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सियासत

‘देश नहीं बिकने दूंगा’ बनाम ‘मार्च तक बेच दूंगी’ : सोशल मीडिया पर मोदी सरकार की नाक कटी

Sunil Singh Baghel : बिकेगा तभी तो हिंदुत्व बचेगा.. प्रिय भारत वासियों हजारों करोड़ का मुनाफा कमाने वाली कंपनी भारत पैट्रोलियम को बेचने के निर्णय पर हो-हल्ला मत मचाइएगा.. आपकी चुप्पी में ही हिंदुत्व का हित छुपा हुआ है.. आपको एक राज की बात बताऊं? चाहे रिजर्व बैंक के रिजर्व से, 1.7 लाख करोड़ लेना हो चाहे मुनाफे में चल रही सरकारी कंपनियों को भी बेचना हो…

दोस्तों दरअसल ऐसे निर्णय हिंदुत्व को बचाने के लिए बहुत जरूरी है… पेट्रोलियम, एयरपोर्ट, SAIL,ओएनजीसी, एयरपोर्ट, एयर इंडिया, BHEL, रेलवे ,बीएसएनएल वगैरा बेचना, देश हित में मतलब हिंदुत्व के हित में बहुत जरूरी है..

दरअसल क्या है कि इन कंपनियों की नीव #नेहरू जी की रखी हुई है..और नेहरु जी का तो आपको पता ही हैं. मोदी जी अमित शाह गलत थोड़ी कहते हैं कि देश की कई समस्याओं की जड़ में यही नेहरू या उनका खानदान है.

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मित्रों भरोसा रखिए.. धैर्य रखिए.. सवाल नहीं उठाने की अपनी नपुंसक परंपरा जारी रखिए. माने की चलते चलते एक इलाज भी बता दूं… ऐसा भी हो सकता है की देशद्रोहियों की पोस्ट पढ़कर यदि कभी आपका भक्ति भाव डगमगाने लगे..तो मन में अंध श्रद्धा भाव लाकर, देश भक्ति के भाव से यह नुस्खा जरूर आजमाइएगा..” किसी भी NEWS CHANNEL का कम से कम 1-1 घंटे,सुबह-शाम का डोज, चाय के साथ ले लीजिए..”

ऐसा करते ही आपके मन का समस्त अंधियारा मिट जाएगा.. देश प्रेम माने की हिंदुत्व का उजियारा चहुं ओर छा जाएगा…आपके मन का मयूरा नाच नाच कर कह उठेगा… हे मूर्ख अब समझा.. यह सब बिकेगा, तभी तो हिंदुत्व बचेगा.. जय श्री राम

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Sheetal P Singh : वित्त मंत्राणी सीतारमण जी ने ऐलान किया है कि वे भारत को बेच डालेंगी! जी हाँ, वे मार्च तक भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (BPCL) को बेचने का लक्ष्य घोषित कर चुकी हैं और किसी “भारतवासी देशभक्त” होलसेलर रिटेलर कनज्यूमर को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा!


Ashish Abhinav : एयर इंडिया और भारत पेट्रोलियम को मार्च तक बेचने की बात वित्त मंत्री जी ने खुले मन से की है! इसपर सरकार को कोई संकोच भी नहीं है! हमेशा की तरह इस मुद्दे पर लगभग मीडिया चैनल खामोश है! जाहिर है ऐसी चीजों को न दिखाना ही चैनलों की पहली प्राथमिकता और सरकार के प्रति भक्ति है!

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लेकिन चैनल को छोड़िए ये यकीन नहीं आ रहा कि आम जनता भी सरकार के समर्थन में कैसे तर्क गढ़ रही है! ‘मैं देश नहीं बिकने दूंगा’ नारा था या जनता के लिए वशीकरण मंत्र? खैर! बेच लीजिए मोदी जी मौका है! कुछ गिनी चुनी अच्छी कंपनियां हैं अब नहीं बिकेगी तो कब बिकेगी? डील पूरी होते-होते वक्त तो लगता ही है! बिगड़ी अर्थव्यवस्था का सवाल भी है!


Satyendra PS : अटल बिहारी वाजपेयी ने विनिवेश मंत्रालय बनाकर सरकारी कम्पनियों होटलों को बेचना शुरू किया था। पेंशन खा गए। लाखों लोगों की नौकरियां खा गए। उनके शासन में बैंकों में 5 साल तक वैकेंसी सीज रही। अन्य सरकारी विभागों में भी वैकेंसी नहीं आती थी रेलवे छोड़कर। उनकी सरकार चली गई।

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विनिवेश और निजीकरण मनमोहन सिंह ने शुरू किया था। कंसेप्ट भी ठीक लगा था कि जो सरकारी उपक्रम एकदम बोझ हैं उनसे हट लिया जाए। उनका वर्क कल्चर बदला जाए। लेकिन धीरे धीरे सरकारें सब कुछ बेच डालने के मूड में आ गईं।

नरेंद्र मोदी आए। उन्होंने कांग्रेस द्वारा खत्म किए गए विनिवेश मंत्रालय की जगह फिर से देश बेचो विभाग न बनाकर दीपम बनाया। यानी सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन एवं विनिवेश विभाग। हम लोग उसे रणनीतिक विनिवेश लिखते थे। असेट मैनेजमेंट यानी सम्प्पति प्रबंधन लिखते थे। मुझे समझ मे नहीं आता था कि सीधे सीधे क्यों नहीं लिखते कि सरकार बेच रही है?

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शायद इसलिए सरकार यह नहीं लिखवाती थी कि पब्लिक नाराज हो सकती है। प्राकृतिक संपदा को लोकतंत्र में देश की जनता का माना जाता है, उसे किसी बनिये की जागीर कैसे बनाया जा सकता है? पहले की सरकारों ने सार्वजनिक सम्पदा के इस्तेमाल से जो सम्पत्ति तैयार की, कोई सरकार उसे किसी सेठ को कैसे बेच सकती है?

लेकिन अब शायद स्थिति बदल गई है। आज का शीर्षक है, ” एआई, बीपीसीएल टू बी सोल्ड बाई मार्च: एफएम”। बेच देना अब राष्ट्रवाद और राष्ट्र हित बन गया है। अब आगे हम इंतजार करेंगे, जब यह खबर आएगी कि देश द्रोही गतिविधियों का संचालन करने वाले जेएनयू को लोढ़ा समूह ने 2000 करोड़ रुपये में खरीदा। लोढ़ा समूह वहां दुनिया का सबसे बड़ा मसाज सेंटर खोलेगा। देश के सबसे बड़े हवाई अड्डे से नजदीक होने की वजह से यह सबसे मुफीद जगह है। साथ ही इसके एक हिस्से में सेक्स वर्कर्स सेंटर खुलेगा। सरकार के मुताबिक इससे 8000 महिलाओं को स्थायी और करीब 40,000 लोगों को परोक्ष रोजगार मिलेगा।

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शुरुआत में जैसे बीमार कम्पनियों को बेचे जाने पर हमारे जैसे समझदार लोगों ने स्वीकार कर लिया था कि यह अच्छा है, उसके बाद bpcl जैसी नवरत्न कम्पनियां बिकने लगीं तो अब लोगों को बता रहे हैं कि यह रणनीतिक विनिवेश नहीं, सेल लगी है। उसी तरह पहले पब्लिक स्वीकार कर लेगी कि किसी 10-15 लड़कों से मुंह ढककर नारे लगवा दिए गए कि भारत तेरे टुकड़े होंगे इसलिए जेएनयू राष्ट्रद्रोही है, इसलिए उसकी फीस बढ़ाई गई और फिर भी स्थिति काबू में नहीं आई तो उसे चकलाघर बना दिया गया जिससे पब्लिक को रोजगार मिले। लोग इसे स्वीकार कर लेंगे।

फिर सरकार बताएगी कि मार्च तक गोरखपुर यूनिवर्सिटी और जिला अस्पताल, नवम्बर तक किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज, सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट बेच देने का लक्ष्य रखा गया है। प्राइम लोकेशन पर जमीन होने के कारण इन दोनों की बिक्री से 50 हजार करोड़ रुपये सरकार के खजाने में आएंगे और इससे सरकार का चालू खाते का घाटा कम होकर 3.5 % पर आ जाएगा। और लोग बड़े उत्साह से बोलेंगे, पाकिस्तान मुर्दाबाद, मन्दिर वहीं बनाएंगे, भारत माता की जय।

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वरिष्ठ पत्रकार सुनील सिंह बघेल, शीतल पी सिंह, आशीष अभिनव और सत्येंद्र पीएस की एफबी वॉल से.

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1 Comment

1 Comment

  1. asif khan

    November 19, 2019 at 11:41 am

    ek dam sahi likha hai. himmat ki bat hai…… desh bhagti ke liye desh becho! or desh bhakto ke hath becho! taki munafa bhakt log kama saken! or desh virodhi sadak per pahuch jayen! isi ko kahte hai… desh bhakti or vikas ka modle

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