साबरमती आश्रम से कारोबार चला रहे ”मानव साधना ट्रस्ट’ की गतिविधियां संदिग्ध लगती हैं

अहमदाबाद। 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जन्मजंयती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में स्वच्छता अभियान की शुरुआत करेंगे. लेकिन मोदी के गृह क्षेत्र गुजरात में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पावन भूमि साबरमती आश्रम में ”मानव साधना ट्रस्ट” ने कितने सालों से ना केवल अपना अड्डा जमा रखा है बल्कि मानव साधना ट्रस्ट के करोड़ो रुपयों के विदेशी हवाला का घोटाला भी सामने आया है। आरोप है कि इस घोटाले में गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल का समूचा परिवार शामिल है, यह घोटाला मोदी के संज्ञान में ना हो यह असंभव सा प्रतीत होता है. गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को बढ़त हासिल करने के बाद नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री के पद पर विभूषित हुए थे तब गुजरात की सत्ता की बागडोर आनंदीबेन पटेल को दी गई.

‘मानव साधना ट्रस्ट’ अमेरीका की पंजीकृत संस्था है और इसकी स्थापना वीरेन जोशी ने 1993 में अमेरिका के इलिनॉयज में 501-सी (3) के तहत रजिस्टर्ड की थी. उसके बाद 1995 में गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल के दामाद जयेश पटेल ने अहमदाबाद में महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम में मानव साधना ट्रस्ट की स्थापना की. जयेश पटेल गांधीवादी नेता स्व. ईश्वर भाई पटेल के सुपुत्र हैं. और ईश्वरभाई पटेल को कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है और इस ट्रस्ट को जयेश पटेल अपनी पत्नी अनार पटेल के साथ चला रहें हैं. अनार पटेल गुजरात की मुख्यमंत्री आंनदीबेन पटेल की सुपुत्री है.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह संस्था अमेरिका में कोई खास काम नहीं कर रही. इसकी वेबसाइट में इसका प्रशासनिक खर्च भी ‘जीरो’ बताया गया है, मानव साधना ट्रस्ट की प्रचार पुस्तिका में भी अमेरिका का खर्च जीरो भारत का खर्च 6 प्रतिशत बताया गया है. लेकिन सभी नियमों और कानून को ताक पर रखकर धड़ल्ले से ना केवल गांधीजी के नाम का इस्तेमाल कर पैसा भारत भेजा जा रहा है बल्कि साबरमती आश्रम की जगह का इस्तेमाल भी खुलेआम किया जा रहा है. गौरतलब है कि साबरमती आश्रम पर अतिक्रमण को लेकर पहले भी शिकायतें की जा चुकी है.

मानव साधना ट्रस्ट में अनुदान देकर पूरे मामले का पता सूचना अधिकार के कार्यकर्ता रोशन शाह ने लगाया है, रोशन शाह जो आईटी कंपनी चलाते हैं. उन्होंने पूरे सबूतों के साथ इस घोटाले का पर्दाफाश किया है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोई भी अमेरिकन ट्रस्ट देश में जहां गांधीजी की अमूल्य धरोहर हो वहां से क्या स्वेच्छिक या गैरस्वैच्छिक संस्था कैसे चला सकती है? क्योंकि गांधीजी की इस पावन कर्मभूमि पर देश, विदेश से कई हस्तियां आकर नमन करती है. गुजरात हाईकोर्ट के वकील मौलिन बरोट ने भी इस साबरमती आश्रम पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर भी एक याचिका जनवरी 2014 में दाखिल की है. जिसमें उन्होंने मांग की है कि गांधीजी का साबरमती आश्रम राष्ट्रीय स्मारक है इसीलिए इस स्मारक में कई संस्थाओं और राजनेताओं ने जो अतिक्रमण कर रखा है बल्कि कई जगहें गैरकानूनी तौर पर बेची गई है और गैरकानूनी रुप से यहां सोसायटी, बंगलों और दूकानों की भरमार हो गई है.

याचिका में मांग की गई है कि अतिक्रमण से इस पवित्र धरोहर को इन सबसे मुक्त करवाया जाए. इस आश्रम में पहले वाल्मिकी समाज की जो गरीब छात्राओं के लिए शाला चलती थी वह भी बंद हो गई. गुजरात भाजपा के संसद किरीट सोलंकी का यहां 1000 वर्गमीटर पर बंगला भी बना हुआ है. इससे पहले भी इकबाल सुथार नाम के व्यक्ति ने 2003 में याचिका दाखिल की थी और यह मामला 2003 से 2007 चला, गुजरात के एडवोकेट जनरल इस बारे में अपनी कोई रिपोर्ट रखते कि यह मामला अधर में लटक गया और सूत्र बताते है कि इस रिपोर्ट में मानव साधना ट्रस्ट का जिक्र तक नहीं किया गया.

प्रमुख बात यह है कि मानव साधना संस्था कोई खास सामाजिक काम अमेरिका में नहीं कर रही. इसीलिए पैसा भी वहां नहीं ख़र्च किया जा रहा है और इसकी वेब साइट में भी लिखा है कि संस्था चलाने का खर्चा ‘जीरो’ है ऐसे में सवाल उठ खड़ा है कि क्या यह पैसा सारा भारत जा रहा है? रोशन का कहना है कि गुजरात सरकार ने मानव साधना ट्रस्ट को चलाने की अनुमति किसने दी? इस बारे में जब सूचना अधिकार के तहत चेरिटी कमिश्नर से सूचना मांगी गई तो पिछले चार-पांच महीने से इसका जवाब अभी तक नहीं आया.

रोशन ने इसकी तहकीकात मानव साधना ट्रस्ट में एक डालर का दान देकर की. उसने सोचा कि वह गांधी आश्रम में संचालित मानव साधना ट्रस्ट को अनुदान दे रहा है उसने अपने सिटी बैंक क्रेडिट कार्ड से एक डालर का अनुदान दिया और उसका पैसा कहां और किस खाते में गया जब यह जांच की गई तब यह पूरा मामला सामने आया और इस संस्था की पोल पूरी तरह से खुल गई, रोशन ने इस पूरे मामले की ऑडियो रिकार्डिंग कर ली, उन्होंने ”पेपाल ग्राहक सहायता” केन्द्र के कार्यकर्ता कृष्णा नाम के युवक से बात की तो उसने उन्हें सूचना दी कि उसका पैसा अमेरिका की मानव साधना संस्था में गया है.

इस बारे में जब रोशन ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से सूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने उन्हें सूचना दी कि इस संस्था को उन्होंने कोई विदेशी फंड के ट्रांजेक्शन की अनुमति नहीं प्रदान की. रोशन का कहना है कि यह सीधे साधे हवाला का मामला बनता है. 3 जुलाई 2014 को जब उन्होंने अहमदाबाद के डीजीपी को ई-मेल से सारे सबूतों की कॉपी भेजकर हवाला से संबंधित प्राथमिकी दर्ज करने को कहा लेकिन पुलिस ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की. रोशन का कहना है कि जब मैं राणीप और साबरमती पुलिस स्टेशन तमाम दस्तावेज लेकर गया तो भी उन्होंने भी कोई कार्यवाही नहीं की.

मानव साधना ट्रस्ट के बारे में भी अब रोज नए खुलासे सामने आ रहें है, 2011 की अमेरिका की टेक्स रिपोर्ट के अनुसार मानव साधना ट्रस्ट को अमेरिका में 45,570 डालर का अनुदान मिला था. लेकिन प्राप्त दान से ज्यादा मानव संस्था ने 53, 290 डालर खर्च किया, जिसमें 9400 झोपड़पट्टी में रहने वाले बच्चों, 1200 माताओं, 82 प्राथमिक शाला के बच्चों, 4 सड़क पर चलाने वाले स्कूल, 2 होस्टल, एक गर्ल्स स्कूल, नॉन फारमेल स्कूल, कम्युनिटी सेंटर, और विकलांग बच्चों को खाना खिलाने के लिए 25,000 डालर का खर्चा, 138 शिक्षकों द्वारा शिक्षा अभियान, 23 कॉआर्डिनेटर जो अपने-अपने क्षेत्र के स्कूल में पढ़ाते हैं. इसके लिए 11 हजार 45 डालर का खर्च किया गया, इसके अलावा झोपड़पट्टी में दो क्लीनिक चलाते हैं अमेरिका की टेक्स रिपोर्ट में 9000 डालर का खर्च बताया गया है.

इसमें मलेरिया, टीबी आदि बीमारी से पीड़ित 19,000 लोगों के स्वास्थ्य शिविर, कचरा संग्रह करने की पेटी, शौचालय आदि शामिल किए गए हैं, मानव साधना संस्था की 2011 की अमरीका की टेक्स रिपोर्ट में जो 45,000 का अनुदान बताया गया था 2012 में बढ़कर वह 4 लाख 65 हजार डालर हो गया. यानि की अचानक ही दस गुना अनुदान की राशि एक गैरसरकारी संस्था के पास कैसे आ गई? यह जांच का विषय है. 2012 की टैक्स रिपोर्ट में बताया है कि 70,477 डालर शिक्षकों द्वारा शिक्षा पर खर्च किया गया, 30,204 डालर स्वास्थ्य सेवाओं पर, लेकिन झोपड़पट्टी में रहने वाले बच्चों की संख्या 2011 की रिपोर्ट में दर्ज किए गए बच्चों के आधार पर ज्यों की त्यों यानि 9400 बच्चों की संख्या ही रखी गई है. वे बच्चे वे शिक्षक कौन हैं उनके नाम भी कहीं दर्ज नहीं किए गए?

2012 की अमरीका की टैक्स रिपोर्ट में 3 लाख 26 हजार डालर दक्षिण एशिया में ट्रांसफर किया गया इसकी जानकारी में सिर्फ यही कहा गया है कि फोन पर प्रार्थना आने से यह पैसा दक्षिण एशिया भेजा गया है, यह भी बहुत बड़ा सवाल है कि मात्र फोन से सूचना आने पर एकाएक इतना पैसा ट्रांसफर किया जाए? ताज्जुब की बात यह है कि यह अभी तक किसी को पता नहीं है कि अमेरिका या भारत के किस खाते में यह पैसा गया? रोशन का कहना है कि जब मैंने अमेरिका की मानव साधना संस्था को लिखा कि यह पैसा किस खाते में गया मुझे इसकी सूचना दी जाए तो मानव साधना संस्था के वीरेन जोशी इस बात से बौखला गए. और उन्होंने रोशन को धमकी दी कि हमारे बोर्ड में बहुत बड़े वकील है ज्यादा परेशान करोगे तो शिकागो में गिरफ्तार करके केस चलाएगें.

सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जब प्रशासन का अमरीका में खर्च ‘जीरो’ है तो ट्रैवल का खर्चा 60, 383 डालर, विज्ञापन या मार्केटिग का खर्च 10,166 डालर और अन्य खर्च 1 लाख 6 हजार 859 डालर 2012 की अमरीका की टैक्स रिपोर्ट में कैसे आया. सवाल ये भी है, क्या वीरेन जोशी के साथ आनंदी बेन की बेटी अनार पटेल और जयेश पटेल भी इस घोटाले में शामिल हैं? वैसे वीरेन जोशी और जयेश पटेल की सर्वोदय एनर्जी सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी है, यह कंपनी 2010 में स्थापित की गई थी और इस कंपनी की वेबसाइट में जयेश पटेल और वीरेन जोशी दोनों निदेशक है.

रोशन का कहना है कि यह ‘फॉरेन करेंसी रेगुलेशन एक्ट’ का सरासर उल्लघंन बनता है. ऐसा लगता है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को इस बारे में पता नहीं है. रोशन का यह भी कहना है कि 3 लाख 26 हजार डालर का दर्ज किया आंकड़ा भारत की मानव साधना संस्था ने अपनी 2012 की वार्षिक रिपोर्ट में नहीं बताया. जबकि 2006 से तमाम दर्ज आंकड़े ‘फॉरेन करेंसी रेगुलेशन एक्ट’ के तहत बताए गए हैं. मानव साधना का पैसा भारत में नहीं आया ऐसे कई सवाल उठ खड़े हुए हैं और अगर पैसा आया भी तो यह पैसा गया कहां? एफसीआरए के अधिनियम के तहत अपनी सालाना रिपोर्ट में पैसा कहां से आया और कहां खर्च किया फाइनेंशियल रिपोर्ट में बताया जाता है लेकिन 2012-13 की कोई जानकारी अब तक भारत सरकार को दी नहीं.

सवाल इस बात का है कि क्या 2012 के गुजरात विधानसभा में यह पैसा खर्च किया गया? यह एक बहुत बड़ा सवाल है? मानव साधना ट्रस्ट की 2009-2010 की रिपोर्ट में 21 प्रतिशत सरकारी अनुदान और 64 प्रतिशत विदेशी अनुदान बताया गया है.
 
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि मानव साधना संस्था का अनुदान केवल अमेरिका से नहीं आता, गांधी आश्रम के नाम पर यूरोप, आस्ट्रेलिया आदि देशों से भी अनुदान आता है, यहां केवल अमेरिका के मानव साधना संस्था के 3 लाख 26 हजार अनुदान की बात की गई है, ऐसे में सवाल उठता है कि बाकी देशों से आने वाला अनुदान कहां गया? रोशन का कहना है कि इस मामले में अमेरिका की एफबीआई के अलावा ”डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस” के ”क्रिमिनल विभाग” और ”फेडरल ट्रेड कमीशन” में भी शिकायत दर्ज की गई है. अमेरिका के ‘हैनओवर पार्क’ में रोशन ने जब वहां की पुलिस से फोन पर बात की तो वहां की पुलिस ने बताया कि शिकायत दर्ज करवाने आपको यहां आना पड़ेगा या फिर आप अमेरिकन एम्बेसी को जानकारी दो और अमेरिकन एम्बेसी उनसे और संस्था से संपर्क करेगी.

रोशन का कहना है कि उन्होंने अमेरिकन एम्बेसी को भी लिखा है. गांधी आश्रम की वेबसाइट में भी मानव साधना ट्रस्ट का नाम नहीं लिखा हुआ है ऐसे मे सवाल इस बात का भी उठ खड़ा हुआ है कि फिर ‘मानव साधना ट्रस्ट’ ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पावन भूमि साबरमती आश्रम में डेरा क्यों डाल रखा है? आरोप इस बात का भी लगाया जा रहा है कि मानव साधना ट्रस्ट में बच्चों से भी बालमजदूरी करवाई जाती है, मानव साधना ट्रस्ट ने अपनी ‘लर्न एंड अर्न” नाम से वीडियो बनाई है, उस वीडियो को देखकर उससे इसी बात का अहसास होता है. इतना ही नहीं अनार पटेल के पास 80 आंगनवाड़ी हैं. इनकी वेबसाइट में लिखा है कि 80 आंगनवाड़ी सरकार चलाने में असमर्थ है इसीलिए इन आंगनवाड़ी का ठेका अनार पटेल को दिया गया है.

 

उषा चांदना, अहमदाबाद।

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