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उत्तर प्रदेश

मनरेगा की मजदूरी हड़पने वाले अफसरों को बचा रही सरकार

लखनऊ : रिहाई मंच ने बलरामपुर जिले के सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग के अन्तर्गत बनकटवा रेंज के मनरेगा मजदूरों की मजदूरी वन विभाग द्वारा हड़पे जाने के मामले पर प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

लखनऊ : रिहाई मंच ने बलरामपुर जिले के सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग के अन्तर्गत बनकटवा रेंज के मनरेगा मजदूरों की मजदूरी वन विभाग द्वारा हड़पे जाने के मामले पर प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

रिहाई मंच प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अनिल यादव ने कहा है कि बनकटवा वन क्षेत्र के फारेस्ट गार्ड नूरुल हुदा और वाचर राम किशुन ने मनरेगा के अंतर्गत जिन मजदूरों से वृक्षारोपण और झाडि़यों की सफाई का काम 13 जनवरी 2014 से लेकर 26 मार्च 2014 के बीच करवाया उनको मजदूरी देने से इंकार करते हुए दूसरे कुछ मनरेगा के जाब कार्डों पर मजदूरी निकाल ली। अपनी मजदूरी के लिए केशव राम, रामवृक्ष, शंभू यादव, खेदू यादव, राम धीरज, कृपाराम यादव, शिव बचन यादव, मझिले यादव, राम प्यारे, राम बहादुर यादव, संतोष कुमार यादव, बड़कऊ यादव, रामफल ने तत्कालीन जिलाधिकारी मुकेश चन्द्र को 1 अगस्त 2014 को और वर्तमान जिलाधिकारी प्रीती शुक्ला को 20 फरवरी 2015 को शिकायती पत्र भेजा। 

मनरेगा मजदूरी के इस भ्रष्टाचार को लेकर मुख्यमंत्री, वन मंत्री, आयुक्त, संबन्धित विभागों के सचिवों, सीबीआई, केन्द्रीय मंत्रियों और उच्च अधिकारियों से भी शिकायत करने के बावजूद किसी ने इस पर संज्ञान नहीं लिया। उन्होंने कहा कि सरकार की भ्रष्टाचार संरक्षण नीति से फलने-फूलने वाले अधिकारियों के हौसले कितने बुलंद हैं, इस प्रकरण से समझा जा सकता है। 1 साल से अधिक समय से मजदूरी के लिए दर-दर भटक रहे मजदूरों की मजदूरी का भुगतान तो नहीं हुआ और न ही दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाई हुई। इसके उलट बलरामपुर प्रभागीय वन अधिकारी एसएस श्रीवास्तव मजदूरों ने मजदूरी की इस बात को ही झुठलाते हुए इसे वन विभाग के कर्मचारियों को बदनाम करने की साजिश कहते हैं। 

इस मामले जांच रिपोर्ट अन्र्तविरोधों का पुलिंदा होते हुए जांच अधिकारी के न चाहते हुए भी कई जगह तथ्यों के गलत समायोजन की वजह से खुद ही भ्रष्टाचार की स्वीकरोक्ति करती नजर आती है। जहां फारेस्ट गार्ड नुरुल हुदा कहते हैं कि वे इन मजदूरों को पहचानते तक नहीं हैं काम कराना तो दूर की बात है, वहीं क्षेत्रीय वन अधिकारी पीडी राय कहते हैं कि कृपाराम, राम बहादुर, बड़कऊ और रामफल ने काम किया था। यह अन्र्तविरोध इस बात की पुष्टि करता हैं कि मजदूरों ने मजदूरी की थी। जिन लोगों का नाम पीडी राय बताते हैं कि उन्हें मजदूरी का भुगतान कर दिया गया है, ऐसे में सवाल उठता है कि अगर उन्हें मजदूरी दे दी गई थी तो वे अब तक क्यों अन्य मजदूरों के साथ अपनी मजदूरी मांग रहे हैं। वहीं अगर नुरुल हुदा जब उन्हें पहचानता तक नहीं है तो फिर पीडी राय कैसे कह रहे हैं कि उन्होंने मजदूरी की। ऐसे में इस पूरे मामले की प्रदेश सरकार उच्च स्तरीय जांच करवाए।

रिहाई मंच नेता हरेराम मिश्रा ने कहा कि बलरामपुर जिला प्रदेश के उन कुछ जिलों में शामिल हैं जहां मनरेगा में सर्वाधिक भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जिसकी जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है। पर जिस तरीके से इन जांचों के बाद भी मनरेगा के नाम पर भ्रष्टाचार के प्रकरण सामने आ रहे हैं वो साफ करता है कि दोषी अधिकारी और कर्मचारी पूर्ण रुप से आश्वस्त हैं कि उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इस क्षेत्र में वन अधिकारी गरीब जनता जो अपने हक-हुकूक के लिए लड़ती है उसे पेड़ काटने के नाम पर तो कभी बालू खनन के नाम पर फर्जी मामले बनाकर उत्पीड़न करती है। उन्होंने अखिलेश सरकार को मजदूर-किसान विरोधी कहते हुए कहा कि सहारनपुर में पिछले दिनों सर्राफा लूट कांड पर प्रदेश सरकार एसपी तबादला कर देती है वहीं मजदूरों-किसानों के शोषण में लिप्त जिम्मेदार-जवाबदेह जिलाधिकारी समेत किसी से कोई सवाल न करना साफ करता है कि उसके एजेण्डे में गरीब मजदूर-किसान नहीं हैं।

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