जनता की आंख में धूल झोंकने वाली यह सरकारें सिरे से जनता की दुश्मन हैं!

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यह सरकारें सिरे से जनता की दुश्मन होती हैं। चाहे वह किसी भी की हों। सब जनता की आंख में धूल झोंकने का नायाब काम करती हैं। एक शब्द है सब्सिडी। जिस को कम करने का धौंस देना इन का प्रिय काम है। मैं कहता हूं कि कल करना हो तो आज क्या अभी कर दो। पेट्रोल से, डीजल से हर किसी चीज़ से। एक पैसे की सब्सिडी मत दीजिए। लेकिन साथ ही यह जो पेट्रोल और डीजल पर अनाप-शनाप टैक्स लगा रखा है वह भी खत्म कर दीजिए। बताइए कि वाहन खरीदते समय एकमुश्त रोड टैक्स भी लेंगे, पेट्रोल और डीजल पर भी किसिम-किसिम के टैक्स सेंट्रल टैक्स, स्टेट टैक्स, सेज टैक्स, सर्विस टैक्स, हैं टैक्स, ट्रेड टैक्स अलाना-फलाना के अलावा रोड टैक्स भी लेंगे तिस पर करेला और नीम चढ़ा टोल टैक्स भी लेंगे। मानो जनता न हो गई गाय हो गई कि सुई लगा-लगा कर दूध निकालेंगे, खून पिएंगे। एक ही टैक्स कितनी बार लेंगे?

है कोई यह पूछने वाला किसी से?

हां लेकिन कार्पोरेट सेक्टर का सत्कार आप दामाद की तरह करेंगे। इन को टैक्स में ही क्या और तमाम-तमाम रियायत भी देंगे। ज़रूरत पड़ी तो बेल आउट पैकेज भी। लेकिन रोटी-दाल, आलू-प्याज का दाम काम नहीं कर पाएंगे, किसानों को उन की फसल का उचित मूल्य नहीं दे पाएंगे। सारा ठीकरा बिचौलियों पर फोड़ देंगे, जमाखोरों पर सारा लांछन लगा कर सो जाएंगे। बताइए कि ये सरकारें इतने सालों में बिचौलियों, जमाखोरों पर भी लगाम नहीं लगा पाई हैं तिस पर भी दावा है और कि हरदम है कि विकास करेंगे! खांसी जुकाम, बुखार पेचिस तक नहीं ठीक कर सकते और दावा है कि कैंसर और एड्स को भी ठीक कर देंगे। कैसे डाक्टर हैं ये और कि कैसा अस्पताल है यह। बताइए कि तमाम-तमाम प्रोडक्ट्स बिकते है मैक्सिमम प्राइस पर। यानी अधिकतम मूल्य पर। लेकिन किसान का प्रोडक्ट? मिनिमम प्राइस पर। हर साल सरकार उस के न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करती है। उस पर भी गन्ना मिलें उन्हें समय पर भुगतान नहीं देतीं। सालों-साल बकाया रखती हैं। जलौनी लकड़ी के दाम से भी काम दाम पर गन्ना नहीं बिक पाता। और चीनी के दाम देखिए आकाश पर सवार हैं! प्याज और चीनी में बहुत फर्क नहीं है। गेहूं और धान लिए किसान भिखारियों की तरह घूमते रहते हैं खरीद केंद्रों पर। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भी अपना अनाज बेचने के लिए उन्हें रिश्वत तो देनी ही पड़ती है, अपमान भी भुगतना होता है। जो प्याज आज मंडी में तीस-चालीस रुपए किलो बिक रहा है किसान वही प्याज पांच रुपए, आठ रुपए पर बेच रहा है। बिचौलिए खरीद रहे हैं। सालों साल एक सड़क का गड्ढा तो भर नहीं सकते पर कार्पोरेट सेक्टर को सर पर ज़रूर बिठा सकते हैं। आखिर हज़ार पर्सेंट उन की सालाना ग्रोथ बहुत ज़रूरी है देश के विकास के लिए। और यह सरकार तो दिव्य जनादेश ले कर आई है। पर  जैसे कोई बोए हुए खेत को फिर से जोत दे! दुर्भाग्य से मोदी सरकार के जेटली बजट ने इस दिव्य जनादेश के साथ यही कर दिया है। आंकड़ों और लफ़्फ़ाजों के बयान, प्रति-बयान और उन के आकलन को लात मारिए। जो बजट खाने-पीने की चीज़ों के दाम न कम कर पाए, गरीब गुरबों की तकलीफ को मोबाइल और कम्प्यूटर के सस्ते होने से जोड़ कर वाहवाही लूटे, जो सरकार खाद और बीज के दाम करने के लिए सांस भी न ले, आप उस को सर पर बिठाएं तो बिठाएं यह आप की सुविधा है, मेरी हरगिज नहीं। इतनी उम्मीद, इतने सपने पाल कर छले जा कर भी आप निश्चिंत सोने की तैयारी कर सकते हैं तो आप को यह नींद मुबारक! हम तो हमेशा की तरह इस बार भी छला हुआ ही पा रहे हैं अपने आप को भी, हर किसी को भी।

हम तो सीधा-सीधा यह जानते हैं कि अभी तक बुनियादी बातें, बुनियादी अधिकार और कि न्यूनतम ज़रूरत रोटी, कपड़ा और मकान, शिक्षा और स्वास्थ्य आदि किसी भी ज़रूरत को पूरा करने की और यह बजट भी नहीं ले जाता दिखता है। हम तो यह जानते हैं कि सारी सरकारी योजनाएं और उपक्रम जनता को अपमानित करने के लिए ही, जनता को छलने और कि लूटने के लिए ही चलाए जा रहे हैं। हम यह जानते हैं कि किसी भी सरकारी अस्पताल में अब इलाज नहीं होता, किसी भी सरकारी स्कूल में अब पढ़ाई नहीं होती। अब बचे प्राइवेट अस्पताल और प्राइवेट स्कूल तो यहां खुलेआम लूट होती है। लूट के बहुत बड़े अड्डे हैं यह प्राइवेट स्कूल और अस्पताल। यह हेल्थ इंश्योरेंश कंपनियां लूट का बहुत बड़ा औजार हैं। इन लूट के अड्डों पर कोई वित्त मंत्री, कोई सरकार आखिर कब रोक लगाएगी? सरकारी एजेंसियों पर आखिर लोग कब भरोसा करंगे, कैसे करेंगे? आखिर यह आलू प्याज और दाल आदि क्या बाटा का जूता चप्पल है, कोई ब्रांडेड आइटम है जो पूरे देश में एक ही दाम बिकने लगा है? जहां पैदावार इस की होती है वहां भी वही दाम और जहां नहीं होती है वहां भी वही दाम? बताइए कि बीते चंद सालों में भूसा गेहूं के दाम बिकने लगा, गेहूं दाल के दाम, दाल काजू बादाम के दाम और काजू बादाम सोने के दाम बिकने लगा!

तो यह क्या है?

वायदा कारोबार बंद क्यों नहीं कर देते? मनमोहन सिंह सरकार ने मंहगाई रोकने के लिए नरेंद मोदी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी। मोदी ने आप अपनी संस्तुति में साफ कहा था की वायदा कारोबार बंद कर दीजिए। मंहगाई पर लगाम लग जाएगी। मनमोहन सिंह इस संस्तुति पर कुंडली मार कर बैठ गए थे। और अब नरेंद मोदी भी इस बाबत सरकार में आने के बाद सांस नहीं ले रहे हैं। मनमोहन सिंह तो अपनी सरकार में एक साझेदार सटोरिए शरद पवार से डरते थे इस लिए नहीं वायदा कारोबार पर लगाम नहीं लगा सके। पर परवरदिगार आप किस सटोरिए से भयभीत हुए बैठे हैं! जो वायदा कारोबार पर लगाम लगाना तो दूर उस पर सांस भी नहीं ले रहे। अपनी ही संस्तुति भूल गए?

तो क्यों ?

सच यह है कि इस एक बिंदु पर क्या ऐसे तमाम और सारे बिंदु पर भी पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों एक साथ हैं इस लिए ही यह अंधेरगर्दी मची हुई है। और यह अर्थशास्त्री सारे के सारे भाड़े के हैं। जब जो सरकार होती है उस के पक्ष में बोलने लगते हैं। अर्थशास्त्रियों और इतिहासकारों में सरकारी जुबान बोलने की जैसे होड़ सी लग जाती है। तो कुछ अतिरेक में आ कर देश छोड़ने की अहमकाना बातें कर लोगों को बरगलाते फिरते हैं। मीडिया का तो और बुरा हाल है। मीडिया का तो जैसे सारा आक्सीजन कार्पोरेट सेक्टर ने पी लिया है। सो तिजोरी और दलाली का यह दुभाषिया अब वेंटिलेटर पर है। ढेर सारा जहरीला कार्बन छोड़ता हुआ। और यह मध्यमवर्गीय जनता जैसे अपना कुछ खुद तो सोचती ही नहीं। जैसे यह टीवी के तोते बोलते हैं उसी तरह उसी दिशा में बह जाती है। अच्छा अन्ना! वह तो बहुत क्रांतिकारी आदमी था! रामदेव बहुत बड़ा योगी था! ओह तो अरविंद केजरीवाल! न भूतो न भविष्यति! अच्छा अपना मोदी! यह तो अच्छे दिन लाएगा! अद्भुत है यह खेल भी। कहां हैं इन दिनों अन्ना? यह तोते नहीं बता रहे। क्यों कि यह हिज मास्टर्स वायस के रिकार्ड हैं और इन के रिकार्ड में अभी इस बाबत कुछ भरा नहीं गया है। अभी तो मोदी और मोदी के अच्छे दिन का रिकार्ड भरा गया है, वही बजेगा।

जैसे कि यह अब सर्वदा के लिए निश्चित हो चला है कि यह मीडिया, यह पुलिस, यह नौकरशाह जनता के साथ नहीं सत्ता के साथ ही रहेंगे। यह सब सत्ता के बंदर हैं। और पता नहीं क्यों मित्रों मुझे बाजदफा लगता है कि अपना यह संविधान भी जनता के साथ एक गहरा छल है। यह भी सर्वदा सत्ता के ही हित में खड़ा मिलता है। वह सत्ता चाहे साधू की हो या डाकू की। और अभी तक का तो अनुभव यही है कि सत्ता सर्वदा डाकू के ही हाथ आती रही है। बस चेहरे बदल जाते हैं। चाल और चरित्र सभी सत्ता के एक ही मिलते है। सब के रंग ढंग एक हैं। कोई सांपनाथ तो कोई नागनाथ। बस नाम का फर्क है। हवा सब की एक है, मकसद  और मुद्दा एक है। कि जनता को सूई लगा-लगा क गाय की तरह दूहो! और फिर जब दुधारू न रहे तो कसाई के हवाले कर दो। और जब तक काम चलता है तब तक प्याज और पेट्रोल के दाम में उलझाए रहो, इनकम टैक्स के स्लैब और डीए जोड़ने में फंसाए रहो।

कारपोरेट इन सरकारों का मदारी है और यह सरकारें उन की बंदर। और अभी तक मैं ने कहीं कभी पढ़ा नहीं, सुना नहीं कि कोई बंदर कभी किसी मदारी पर आक्रामक हुआ हो! सो मित्रों यह बजट भी एक प्रहसन है सरकार के नाचने का और जनता को सूई लगा-लगा कर दूहने का। कुछ और नहीं। इन बजट के प्रहसनों में कभी किसी कार्पोरेट का बाल बांका हुआ हो तो बताइए। कभी इन पर लगे किसी टैक्स की कोई चर्चा हुई हो तो बताइए। फिर भी हज़ार प्रतिशत सालाना ग्रोथ की इन की रिपोर्ट पढ़ते रहिए! आप इसी के लिए अभिशप्त हैं। तो बोलो कारपोरेटपति श्री सरकार की जय!

लेखक दयानंद पांडेय वरिष्ठ पत्रकार और उपन्यासकार हैं. उनसे संपर्क 09415130127, 09335233424 और dayanand.pandey@yahoo.com के जरिए किया जा सकता है। यह लेख उनके ब्‍लॉग सरोकारनामा से साभार लिया गया है।

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Comments on “जनता की आंख में धूल झोंकने वाली यह सरकारें सिरे से जनता की दुश्मन हैं!

  • BINAY KUMAR SINGH says:

    ankho me dhul jhokne ke mamle me ek curruption jo asia ke 1st cast iron plant me ho raha hai , aap ke WASTAGE OF PUBLIC MONEY AT SAILGRROWTH WORKS,KULTI

    1. SAIL Growth Works, Kulti is under the clutch of corruption and crores of Public money is being wasted by adopting various unfairmeans in almost all the spheres without any restrain from the corporate level of SAIL.
    2. Violating or ignoring the Orders of Director (Finance),SAIL and the Executive Director of SAIL Growth Division ,the Executives and Non-Executives of SAIL are being allowed to enjoy Company’s Electricity at trifling rates without determining the actual consumption of Electricity in each Qrs, Bunglow, Private Schools, Officers Club, Guest House etc rendering loss of electricity charge amounting Rs 20 Lacks approx per month.
    3. At the behest of the Executive Director, Growth Division a Contractor was appointed for supply of Power Meters and installation of those at the Qrs & Bunglows under SAIL Growth Works, Kulti. But, surprisingly after installation of 129 Power Meters in various Bunglows and Qrs . But ,the said job was stopped with vested interest of a particular officer who has been enjoying huge Qty of Electricity at his Bunglow ( Comprising 3 Bunglows) and a particular Privately owned English Medium School running commercially on the land and Buildings occupied by an Executive defying the order/orders of the then IISCO Board with vested interest.
    4. That without controlling the expenditure on account of Electricity Charges expenditure is been lavishly by losing SGW,Kulti huge sum.
    5. That in the name of Awarding contract jobs to Contractors for running various Departments under SAIL Growth Works and for supply of materials regularly violations of contract or supply procedures is envisaged. That without having requisite /prescribed experiences contractors are being selected arbitrarily by the SGW Management hiking abnormally the cost of contract and even 60-100% hike in contract value have been given abnormally to the selected contractors and the suppliers at the cost of Public finance. Nepotism is going on in course of awarding jobs to contractors.
    6. That crores of money in on Account CSR fund is being misutilised lavishly by the SGW Management without serving the purpose and objective of CSR Fund.
    7. The SGW Management has been incurring huge expenditure by re-constructing Boundry walls and fencing throughout the Kulti Township unnecessarily by spending Crores of Public Money with vested interest.
    8. That by expending huge expenditure by renovating a Bunglow a Sign Board has been displayed as MAHILA SAMAJ surreptitiously, where no Mahila was ever seen, but regular spending of money is being made on that account falsely.
    9. That Company’s Ration Shop Building near Kathpul ,Kulti was renovated by incurring huge cost in the name of Proposed “Old Age Home” and inaugurated formally by the Management. But no activities at the site are seen.
    10. That Century old Children Park adjacent to Kulti Club has been amputed for construction of a proposed Marriage Hall to be run commercially without getting any permission from the concerned Land Revenue Department or the Municipality. Even without getting any permission from the Forest Department a considerable number of Big Grown Trees were cut down arbitrarily and whimsically by particular Officers.
    11. That without floating any Tender, construction of the proposed Marriage Hall on the land of SAIL has been awarded to a selected contractor violating every Rules and norms of Contract awarding procedures. So money contract jobs have been awarded to a few selected Contractors showing Emergency Basis.
    12. The lands and Buildings under SAIL Growth Works are being swallowed regularly by a group of corrupted Officers with vested interest. The Kulti Club, Guest House and the most prestigious General Manager’s Bunglow are being misutilized and become the money etching Centres of a few corrupted Officers. It is learnt from source that the aforesaid are being taken on lease by a Executive in camouflage or in Benami.
    13. That with any executing any lawful Lease Agreement as per condition laid down by the then IISCO Board a Particular Officer and his family members have been running a Privately owned English Medium School running commercially on the land & Buildings by dint of a fake and forged document of Lease Agreement in respect of that School and Crores of Fund are being received by that School since 1989 .
    14. That the said Privately owned English Medium School has been allowed to enjoy free electricity to the tune of Rs 1.5 Lacks per month by the SAIL Authority and numerous Qrs and Bunglows have been allowed to live in by the Teachers and employees of the Priyadarshini Public School without paying either rental or electricity charges defying the conditions of paying those charges while approval by the IISCO Board.
    15. By expending about 20 Lacs of money of SAIL Growth Works , Century old Rabindra Library adjacent to Kulti Sammilanee was renovated with high cost and renamed as Rabindra Kala Kendra which was inaugurated about 4 years back by holding a opening ceremony in presence of various dignitaries in the field of culture, literature and Govt authorities. But all the old books with Racks and Almirahs were found missing. Upto date the so called Rabindra Kala Kendra has been remaining under Lock & Key.
    16. Kulti Sammilanee the reputed Century old cultural Centre of Kulti Township has turned into a Ghost House. All Chairs, Screens of the Auditorium and the Machines for Cinema Showing including doors and windows have been allowed to be stolen with active support of the corrupted Officers of the SAIL Growth Works Management.
    17. That in huge number of Company’s Qrs are being misutilised by the Management and in lieu of hush money outsiders are allowed to stay in those Qrs with the support of the SGW Management.
    18. That surreptitiously Old furniture Tables , Chairs, Sofa ,Type Writers, Computers, AC Machines and various tools and tackles were removed by an Executive of SGW Management with the help CISF for personal gains.
    19. That wastage of Public money/or extravagant expenditure on luxury at SAIL Growth Works, Kulti. Household Furniture including 12 Station Multigame, Refrigerators, geyser, vacuum Cleaner, Aqua Guards,18 Nos of AC Machines, LCD TV etc purchased by the SAIL Growth Works Management in the year 2010 only . Total cost of those is Rs 10, 19,011.00 (Rupees ten lakhs nineteen thousand eleven only) between May to July 2010 only. That in the General Manager’s Bunglow where Sri V.S.Dimri, the last G.M of IISCO, Kulti Works stayed upto 2003 was well furnished with costly furniture, Refrigerators, AC Machines ,TV Set and electronic gadgets. Generally the GM Bunglow used to be maintained with extra ordinary care and all the household teak wood furniture including the electronic gadgets were fully in working condition after vacating the Bunglow and handed over by the last G.M. of IISCO, Kulti Works.
    20. That after reopening of the Works in 2007 in the name of SAIL Growth Works Kulti upto date that G.M.Bunglow was not allotted to or occupied by any top Executive of SAIL Growth Works or SAIL Growth Division. That G.M’s Bunglow has been remaining vacant upto date. But, it is gathered that despite existence of old costly furniture new household furniture and Electronic gadgets were purchased and/or installed in the name of G.M’s Bunglow raising question : Where the old costly furniture and electronic gadgets gone ?
    21. That regular stealing at vacant Qrs and Bunglows are being made by stripping those Bunglows and Qrs by removing doors, windows, Rain Water Pipes, fencing CI Pipes and sanitary fixtures etc with the tacit consent of the SGW Management. But the said Management has not taken any preventing steps to stop recurrence of those stealing.
    22. That a HIGH POWER Enquiry Committee should be constituted to reveal the truth and to take offenders into book by awarding exemplary punishment to save the Public Sector unit from destruction.
    Binay kumar singh
    Kulti , Bohal
    Dist. Burdwan (W.B)
    Pin 713343
    Mobile 9475026308
    se mai ujagar karna chahta hu

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