उनका पुराना हिसाब एक भी पैसे का नहीं दिया गया। इसके बाद कर्मचारियों को संदेह हो रहा है कि उनकी पुरानी कंपनी का ग्रैच्युटी और फंड के पैसे क्यों नहीं दिये गये जबकि नियमानुसार कर्मचारी अगर त्यागपत्र देता है तो उसे उसके काम के साल के ग्रैच्युटी का भुगतान कंपनी करती है। फिर कंपनी ने ऐसा क्यों नही किया। यही नहीं हिन्दुस्तान के कुछ कर्मचारियों ने सूचना दी है कि कर्मचारियों का ट्रांसफर हिन्दुस्तान मल्टीमीडिया से नयी कंपनी में कर दिया गया है मगर वेतन अब भी पुरानी कंपनी से ही आ रहा है।

कर्मचारियों का कहना है कि दोनों कंपनी एक ही हैं और सिर्फ मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर देने से बचने के लिए नई कंपनी बना ली गयी है क्योंकि माह जनवरी और फरवरी का जो वेतन नई कंपनी के कर्मचारियों के बैंक खाते में आया है, वह एचएमवीएल की ओर से देना बैंक के मैसेज में दशार्या गया है। जाहिर है कि नई कंपनी सिर्फ कागजों में बना ली गई और सारे दायित्व व देनदारियां एचएमवीएल ही वहन करती रहेगी। ये सिर्फ सुप्रीम कोर्ट और श्रम न्यायालय को धोखा देने के लिए हिन्दुस्तान के प्रबंधन ने रास्ता निकाला है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

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यह शख्स जहां रहा वहां या तो बंटवारा हुआ, या वो अखबार तबाह होता चला गया!

Deshpal Singh Panwar : अगर ये खबर सच है कि हिंदुस्तान टाइम्स समूह को मुकेश अंबानी खरीद रहे हैं तो तय है कि अच्छे दिन (स्टाफ के लिए पीएम के वादे जैसे) आने वाले हैं। वैसे इतिहास खुद को दोहराता है… कानाफूसी के मुताबिक एक शख्स जो इस समूह के हिंदी अखबार में चोटी पर है वो जहां रहा वहां या तो बंटवारा हुआ, या वो अखबार तबाह होता चला गया।

बनारस के ‘आज’ से लेकर जागरण के आगरा संस्करण का किस्सा हो या फिर वो अखबार जिसके मालिकों की एकता की मिसाल दी जाती थी और एक दिन ऐसा आया कि भाई-भाई अलग हो गए, बंटवारा हो गया, पत्रकारिता के लिए सबसे दुखद दिन था वो, कम से कम हम जैसों के लिए। अगर ये बात सच है तो इतने पर भी इनको चैन पड़ जाता तो खैरियत थी, एक भाई को केस तक में उलझवा दिया, उसके बाद जो हुआ वो भगवान ना करे किसी के साथ हो, वो सब जानते हैं…लिखते हुए भी दुख होता है..

अब अगर हिंदुस्तान समूह के बिकने की बात है तो कानाफूसी के मुताबिक इस हाऊस को भी लगा ही दिया ठिकाने। अगला नंबर मुकेश अंबानी का होगा अगर उन्होंने इन्हें रखा तो, वैसे ये जुगाड़ कर लेंगे, पीएम की तरह बोलने की ही तो खाते हैं.दुख किसी के बिकने और खुशी किसी के खरीदने की नहीं है हां स्टाफ का कुछ बुरा ना हो बस यही ख्वाहिश है। वेज बोरड की वजह से बिक रहा है ये मैं मानने को तैयार नहीं हूं। जो हो अच्छा हो..

कई अखबारों में संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार देशपाल सिंह पंवार की फेसबुक वॉल से.

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शोभना भरतिया ने एचटी ग्रुप को मुकेश अंबानी को बेचा!

मुंबई से एक बड़ी खबर आ रही है. हिंदुस्तान टाइम्स समूह को इसकी मालकिन शोभना भरतिया ने भारत के सबसे बड़े व्यापारी मुकेश अंबानी को बेच दिया है. हालांकि यह चर्चा कई दिनों से थी कि शोभना भरतिया एचटी समूह को बेच रही हैं लेकिन इस सूचना की पुष्टि नहीं हो पा रही थी. अब यह बात लगभग कनफर्म हो गई है कि मुकेश अंबानी सबसे बड़ा टीवी नेटवर्क खरीदने के बाद सबसे बड़ा प्रिंट नेटवर्क भी तैयार करने में लग गए हैं और इस कड़ी में एचटी ग्रुप को खरीद लिया है.

मुंबई से मीडिया एक्टिविस्ट शशिकांत सिंह ने भड़ास4मीडिया को सूचना दी है कि शोभना भरतिया मिंट व हिंदुस्तान टाइम्स मुकेश अंबानी को बेच रही हैं. हिंदुस्तान टाइम्स से आ रही बड़ी खबर के मुताबिक इसकी मालकिन शोभना भरतिया और रिलायंस कंपनी के मालिक मुकेश अंबानी के बीच एक बड़ी डील हो गई है जिसके तहत मुकेश अंबानी अखबार मिंट और फ्लैगशिप हिंदुस्तान टाइम्स को खरीद रहे हैं. इन दोनों अखबारों के मुम्बई के कर्मचारी अब रिलायंस के कर्मचारी होंगे और मुंबई के सीएनबीसी न्यूज़ 18 के कार्यालय में बैठेंगे.

सीएनबीसी न्यूज़18 पर रिलायंस का कब्जा है. आपको बता दूँ कि हिंदुस्तान टाइम्स और हिंदुस्तान के सैकड़ों कर्मचारियों ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर की मांग को लेकर क्लेम भी लगा रखा है. कई मामलों में शोभना भरतिया को पार्टी भी बनाया गया है. बाजार में चर्चा है कि इस बड़ी डील में हिंदुस्तान टाइम्स और हिंदुस्तान अखबार समेत पूरे ग्रुप को खरीदने को लेकर भी मुकेश अंबानी और शोभना भरतिया के बीच बातचीत हुई है लेकिन फाइनल नतीजा क्या रहा, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है.

इनपुट : मुंबई से पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकान्त सिंह. संपर्क  : 9322411335

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एचटी मीडिया को धूल चटाने वाले 315 कर्मियों की जीत से संबंधित कोर्ट आर्डर की कापी Download करें

हिंदुस्तान टाइम्स वालों ने अपने यहां सन 1970 से परमानेंट बेसिस पर काम कर रहे करीब 362 मीडिया कर्मियों को 2 अक्टूबर 2004 को बिना किसी वजह एकाएक बर्खास्त कर दिया था.  362 में से कई कर्मियों ने तो प्रबंधन के साथ सुलह कर लिया लेकिन 315 कर्मियों ने इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल कड़कड़डूमा में केस कर दिया. ट्रिब्यूनल ने 8 मार्च 2007 को एक अंतरिम आदेश पारित किया कि सभी 315 कर्मियों को मुकदमे के निपटारे तक एचटी मीडिया पचास फीसदी तनख्वाह गुजारे भत्ते के लिए दे. इसके खिलाफ एचटी वाले हाईकोर्ट चले गए.

बाद में यह मामला पटियाला हाउस कोर्ट ट्रांसफर किया गया जहां सभी कर्मियों की बहाली और बकाया भत्ते देने के आदेश पारित हुए. इसके खिलाफ एचटी मीडिया हाईकोर्ट गया तो हाईकोर्ट ने निचली आदेश के फैसले को सही ठहराया और मामला सेटल करने को वहीं जाने के लिए कहा. अब इस मामले में फाइनल फैसला आ गया है जिसमें एचटी मीडिया को अपने इन सैकड़ों कर्मियों को बहाल करने से लेकर सभी बकाया देने के आदेश हैं और ऐसा न करने पर एचटी मीडिया की संपत्ति जब्त करने के निर्देश है. इस प्रकरण से संबंधित खबर भड़ास पर पहले ही छप चुकी है. अब कोर्ट आर्डर की कापी भी आप डाउनलोड कर पढ़ सकते हैं. नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर कोर्ट आर्डर की कापी डाउनलोड करें:

Court Order Copy Download

इस प्रकरण से संबंधित भड़ास पर छपी शुरुआती खबर यूं है…

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बड़ी खबर : एचटी के 400 लोगों ने मुकदमा जीता, होंगे बहाल, मिलेगा बकाया

मीडिया इंडस्ट्री की बहुत बड़ी खबर आ रही है. हिंदुस्तान टाइम्स समूह के मैनेजमेंट से 400 मीडियाकर्मियों ने मुकदमा जीत लिया है. ये चार सौ लोग वर्ष 2004 में हिंदुस्तान टाइम्स मीडिया लिमिटेड से निकाल दिए गए थे. इन्हें एक झटके में प्रबंधन ने निकाल बाहर किया था. श्रम कानूनों से लेकर संविधान की मूल भावना तक की धज्जियां एचटी वालों ने उड़ाई. मजेदार ये कि एचटी मैनेजमेंट की तरफ से अरुण जेटली मुकदमा लड़ रहे थे. साथ ही दर्जनों बड़े वकीलों की फौज भी थी.

हालांकि मंत्री बनने के बाद अरुण जेटली ने वकालत का काम छोड़ दिया है. उधर, चार सौ मीडियाकर्मियों की तरफ से प्रशांत भूषण और उनकी टीम थी. वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन ने भी मीडियाकर्मियों की लड़ाई को पूरा सपोर्ट दिया और प्रशांत भूषण को कोर्ट जाकर मीडियाकर्मियों का पक्ष प्रमुखता से रखने को प्रेरित किया. अदालत में लगभग साढ़े ग्यारह – बारह साल तक मुकदमा चला और अब जाकर जो फैसला आया वह मीडियाकर्मियों को खुश करने वाली है.

अदालत ने सभी चार सौ लोगों को वापस काम पर रखने का आदेश एचटी मीडिया को दिया है. साथ ही इनका जो बकाया, ग्रेच्युटी, प्रमोशन ड्यू है, वह सब देने को कहा है. माना जा रहा है कि इस आदेश के बाद एचटी मीडिया पर सैकड़ों करोड़ रुपये की चपत पड़ने वाली है और इनके बड़े बड़े मैनेजरों की टाई सरकने वाली है. इस पूरी लड़ाई को सक्रिय तरीके से लड़ रहे मीडियाकर्मियों के साथी अखिलेश सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश की कापी जल्द ही भड़ास4मीडिया को मेल कर दी जाएगी ताकि पूरे देश के मीडियाकर्मी जान सकें कि ये बड़े बड़े मीडिया घराने भले करोड़ों खर्च करके नामी गिरामी वकीलों के जरिए अन्याय की लड़ाई लड़ते हैं लेकिन आखिरकार जीत न्याय की ही होती है.

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हिंदुस्तान टाइम्स ग्रुप की मालकिन शोभना भरतिया को हाईकोर्ट में तगड़ा झटका

: प्रिंट मीडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन की एचटी के साथियों को बधाई : हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड से 272 कर्मचारियों निकाले जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली आदलत के निर्णय को बहाल रखते हुए उसमें किसी भी तरह से दखल देने से इंकार कर दिया है। 14 तारीख को दिए अपने फैसले में कोर्ट ने कर्मचारियों के हटाने के प्रबंधन के फैसले को अनुचित ठहारते हुए हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड और हिन्दुस्तान टाइम्स मीडिया लिमिटेड को दो अलग –अलग कंपनी मानने से भी इंकार कर दिया है क्योंकि दोनों की मालकिन एक ही है।

इस फैसले का मतलब यह हुआ कि अलग-अलग कंपनी बनाकर मजीठिया से बचने का गोरखधंधा करने वाले मालिकों की चाल पस्त हो जाएगी। इस फैसले से यह भी उम्मीद जगी है कि संघर्ष हमारा भले ही लंबा हो जीत पत्रकारों यानि सच की ही हेागी। झूठों का मुंह सुप्रीम कोर्ट में भी जरूर काला हेागा।  संघर्षरत हिंदुस्तान टाइम्स के साथियों को जीत के लिए प्रिंट मीडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन (PMJA) के प्रदेश अध्यक्ष महेश दीक्षित ने बधाई दी है।

अशरफ अली
प्रवक्ता एवं महामंत्री
PMJA


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DUJ Salutes High Court Judgment As Jolt to HT Management (पढ़ें पूरा फैसला)

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DUJ Salutes High Court Judgment As Jolt to HT Management (पढ़ें पूरा फैसला)

The Delhi Union of Journalists has broadly welcomed  as ‘somewhat belated but historic’ Hindustan Times judgment in the Delhi High Court. It has saluted the workers of Hindustan Times who are fighting the struggle in the court and outside despite various pressures. It has taken note of the fact that over 12 workers of the Hindustan Times group have unfortunately lost their lives in this long struggle for their dues.

The judgment we feel is a jolt to the management and others seeking to browbeat the workers through a variety of strategies including the use of a battery of lawyers known for their espousal of management cases. It hopes that justice to the workers will not be delayed. Link to the judgment is given below: HC Order HT Media

Press Release

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Dainik Hindustan Advt Scam : next hearing date 13 January

New Delhi : 200 crore Dainik Hindustan Government Advertisement  scandal, the Supreme Court has listed the Special Leave Petition (Criminal) No.1603/2013 (Shobhana Bhartia Vs State of Bihar & another) for  hearing on January thirteen, 2015 next. Meanwhile, the  Superintendent of Police,Munger(Bihar), Mr.Varun Kumar Sinha has submitted the Counter-Affidavit on behalf of the Bihar Government to Mr.Rudreshwar Singh, the counsel  for the Bihar Government in the Supreme Court in the Special Leave Petition (Criminal) No. 1603 of 2013 .Now, the Counsel for the Bihar Government, Mr. Rudreshwar Singh  has to  file the Counter-Affidavit  in the Supreme Court and has to argue on behalf of the Bihar Government in this case.

Meanwhile, reliable sources  in New Delhi said that the Police Superintendent, Munger (Bihar), Mr.Varun Kumar Sinha, in the Counter-Affidavit to the Supreme Court, had clearly exposed the financial scandal of  M/S. H.T. Media Ventures Limited (New Delhi).

The Police Superintendent, Munger(Bihar) in his Counter-Affidavit said, “During police investigation and supervision, the Munger (Bihar) police have found ”facts”  crystal -clear that the Munger edition of Dainik Hindustan is being printed and published, violating the rules and provisions of the Press & Registration of Books Act, 1867 and getting the government advertisements illegally. On the basis of facts, coming in course of investigations,supervisions and available documents, the police  find sufficient evidences against all the named accused persons  in the Munger Kotwali Police Case No.445/2011 including the Chairperson of M/S. H.T.Media Ventures Limited(NewDelhi) Shobhana Bhartia. I pray  to the Hon’ble Supreme Court  to reject the petition of the petitioner,Shobhana Bhartia in this instant case.”

It is worth mentioning that the senior lawyer of Bihar, ShriKrishna Prasad on January 13,2014 last, appearing on behalf of the O.P No.02, Mantoo Sharma (Munger, Bihar),  had completed his argument in the court of Hon’ble Mr.Justice H.L.Dattu and Hon’ble Mr.Justice S.A.Bobde.

The lawyer,ShriKrishna Prasad told  the court of Hon’ble Mr.Justice H.L.Dattu and Hon’ble Mr.Justice S.A Bobde,” My Lord, this is one of the rarest cases of forgery,cheating and loot of the government revenue on behalf of the powerful media house of India,M/S  H.T.Media Ventures Limited( New Delhi).On the order of the Munger Chief Judicial Magistrate, an F.I.R has been lodged with the Munger Kotwali P.S.,bearing case No.445/2011.After investigations and supervisions, the Dy.S.P and the SP Munger (Bihar) have submitted  their ”Supervision- Reports No.01 & 02 in which  they have found  all charges against the named accused persons ‘prima-facie true’ And the investigations in this instant case is in full progress.The Hon’ble High Court of Patna has also rejected the prayer of the Chairperson of M/S H.T.Media Ventures Limited,Shobhana Bhartia  in the Criminal Miscellaneous Case No.2951 and 16763 of 2012.So, I pray to the Hon’ble Court to reject the prayer of the petitioner,Shobhana Bhartia, and direct the Munger police to expedite the police investigations in this instant case.”

What is the F.I.R ?- On the basis of a Munger court complainant No.993(C)/2011 of the complainant,Mantoo Sharma, s/o Late Ganesh  Sharma, resident -Puraniganj, P.S.- Kasim Bazar,District-Munger, an F.I.R has been  lodged against (1) the Principal accused Shobhana Bhartia (Chairperson, Hindustan Publication Group, Hindustan Media Ventures Limited,Head Office,18-20,Kasturba Gandhi Marg, New Delhi, (2) Shashi Shekhar,the Chief Editor, Dainik Hindustan (New Delhi), (3) Aakku Srivastawa,Acting Editor, Patna edition of Dainik Hindustan, (4) Binod Bandhu, Regional Editor, Bhagalpur  edition of Dainik Hindustan and (5)  Amit Chopra,Printer & Publisher of M/S Hindustan Media Ventures Limited,New Delhi. All of them have been accused of violating  sections  8(B),14 & 15  of the Press & Registration of Books Act, 1867,  and Sections 420/471 & 476 of Indian   Penal Code, printing and publishing  Bhagalpur and  Munger editions of Dainik Hindustan ,using wrong  Registration No. and obtaining  the government advertisements of the Union and the State governments in crores in the Advertisement Head  by presenting the forged  documents of registration.
Statements under section  164 of Cr.P.C in the Munger Judicial Court: In the process of  investigation, the Investigating Police Officer,Munger Kotwali,Bihar,    has got the statements of the complainant,Mantoo Sharma, and other witnesses,(1) ShriKrishna Prasad,(2) Kashi Prasad,(3) Bipin Kumar Mandal under section 164 of  Cr.P.C  in the Munger judicial court on April, 14,1012.All the witnesses   in their statements   before the court  have fully supported  the allegations against  the accused  persons  in the F.I.R ,bearing No. Munger Kotwali P.S Case No.445/2011.(EOM)

By ShriKrishna Prasad
senior advocate
Munger
Bihar
Mob: 09470400813

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एचटी मैनेजमेंट के खिलाफ ऐतिहासिक जीत, हाईकोर्ट ने 272 एचटी कर्मचारियों को काम पर रखने का आदेश दिया

एक ऐतिहासिक फैसला आया है. हिंदुस्तान टाइम्स प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ लड़ रहे 272 मीडियाकर्मियों को न्याय मिल गया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने इन 272 कर्मियों को फिर से काम पर रखने का आदेश हिंदुस्तान टाइम्स प्रबंधन को दिया है. कोर्ट के पूरे आदेश को इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ा जा सकता है: goo.gl/b2KE9i

दिल्ली यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स ने इस ऐतिहासिक जीत पर कर्मियों को बधाई दी है. डीयूजे की तरफ से जारी प्रेस रिलीज इस प्रकार है….

DUJ welcomes historic Delhi High Court judgement on Hindustan Times Workers Case

The Delhi Union of Journalists welcomes the judgement of the Delhi High Court reinstating the 272 workers of the Hindustan Times. The DUJ congratulates the 272 brave workers of the Hindustan Times Ltd for their historic victory against the management. Justice Suresh Kait has termed their retrenchment arbitrary, upheld the earlier judgement of the Industrial Tribunal and granted them reinstatement in service with back wages for the past nine years.

The Tribunal had on January 23, 2012 ordered reinstatement of the workers but the Hindustan Times management chose to drag its feet on the issue, seeking to divide the workers and evade the order. The High Court order of Nov. 17, 2014 not only upholds the Industrial Tribunal order but in addition clarifies that full back wages must be paid.

The order says, “reinstatement with full back wages is the proper relief to which the workmen are entitled, especially when their termination from services nine years back was based on a fictitious/sham transaction.”

It also says, “In case the relief of back wages is denied to the workmen, it would tantamount to placing a premium on the fraudulent conduct of the management which by its order of dismissal has virtually deprived hundreds of workmen of right to life and livelihood.”

Further the order states, “It is pertinent to point out here that 13 workmen have already died while fighting for their rights. Some of them if reinstated today had substantial remaining period of service. Several workmen had lost their family members as they did not have the necessary financial assistance or support to seek medical remedies.”

While hailing the verdict the Delhi Union of Journalists demands that the Hindustan Times management provide immediate relief to the workers by reinstating them and paying them their back wages. The DUJ thanks senior advocate Colin Gonsalves for his stellar role in fighting for the workers’ rights. 

The judgement, the DUJ believes, will strengthen the workers’ resolve to struggle for implementation of their rights. It will also provide hope to the retrenched journalists and other workers who are fighting several court battles against the Hindustan Times management.

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कोर्ट से भी नहीं डरती शोभना भरतिया, जीतने के बाद भी एचटी बिल्डिंग के बाहर बैठने को मजबूर हैं कर्मचारी

Respected Yashwant ji, हिन्दुस्तान टाइम्स के सैंकड़ों कर्मचारियों को शोभना भारतीया ने पिछले कई सालों से कंपनी के बाहर बैठाया है… ये कर्मचारी कोर्ट में केस जीत चुके हैं… कोर्ट ने इन्हें वापस लेने का आदेश भी दिया है… बावजूद इसके शोभना जी ने इन्हे अब तक वापस नहीं लिया है…

ये लोग कनॉट प्लेस स्थित हिन्दुस्तान टाइम्स की बिल्डिंग के बाहर धरना भी दे रहे हैं… किन्तु कोई भी मीडिया हाउस इन्हें अपने चैनल या पेपर में दिखाने के लिए गंभीर नहीं है… लेकिन भड़ास मीडिया तो इसे दिखा सकता है… फिर अब तक आपने इस मामले पर ध्यान क्यों नहीं दिया… आपसे से अनुरोध है कि इस मामले को अपनी साइट पर जगह दें… ताकि इन लोगों को न्याय मिलने में सहायता मिल सके…

धन्यवाद
कल्पना
दिल्ली

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