तमाशा भी हुआ, बलि का बकरा भी मिला और पीएम की छवि भी बच गई, शेष कार्य ‘BJP ट्रोल मंत्रालय’ कर ही रहा है!

सौमित्र रॉय-

बीजेपी की मीडियाबाज़ी और स्मृति ईरानी के धड़कते दिल को भूल जाइए।

मोदीजी की रैली के लिए फिरोजपुर के मज़बूत नेता राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी को भीड़ जुटाने का ठेका दिया गया था। नाकाम रहे। 20 हज़ार लोग भी नहीं जुटे।

इंडिया टुडे ने सारा गेम प्लान चौपट होने का ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ने की कोशिश में जो वीडियो दिखाया, उसे हटाना पड़ा, क्योंकि उसमें रास्ता रोकने वाले बीजेपी का झंडा उठाये हुए थे।

पूरे तमाशे में एक नाम सामने आ रहा है भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी का, जिसने कथित तौर पर रास्ता रोकने की ज़िम्मेदारी ली है।

सुरजीत सिंह फूल के इस संगठन को BKU ने निलंबित किया था। फूल को कैप्टन अमरिंदर सिंह खेमे का करीबी माना जाता है और यह किसान आंदोलन में शामिल उग्रहां धड़े का खुला विरोधी रहा है।

मतलब- तमाशा भी हुआ, बलि का बकरा भी मिला और पीएम की छवि भी बच गई। बाकी का काम बीजेपी का ट्रोल मंत्रालय कर ही रहा है।

बहरहाल, आज के तमाशे का संदेश साफ़ है- बड़े बेआबरू होके पंजाब से मोदीजी निकले।



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