एलआईसी के कैलेण्डर पर कानूनी कार्यवाई करेगी छत्तीसगढ़ की ‘सम्पदा’

जीवन बीमा (एलआईसी) के नये साल के कैलेण्डर को लेकर एक बड़ा बवाल खडा़ हो गया है. कैलेण्डर के जून महीने के पन्ने पर जो कला कृति दिखायी गयी है, उसी पर यह बवाल है. इस पूरे विवाद पर छत्तीसगढं की सम्पदा नाम की सामाजिक संस्था ने आपत्ति की है. सम्पदा के कर्ताधर्ताओं का कहना है कि जून महीने के पन्ने पर ढोकरा धातु कला का प्रदर्शन किया है. इस कला का परिचय मध्यप्रदेश की कला के रूप में किया गया है. जबकि यह छत्तीसगढ की प्रमुख धातु कला है. इस कैलेण्डर को वापस लेने और संशोधन के बाद पुनः प्रकाशित कर ने पर ‘सम्पदा’ वालों ने एलआसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है.  इस बारे में ‘सम्पदा’ वालों का की क्या आपत्ति है और वो क्या चाहते हैं. इस को जानने के लिए देखिए नीचे दिया गया पत्र-

प्रति,
   श्रीमान अध्यक्ष महोदय,
  भारतीय जीवन बीमा निगम.
विषय: कैलेंडर में गलत, भ्रामक जानकारी प्रकाशित करने के कारण हमें विभिन्न स्तरों पर होनेवाली हानि के बाबत.

माननीय महोदय,
      आज आप  अर्ध शासकीय राष्ट्रीय संस्था द्वारा प्रकाशित वर्ष २०१५ का  वार्षिक कैलेंडर कलात्मक तस्वीरों से युक्त सुन्दर है, बधाई. किन्तु बड़े खेद का विषय है कि माह जून २०१५ के माह के पेज पर पीतल की कलाकृतियों के साथ ही इसका त्रुटिपूर्ण, भ्रामक परिचय, धातु कला-ढोकरा, मध्यप्रदेश के रूप में कराया गया है, जो कि गलत है.
हम और हमारे पूर्वजों द्वारा बीसियों पीढ़ियों से, कई सदियों से बस्तर जिले में इस प्राचीन कला पद्धति के द्वारा कलाकृतियाँ तथा ग्राम्य देवी देवताओं की मूर्तियां बनाई जाती रहीं हैं, देश विदेश में हमारी यह कला ढोकरा कला के नाम से विख्यात है. बस्तर कोन्डागांव की ढोकरा कला के हमारे संस्थान के पूर्व मार्गदर्शक कला गुरु स्वर्गीय जयदेव बघेल निवासी कोन्डागांव वर्तमान में ढोकरा कला के पितामह माने जाते हैं.
  किन्तु आप के द्वारा इस “ढोकरा कला” को  मध्यप्रदेश की कला बताने से हमारी कला की साख को गम्भीर क्षति पहुंची है, साथ ही हमारी तथा हमारी कला की विश्वसनीयता भी. पूरे देश में, जहां-जहां भी आप का कैलेंडर वितरित किया गया है वहां भी कम होगी. वस्तुतः अब हम छत्तीसगढ के ढोकरा कला के मूल कलाकारों की कलाकृतियों को मध्यप्रदेश की ढोकरा कला की नकल समझा जावेगा.
२-  आप के कैलेंडर में ढोकरा कला को मध्यप्रदेश का प्रदर्शित करते हुए इस कैलेंडर के वितरण से हम कोन्डागांव, बस्तर ही नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ के सभी ढोकरा कला के कलाकारों की कलाकृतियों की विश्वसनीयता, साख पूरे देश भर में प्रभावित होगी तथा हमारी कलाकृतियों के मूल्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. जिसके कारण ढोकरा कला से जुड़े छत्तीसगढ़ राज्य के सभी कलाकारों का जीवन यापन करना कठिन हो जाएगा. अतएव हम आप से विनम्र निवेदन करते हैं कि, तत्काल इस असत्य, भ्रामक जानकारी वाले समस्त वितरित कैलेंडर वापस लेकर आवश्यक त्रुटियां सुधार कर ही वितरित करने की कृपा करें.
३- हमारी मध्यप्रदेश अथवा किसी भी प्रदेश के प्रति कोई दुर्भावना बिल्कुल ही नहीं है, अतएव इस सन्दर्भ में हमारा सकारात्मक सुझाव है कि मध्यप्रदेश के पूर्व छत्तीसगढ के नाम को ढोकरा कला के लिए लिखा जाए.
आप का कैलेंडर जितना ही अधिक प्रचलित, वितरित , प्रदर्शित होगा, उतना ही अधिक हमें एवं हमारे छत्तीसगढ के ढोकरा कला के कलाकारों को प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष हानि होगी, अत: आप से विनम्र निवेदन है कि, आप अपनी महान कल्याणकारी राष्ट्रीय संस्थान भारतीय जीवन बीमा निगम, की यशस्वी परंपरा के अनुरूप यथाशीघ्र इस पर उचित एवं प्रभावी कार्यवाही कर, की गई कार्रवाईयों  से हमें भी  अवगत कराने की कृपा करें.
आप के द्वारा सन्तोषप्रद कार्रवाई नहीं करने की दशा में हमें मजबूरन अपने समूह, प्रदेश के सम्मान, कला की साख एवं विश्वसनीयता तथा अपनी आजीविका को बचाने हेतु उचित वैधानिक उठाना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी आप की एवं आपकी संस्था की होगी.

    आवेदक
  डॉ. राजाराम ,
वास्ते:
सम्पदाःसमाज सेवी संस्थान,
Website:- www.sampda.org
कोन्डागांव बस्तर, छत्तीसगढ़.
07786-242506

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