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उत्तर प्रदेश

25 साल से संघर्ष कर रहे लाखों शिक्षकों में जगी उम्मीद

प्रयागराज। तकरीबन पच्चीस साल से संघर्ष कर रहे वित्त विहीन शिक्षकों को अब न्याय की उम्मीद बंधी है। प्रदेश सरकार ने आखिरकार ये माना कि वित्त विहीन शिक्षकों की सेवा सुरक्षा नियमावली की मांग जायज है। वित्त विहीन शिक्षकों के संवेदना सम्मेलन में हजारों की संख्या में जुटे प्रिंसिपल-टीचर्स और मैनेजर्स ने जब इस ज्वलंत मुद्दे पर आवाज बुलंद की तो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने जल्द ही सेवा सुरक्षा नियमावली बनाने का भरोसा दिलाया।

शिक्षक संवेदना सम्मेलन में शिक्षकों ने मलाल जाहिर किया। वक्ताओं ने कहा कि कहने को वे गुरूजन कहे जाते हैं पर उनकी दशा दिहाड़ी मजदूर से भी ज्यादा बदतर है। करीब पच्चीस साल से ऐसे लाखों शिक्षक सेवा नियमावली और समान कार्य के लिए समान वेतन के लिए अलग-अलग गुट व संगठनों में रहकर नियत वेतन देने की मांग कर रहे हैं।

विभागीय आंकड़ों की मानें तो यूपी में साढ़े चार हजार राजकीय अनुदानित विद्यालय हैं जबकि अकेले उ0प्र0 माध्यमिक शिक्षा परिषद में मान्यता प्राप्त तकरीबन बीस हजार से ज्यादा माध्यमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षक चार लाख से ज्यादा बताए जा रहे हैं।

अशासकीय स्ववित्त पोषित विद्यालय महासंघ केंद्रीय राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष डॉ0 अनिल कुमार मिश्र ने भड़ास 4 मीडिया से बातचीत के दौरान साफ तौर पर कहा कि आश्वासन के बजाए रिजल्ट चाहिए। महासंघ के संरक्षक एवं विधायक संजय गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष रणजीत सिंह, संगठन के प्रभारी महासचिव शिव बहादुर पटेल, ललित त्रिपाठी, प्रभु शंकर शुक्ल समेत अन्य कई प्रमुख लोगों ने विचार रखे।

प्रयागराज से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट. मोबाइल-8840338705

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