मध्य प्रदेश के ईमानदार पत्रकारों को बदनाम करने के भाजपाई खेल के खिलाफ शिवराज को एक पत्र

प्रिय शिवराज जी

नमस्कार

वैसे तो मैं आपसे मिलकर व्यक्तिगत तौर पर बात करना चाहता था लेकिन मैं जानता हूं कि आप इस समय चुनाव में व्यस्त हैं। आपके पास समय नहीं है। फिर यह मामला सोशल मीडिया के जरिये उठा है, इसलिए मैं भी इसी के माध्यम से आपसे बात कर रहा हूँ।

शिवराज जी, वैसे तो आपको जानकारी होगी ही लेकिन फिर भी मैं आपके संज्ञान में यह बात लाना चाहता हूं। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया के जरिये यह बात फैलाई जा रही है कि आपने प्रदेश के चुनिंदा 40 पत्रकारों को गाड़ी और मकान देकर उपकृत किया है। उन पत्रकारों के नाम भी आये हैं जिन्हें आपकी सरकार ने सरकारी मकान आवंटित किये हैं।

आपके अफसरों के हवाले से आ रही इन सूचियों में भोपाल के उन पत्रकारों के नाम भी हैं जिनका जीवन बेदाग रहा है। उन्हें आप भी बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। यह सूची लगातार मीडिया में घुमाई जा रही है। ईमानदार पत्रकारों को बदनाम किया जा रहा है। उनका जीना दूभर बनाया जा रहा है।

मैं यह बात आपसे इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि यह सब आपके नाम से हो रहा है। मैं पिछले 25 साल से मध्य प्रदेश में हूं। आपको बहुत अच्छी तरह जानता हूँ। आप भी मुझे बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। इसी वजह से आपको पत्र लिख रहा हूं।
मेरा मानना है कि आपका नाम लिया जा रहा है। इसलिये आपको सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये। अगर आपने किसी को उपकृत किया है तो उसका नाम सार्वजनिक करिये ताकि अन्य लोगों को बिना वजह अपमानित होने से बचाया जा सके। अगर नहीं तो फिर आपको सामने आकर इसका खंडन करना चाहिये। साथ ही इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिये।

मुझे उम्मीद है कि आप अपने व्यस्त समय में से कुछ मिनट निकाल कर मेरे इस अनुरोध पर विचार करेंगे। साथ ही तत्काल कदम उठाएंगे क्योंकि यदि पत्रकारों को बिना बजह बदनाम करने की मुहिम चलती रही तो बदनामी आपकी भी होगी क्योंकि सब कुछ आपके नाम पर हो रहा है।

आप मेरी बात को सही संदर्भ में समझेंगे और तत्काल कदम उठायेंगे, इस उम्मीद शुभकामनाओं के साथ आपका शुभेच्छु मित्र!

अरुण दीक्षित

ब्यूरो चीफ, नवभारत टाइम्स

भोपाल


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