अमिताभ ठाकुर को जबरन रिटायर कर सही किया, कैट को केंद्र का जवाब!

यूपी के पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर द्वारा जबरिया रिटायर के आदेश को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की लखनऊ बेंच में दी गयी चुनौती पर केंद्र सरकार ने अपने जवाब में अपने निर्णय का बचाव किया है.

गृह मंत्रालय के अनुसचिव संजीव कुमार द्वारा दिए गए हलफनामे में कहा गया है कि 21 नवंबर 2019 को राज्य पुनरीक्षण समिति की बैठक हुई जिनके द्वारा अमिताभ के पूरे सेवा अभिलेखों को देखा गया और उन्होंने अमिताभ को सेवा में रखने के योग्य नहीं पाया. इस आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 08 जनवरी 2020 को केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जिसे गृह मंत्रालय द्वारा 18 जून 2020 को कैबिनेट नियुक्ति समिति को भेजा गया. कैबिनेट नियुक्ति समिति द्वारा 16 मार्च 2021 को इस प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने 17 मार्च को अनिवार्य सेवानिवृति का आदेश जारी किया, जिसके क्रम में राज्य सरकार ने 21 मार्च को अमिताभ को सेवानिवृत कर दिया.

हलफनामे के अनुसार केंद्र सरकार को यह पूरा अधिकार है कि 50 साल से ऊपर के किसी भी आईपीएस अफसर को राज्य सरकार के अनुमोदन पर 3 माह का वेतन देकर सेवा से अलग कर दे. यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों के अनुसार कोर्ट को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने का बहुत सीमित अधिकार है. हलफनामे में अमिताभ के तर्कों को आधारहीन बताते हुए उनकी याचिका को ख़ारिज करने की बात कही गयी है.

अमिताभ ने अपनी याचिका में आदेश को पूरी तरह मनमाना तथा अस्पष्ट बताया था जिसमे आदेश देने का कोई कारण नहीं बताया गया है. कैट ने इस मामले में केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार से जवाब माँगा था. मामले की अगली तिथि 06 अगस्त 2021 को नियत है.

Jabariya retire case- Centre defends itself, objects to judicial scrutiny

In the petition filed by ex UP IPS officer Amitabh Thakur before the Lucknow bench of Central Administrative Tribunal (CAT) challenging his Compulsory retirement, the Central Government has defended its act.

The affidavit filed through Ministry of Home Affairs Under Secretary Sanjeev Kumar says that State Review Committee held its meeting on 21 November 2019 in which Amitabh’s entire service record was seen and he was found unfit to continue in service. On this basis, the UP Government sent its proposal to Central Government on 08 January 2020, which was sent by MHA to Cabinet Committee of Appointment on 18 June 2020. The Cabinet Committee approved the proposal on 16 March 2021 after which MHA issued its order on 17 March followed by State Government issuing retirement order to Amitabh on 21 March.

The affidavit says that the Central Government has full rights to give Compulsory retirement to any IPS officer above the age of 50 on State Government recommendation, after giving him 03 months salary. It says the Supreme Court has made it clear through its orders that the Courts have very limited rights to intervene in such cases. The affidavit calls Amitabh’s arguments baseless and seeks dismissal of the Petition.

Amitabh has said in his petition that the retirement order has been passed merely for malafide intent because of personal and systemic bias against him, to which CAT had sought the response of the Central and State Government. The matter is to be heard next on 06 August 2021.

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