मुंबई के तथाकथित क्रांतिकारी पत्रकार कितने दब्‍बू हैं कि मजीठिया को लेकर चूं तक नहीं कर रहे हैं

आदरणीय यशवंत जी,

सादर नमस्‍कार

महोदय, सबसे पहले आपको ढेर सारी बधाईयां लगातार मजीठिया के मसले को उठाने के लिए। और, अब एक अहम बात ये कि मुंबई से अलग अलग प्रकाशन समूहों द्वारा ढेरों न्‍यूज पेपर्स तथा मैगजींस प्रकाशित किये जाते हैं, लेकिन जहां तक मेरा खयाल है कि इक्‍के दुक्‍के अखबारों को छोड़कर कहीं किसी भी प्रकाशन में आज तक न तो बछावत न ही मणिसाना आयोग और न ही मजीठिया आयोग की सिफारिशें लागू की गयी।

उम्‍मीद है इस बात को भी आप उठायेंगे, अपनी साइट के द्वारा कि भारत की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई के तथाकथित क्रांतिकारी पत्रकार कितने दब्‍बू हैं कि चूं तक नहीं कर रहे हैं। महंगाई के इस दौर में भूखों मरने की नौबत है, लेकिन कोई सामने आने को तैयार नहीं हो रहा है। यहां तक कि बृहन्‍मुंबई पत्रकार संघ यानी बीयूजे भी किसी भी तरह की कोई पहल करते नजर नहीं आ रहा है।

धन्‍यवाद

धनंजय

मुंबई

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