जागरण की ये खबर मर्यादा की कौन सी सीमा में है?

Sanjaya Kumar Singh : बुलंदशहर के सेल्फी मामले में सच चाहे जो हो, मामला डीएम बनाम दैनिक जागरण हो गया है। मोटा-मोटी मामला ये है कि डीएम के साथ किसी ने सेल्फी लेने की कोशिश की तो डीएम ने एतराज किया और सेल्फी लेने वाले के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाकर उसे जेल भेज दिया। इस बारे में पूछने के लिए जागरण के संवाददाता ने डीएम को फोन किया तो उन्होंने कथित रूप से आपा खो दिया और “डीएम मर्यादा की सारी सीमा भूल गईं”।

ऑडियो मैंने भी सुना है पर मुझे नहीं लगता कि डीएम पर जो आरोप है वह निष्पक्ष या पूर्वग्रह से प्रेरित नहीं हैं। फिर यहां मुद्दा वह नहीं है। डीएम की कथित नाराजगी के बाद बुलंदशहर में जागरण कार्यालय के बाहर दो ट्रक कूड़ा फिंकवा दिया गया जिसके बारे में जागरण की खबर पढ़कर लगता है कि आरोप एक पक्षीय है और कबर में गंभीरता नहीं है। बहुत ही चलताऊ अंदाज में लिखी खबर का स्क्रीन शॉट देखिए। हालांकि, दैनिक जागरण को वैसे भी गंभीर या अच्छी तरह लिखी खबरों के लिए नहीं जाना जाता है पर जब वह खुद एक पक्ष है तो थोड़ी गंभीरता और संयम दिखाना बनता है।

मीडिया को मौका मिले तो न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के आरोप लगाने का मौका नहीं चूकता पर अदालतों में अगर किसी का किसी मामले से जुड़ाव हो तो वह मामले से खुद को अलग कर लेता है। पर मीडिया में ऐसा कोई रिवाज नहीं है। उल्टे ऐसे मामलों में मीडिया वाले यह मान लेते हैं कि उन्हें जो जी में आए – लिखने की आजादी है। जागरण के साइट की खबर पढ़िए – ऊपर लिखा गया है कि कूड़ा सुबह सात बजे फेंका गया नीचे वह देर रात हो गया है। सुबह सात बजे और देर रात – में बहुत फर्क है और दोनों सही नहीं हो सकता। दो ट्रक दो बार में फेंके गए हैं तो बताया जाना चाहिए और यह भी कि फोन देर रात किए गए या सुबह सात बजे और फिर कितनी देर इंतजार करने के बाद जागरण वालों ने अपनी व्यवस्था की। यह सब न बताकर मौके पर मौजूद अनाम लोगों और “कई समाजसेवियों” के हवाले से अखबार ने अपनी बात लिखी है और चूंकि बार-बार फोन करने पर भी पालिका कर्मी कूड़ा उठाने नहीं पहुंचे इसलिए मान लिया गया है कि, “कूड़ा डीएम के इशारे पर फेंका गया है”।

यही नहीं, तमाम टीवी चैनल भी बुलंदशहर पहुंचने लगे हैं जबकि मीडिया का ही मामला होने के नाते लिखा जाना चाहिए था कि फंला टीवी चैनल के अमुक रिपोर्टर और कैमरा मैन आ चुके हैं और अमुक आने वाले हैं। अगर ऐसा ही था तो नैतिकता का तकाजा है कि अखबार इस बारे में खुद खबर नहीं लिखता पर इस एकतरफा और डीएम “मर्यादा की सारी सीमा भूल गईं” बताने वाली खबर में जागरण को खुद मर्यादा में रहने की जरूरत नहीं समझ में आई। जागरण ने सिर्फ तस्वीर लगा दी होती और लिखता कि यह कूड़ा इतने बजे ऐसे लोग या इस गाड़ी से इतने लोग डाल गए तो बात बन जाती, पाठकों को सूचना मिल जाती और अखबार भी मर्यादा नहीं तोड़ता। पर दूसरों को सीख देना हमेशा आसान होता है। अनाम कर्मचारियों ने दबी जुबान से जो बताया वह शीर्षक बन गया। मैं यह नहीं कह रहा कि खबर गलत है। मेरा कहना है कि खबर सही हो तो भी पक्षपातपूर्ण लग रही है।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.


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