मोदी सरकार के एक मंत्री की इस नौकरशाह पर इतनी मेहरबानी क्यों?

जब एक्सटेंशन देना था तो नई नियुक्ति के लिए विज्ञापन क्यों निकाला?

नेता लोग अपने मन को भाने वाले अफसरों को जल्द छोड़ना नहीं चाहते. खासकर मलाईदार पदों पर आसीन मनभावन अफसर को तो बिलकुल नहीं. इन दिनों भारत के बंदरगाहों के डिप्टी चेयरमैनों का पंच वर्षीय कार्यकाल पूरा होने के बाद इन पदों पर नए अफसरों की नियुक्ति हो रही है. पांच बंदरगाहों पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो गई है. पुरानों को हटाकर नयों को बिठा दिया गया है. लेकिन छठें बंदरगाह मुंबई पोर्ट ट्रस्ट में मामला अटक गया है.

मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के डीसी (डिप्टी चेयरेमैन) यशोवर्धन को मंत्री महोदय इतना पसंद करते हैं कि वे किसी हाल में इन्हें छोड़ना नहीं चाहते और नियुक्ति प्रक्रिया को उलट-पुलट कर दो साल का एक्सटेंशन दे देने का कारनामा कर दिया है.

भारत के छह बंदरगाहों के डिप्टी चेयरमैन पद पर आसीन अफसरों का पंचवर्षीय कार्यकाल पूरा हो रहा था सो नई नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाल दिया गया. भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई. पांच बंदरगाहों के लिए भर्ती प्रक्रिया अंजाम तक पहुंच गई. नंदीश शुक्ला (IRTS:2006) को दीनदयाल पोर्ट ट्रस्ट का नया डिप्टी चेयरमैन बनाय दिया गया है. उन्मेश शरद वाघ (IRSC&CE:2000) को जवाहर लाल नेहरु पोर्ट ट्रस्ट का नया डिप्टी चेयरमैन नियुक्त किया जा चुका है.

आशीष कुमार बोस (ट्रैफिक मैनेजर, मुंबई पोर्ट ट्रस्ट) को पारादीप पोर्ट ट्रस्ट का डिप्टी चेयरमैन का पद भार दे दिया गया है. अमल कुमार मेहरा (चीफ इंजीनियर, विशाखापत्तन पोर्ट ट्रस्ट) को कोचीन पोर्ट ट्रस्ट के डिप्टी चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है. केजी नाथ (फाइनेंस एडवाइजर एंड चीफ एकाउंट आफिसर, मुंबई पोर्ट ट्रस्ट) को मंगलोर पोर्ट ट्रस्ट का डिप्टी चेयरमैन बनाया गया है.

पेंच फंसा है मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के डिप्टी चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर. कायदे से डिप्टी चेयरमैन पद पर पिछले पांच साल से आसीन यशोवर्धन वानागे का कार्यकाल पूरा होने के चलते इन्हें पद छोड़ देना चाहिए और इस पद पर किसी नए अफसर की नियुक्ति हो जानी चाहिए थी, जैसा कि बाकी पांचों पोर्ट के मामले में हुआ. पर बताया जा रहा है कि यशोवर्धन जी पर मंत्री महोदय की भयंकर मेहरबानी है. मंत्री महोदय नहीं चाहते कि यशोवर्धनजी मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के डिप्टी चेयरमैन पद से हटें. सो इन्हें बीच भर्ती प्रक्रिया एक्सटेंशन दे दिया गया. मतलब, इस पद पर नई नियुक्ति के लिए भर्ती प्रक्रिया चली, आवेदन मांगे गए, सारी औपचारिकता पूरी की जाती रही लेकिन मंत्री जी द्वारा अचानक एक्सटेंशन दे देने के बाद सब कुछ ठंढे बस्ते में चला गया.

अब कुछ सवाल उठने लाजिमी हैं. अगर एक्सटेंशन ही देना था तो नई भर्ती के लिए आवेदन क्यों निकाला? अगर नई भर्ती की जानी थी तो एक्सटेंशन क्यों दे दिया? अगर एक्सटेंशन ही देना था तो बाकी पांचों पोर्ट के डीसी को भी एक्सटेंशन दिया जा सकता था. ऐसा क्या खास मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के डीसी यशोवर्धन में है कि सिर्फ इन्हें ही एक्सटेंशन का लाभ दिया गया. जितने मुंह उतने सवाल. जवाब देने वाला कोई नहीं. सबने चुप्पी साध रखी है.

इन चुप्पियों के चलते सवालों को किसिम-किसिम के पंख लग रहे हैं. इन्हीं सवालों को समेटे एक पत्र इन दिनों सत्ता के गलियारों में घूम रहा है. किन्हीं निखिल चक्रवर्ती ने वित्त मंत्रालय के राजस्व सचिव को पत्र लिख मारा है. लेटर में साफ साफ मंत्री महोदय और मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के डीसी के बीच अनैतिक सांठगांठ का आरोप लगाया गया है. इस पत्र को मीडिया में भी लीक कराया गया है ताकि ये मामला तूल पकड़ सके.

न खाउंगा न खाने दूंगा का नारा लगाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नाक के नीचे उनके एक मंत्री महोदय पक्षपात करते हुए एक दागी किस्म के अफसर को बचाने-बढ़ाने में जुटे हुए हैं, यह सवाल सत्ता के गलियारों से होते हुए मीडिया सर्किल में प्रवेश पा चुका है. संभव है किसी रोज यह प्रधानमंत्री की नजरो तक तक भी पहुंच जाए.

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की रिपोर्ट.

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