विभाजन के बाद मात्र 1500 रुपए लेकर भारत आए थे MDH वाले महाशय धर्मपाल गुलाटी जी!

अवधेश कुमार-

एमडीएच कंपनी के संस्थापक और मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी का 98 वर्ष की आयु में निधन हुआ। विभाजन के बाद केवल 1500 रुपये लेकर भारत आने वाले धर्मपाल जी ने जिस तरह मसाले की दुकान से आरंभ कर 18 फैक्ट्री स्थापित की और एमडीएच को देश में सबसे विश्वसनीय ब्रांड बना दिया वह परिश्रम व उद्यम करने वालों के लिए हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। सादर श्रद्धांजलि।

विवेक शुक्ला-

महाशय धर्म पाल जी गुलाटी करोल बाग़ मेें कभी जूते पहन कर नहीं घूमते थे। किसी हालत में नहीं । वे करोल बाग़ पर जान निसार करते थे। वे करोल बाग़, आर्य समाज रोड, जोशी रोड और अजमल खान रोड हफ्ते में एक या दो बार अवश्य आ जाया करते थे। महाशय जी राजधानी के किसी श्मशान घाट में रोज दस्तक देते थे। अब कहां मिलेंगे महाशय जी जैसे शानदार इन्सान।

दीपक शर्मा-

MDH मसाले के धर्मपाल जी को हम सब अपने बचपन से विज्ञापनों में देखते आये हैं। वे मसाला उघोग के जीवंत प्रतीक थे। Air India के महाराजा और उनके रूप में ज्यादा अंतर नहीं था। मिर्च, मसाले,आचार और पापड़ के व्यापारी भी बिजनेस ब्रांड हो सकते हैं, ये उन्होने साबित किया। अब न महाराजा का दौर रहा और न महाशय धर्मपाल का।

1919 में सियालकोट (पाकिस्तान) में महाशय के पिताजी ने मसालों की दुकान शुरू की थी। विभाजन के बाद, ये दुकान दिल्ली के करोलबाग में धर्मपाल जी ने स्थापित की। कुछ ही बरसों में MDH यानि महाशय दी हट्टी ने पूरे उत्तर भारत में अपनी साख बना ली और 1980 तक मसाले कारोबार में उनकी तूती बोलने लगी।

98 साल की उम्र में आज धर्मपालजी का जाना, एक दौर का खत्म होना है। वो दौर जिसने विभाजन के संघर्ष को सफलता में बदला था। RIP धर्मपाल जी।

तरुण कुमार-

सफलता का ‘सच-सच’ सिखाकर सितारों की दुनिया में खो गया एक सितारा… विभाजन की त्रासदी झेली,पढ़ाई सिर्फ पांचवीं कक्षा तक, जीवन संघर्ष ऐसा कि दिल्ली की सड़कों पर तांगा तक हांकना पड़ा, रेहड़ी पर मेंहदी लगाई, गुड़ बेचा, पर ज़िद थी कारोबार की दुनिया में अपनी तरह की बादशाहत कायम करना। और वह कर दिखाया! एमडीएच हमारे खान-पान ऐसे रचा है जैसे वातावरण में आक्सीजन! महाशिया दी हट्टी (एमडीएच) के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी अनंत में विलीन हो गये! हमारे समय के सर्वाधिक सफल सीईओ,ऐड गुरु और हेल्थ गुरु को नमन !!!

हर्षित श्याम जायसवाल-

अलविदा पद्म भूषण महाशय धर्मपाल गुलाटी जी
27 मार्च 1923 – 03 दिसंबर 2020

साल 2020 वाकई कभी ना भूलने वाला साल है। आज इसने एमडीएच वाले महाशय धर्मपाल को भी लील लिया। महाशय धर्मपाल का जीवन एक युग अध्याय है। बँटवारे से अबतक उनके जीवन की गाथा मानव जिजीविषा का सुंदर दस्तावेज है। मेरी पीढ़ी और शायद मुझसे पहले की पीढ़ी में भी एक वयोवृद्ध व्यक्ति के तौर पर महाशय की अमिट छवि दर्ज है। उनकी बढ़ती उम्र के बावजूद भी उनकी छवि ज्यों की त्यों रहना सेहत के प्रति उनके सचेत रहने का पुख्ता प्रमाण था। हालाँकि इसे लेकर सोशल मीडिया में उनपर तमाम मीम भी बने। इन सबसे परे उन्होंने 98 वर्ष लंबा, भरा-पूरा जीवन जीया। उन्होंने ना सिर्फ अपने मेहनत के दम पर सफलता हासिल की बल्कि अपने कंपनी के ब्रांड एम्बेसडर के तौर पर भारतीय एडवरटाइजिंग जगत में सबसे आइकोनिक व्यक्तित्वों में एक थे। अपने कारोबार से इतर महाशय धर्मपाल धर्म और अध्यात्म में भी काफी रूचि रखते थे। देशभर में होने वाले आर्य समाज के विभिन्न आयोजनों को उनके द्वारा संरक्षण-संवर्द्धन का सहयोग मिलता रहता था। यहाँ पोस्ट में महाशय जी के 91वें जन्मदिन के अवसर पर उनके जीवन की विविध छवियों से बने एक कोलाज को संलग्न कर रहा हूँ। महाशय जी तो चले गए लेकिन महाशयाँ दी हट्टी के मसालों की महक यूँ ही गुलज़ार रहे।

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