अखिलेश यादव बहादुरी के साथ लड़ते हुए पराजित हुए!

अनिल पांडेय-

चुनाव की रणभूमि पर अखिलेश यादव बहादुरी के साथ लड़ते हुए पराजित हुए हैं। उनके सामने कितना भी बड़ा महाबली योद्धा क्यों न आया हो लेकिन अखिलेश ने पीठ नहीं दिखाई और डटकर उसका सामना किया है इसलिए अखिलेश तुम चुनाव हार कर भी जीत गए हो।

इस हार से अखिलेश तुम्हारा कद छोटा नहीं हुआ है बल्कि भारतीय राजनीति में तुम्हारा कद बढ़ा है। इतिहास बहादुरों की तारीफों से भरा हुआ है। इसलिए इस हार से हताश और निराश होने की जरूरत नहीं है। जनता ने यूपी में सपा को एक मजबूत विपक्ष के रूप में चुना है और सपा को एक जागरूक विपक्ष की भूमिका निभानी है।

प्रकाश के रे-

विधानसभा के परिणाम दिशाहीन, थके और भ्रष्ट उदारवाद की हार व अप्रासंगिकता को दर्शाते हैं. उदारवादी मित्रों, विशेषकर सोशल मीडिया योद्धाओं, को आलस और स्वार्थ छोड़कर उदारवाद के पतन (उसका लिबरल से नियो लिबरल और नियो कंज़रवेटिव बनना) पर विचार करना चाहिए. पार्टियों के अघोषित प्रचारकों की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए. यह टिप्पणी पार्टियों से प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से जुड़े लोगों के लिए नहीं हैं.



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