पत्रकारिता में पूंजी और तकनीक से ज्यादा महत्व काम करने वालों का है : अच्युतानंद मिश्र

हिंदी विवि के जनसंचार विभाग के सत्रारंभ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अच्युतानंद मिश्र ने मीडिया अवसर एवं चुनौतियाँ विषय पर वक्तव्य देते हुए कहा कि समय के साथ पत्रकारिता में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं. पत्रकारिता अब मिशन न होकर प्रोफेशन बन कर रह गया है. मीडिया के विश्वव्यापी चरित्र और इतिहास पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया में अवसर भी हैं और चुनौतियाँ भी. यह आप पर निर्भर करता है कि आप चुनौतियों को किस प्रकार अवसर में तब्दील करते हैं.

अच्छा पत्रकार वो है जो अपने आपको हर तरह से अपडेट रखता है और अपनी ज्ञानेन्द्रियों को हमेशा सक्रिय रखता है. पत्रकारिता में पूंजी और तकनीक से ज्यादा महत्त्व काम करने वालों का है. आज पत्रकारिता में बदलाव की रफ़्तार बहुत तेजी से चल रही है इस रफ्तार को पकड़ना ही पत्रकारिता में सबसे बड़ी चुनौती है. मिश्र ने कहा कि स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान की पत्रकारिता के इतिहास को, सभी विद्यार्थियों को पढ़ना चाहिए.  स्वतंत्रता आन्दोलन में पत्रकारिता की भूमिका को उद्घाटित करते हुए उन्होंने राजाराम मोहन राय, महात्मा गाँधी, हजारी प्रसाद द्विवेदी, गणेश शंकर विद्यार्थी, विष्णु राव पराड़कर, भारतेंदु हरिश्चंद्र और पं. युगल किशोर शुक्ल के पत्रकारीय जीवन से छात्रों को रूबरू कराया.

सत्रारंभ कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हिंदी विवि के अतिथि लेखक अरविन्द मोहन ने पत्रकारीय मूल्यों से पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रख रहे नौनिहालों को परिचित कराया. उन्होंने कहा कि जिस रफ़्तार से पत्रकारिता का क्षेत्र बढ़ रहा है उतनी ही तेज़ी से पत्रकारिता में अवसर भी बढ़ रहें हैं. ज़माने के साथ यदि कदम से कदम मिलाकर चलना है तो अपनी पत्रकारिता को प्रौद्योगिक से जोड़ना होगा. नई चीजों से बिना देर किए अपने आपको अद्यतन करना होगा. पत्रकारिता की चुनौतियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में ज्ञान के साथ-साथ तकनीक का समागम अति आवश्यक है.

सत्रारंभ कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में हिंदी विवि के कुलपति गिरीश्वर मिश्र ने कहा कि मीडिया की सबसे बड़ी चुनौती उसकी प्रमाणिकता है. आज यह सवाल है कि पत्रकारिता का धर्म क्या है? वर्तमान समय की पत्रकारिता में प्रमाणिकता के लिए पत्रकारों को परिश्रम की आवश्यकता है. अच्छा पत्रकार बनने के लिए जिज्ञासा के साथ-साथ ज्ञान और विज्ञान दोनों की समझ आवश्यक है. पत्रकारिता को हम जब तक मिशन के रूप में नहीं लेंगे तब तक इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठता रहेगा. पत्रकार साथियों को विचारों से ऊपर उठकर समाज हित में कार्य करना चाहिए.

जनसंचार विभाग के प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी ने छात्रों को संबोधित करते हुए बताया कि अच्युतानंद मिश्र हिंदी पत्रकारिता के साथ अकदमिक क्षेत्र और हिंदी जगत के भी कर्णधार हैं. आज की पत्रकारिता में मूल्यों को यदि किसी ने जिया है तो उसमें सबसे पहला नाम अच्युतानंद मिश्र का आता है. जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ कृपाशंकर चौबे ने मुख्य अतिथि अच्युतानंद मिश्र का परिचय कराते हुए कहा कि इस तरह के व्यक्ति का जन्म सदियों में होता है. इन्होंने पत्रकारिता को एक नया आयाम दिया है. पत्रकारिता के व्यावहारिक और अकादमिक दोनों पक्षों में अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है. साथ ही डॉ. चौबे ने अच्युतानंद मिश्र मिश्र के साथ अपने पत्रकारीय जीवन को भी साझा किया.

प्रश्नकाल में मीडिया के नए छात्रों ने मीडिया कार्यविधि, तकनीक, अवसर और चुनौतियाँ से संबंधित विषयों से सवाल भी पूछे. कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के सहायक प्रो. डॉ धरवेश कठेरिया और धन्यवाद ज्ञापन राजेश लेहकपूरे ने किया. कार्यक्रम के दौरान विभाग के सहायक प्रो. डॉ. अख्तर आलम, संदीप कुमार वर्मा, रेणू सिंह सहित विभाग के समस्त विद्यार्थी और शोधार्थी उपस्थित रहे.



 

भड़ास व्हाट्सअप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक करें- BWG-1

भड़ास का ऐसे करें भला- Donate

भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849



Comments on “पत्रकारिता में पूंजी और तकनीक से ज्यादा महत्व काम करने वालों का है : अच्युतानंद मिश्र

  • अरुण श्रीवास्तव says:

    पत्रकारिता में ही नहीं मिलों , कारखानों और फैक्टरियों ही नहीं हर चीज में पूंजी से ज्यादा श्रम का महत्व होता है लेकिन यह छोटी सी बात धनपशुओं और उनके सलाहकारों की मोटी बुद्धि में घुसती ही नहीं।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*

code