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नये भारत के ढहते प्रासाद और इंडियन एक्सप्रेस में गिरी छत को ‘कैनोपी’ लिखना

इमरजेंसी की याद और माइक बंद होने की खबर का ‘सेंसर’ होना

संजय कुमार सिंह

आज की खबर तो यही है कि लोकसभा चुनाव के बाद न सिर्फ ओम बिरला फिर से लोकसभा के अध्यक्ष चुने गये हैं बल्कि सदन में सदस्यों के माइक बंद करने वाला भी फिर से बहाल हो गया है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा है कि वे माइक नहीं बंद करते हैं, उन्हें नहीं पता कौन करता है फिर भी माइक बंद हो रहे हैं। मुझे लगता है कि यह किसी भी खबर से बड़ी खबर है लेकिन आज ज्यादातर अखबारों में दिल्ली में मौसम की मार, हवाई अड्डे की छत गिरने, सड़कों पर पानी भरने जैसी खबरें लीड हैं। मेरे सात अखबारों में अकेले द टेलीग्राफ ने संसद में माइक बंद हो जाने के रहस्य को रिटर्न ऑफ ऑपरेशन पुल-प्लग शीर्षक से छापा है। फ्लैग शीर्षक है, राहुल ने नीट से शुरुआत की पर माइक बंद कर दिया गया। मुख्य शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, प्लग खींचने की प्रथा वापस आई।

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ज्यादा बारिश होने से ही सही, नई बनी सड़कें डूब जायें, टनल में पानी भर जाये तो यही कहना पड़ेगा। वरना गर्मी से बचने के लिए कहां एयर कंडीशनर लगे थे या निर्बा विद्युत आपूर्ति हो रही थी। बारिश ज्यादा हो तो पानी भरना समझ में आता है। छत तभी गिरेगी जब राम मंदिर की तरह पानी इकट्ठा होगा और ऊपर की छत बननी होगी। पर यहां ऊपर छत बननी नहीं थी औऱ पानी जमा हो गया तो इसलिए कि पानी निकलने की व्यवस्था नहीं थी। हमने एंटायर पॉलिटिकल साइंस या एंटायर इंजीनियरिंग से बहुत पहले बचपन में पढ़ लिया था कि जहां बारिश होती है वहां छत ढालूदार बनाया जाता है बाद में बरसात के दिनों में बुआ-चाचा की छत पर इकट्ठा पानी भी हटाया-बहाया है। इसलिए छत कहिये या कैनोपी बात वही है। जो भी हो द टेलीग्राफ का शीर्षक सही है, ढह रहे हैं नए भारत के प्रासाद। 

इंडियन एक्सप्रेस में मौसम की खबर लीड है। हवाई अड्डे की छत धंसने और पानी भरी सड़क की फोटो के साथ जो खबर छपी है वह रिकार्ड बारिश में राजधानी के डूब जाने की है। इसमें छत नहीं, कैनोपी गिरने से एक व्यक्ति के मरने का शीर्षक है और बताया गया है कि जांच के आदेश दे दिये गये हैं, दूसरे हवाई अड्डों की संरचना की भी जांच होगी। यहां हेमंत सोरेन को जमानत मिलने की खबर सेकेंड लीड है और नीट का मामला फोल्ड के नीचे, “सरकार, विपक्ष की भिड़ंत से लोकसभा में नीट पर हंगामा” शीर्षक से है। विपक्ष ने मांग की नीट पर चर्चा सबसे पहले, अध्यक्ष ने कहा धन्यवाद ज्ञापन के बाद। आप जानते हैं कि राष्ट्रपति ने अभिभाषण में इमरजेंसी की चर्चा की है। नीट पर आश्वासन भी दिया है। तो धन्यवाद ज्ञापन बनता है। परंपरा-रिवाज तो है ही। नीट का क्या है, हर साल होता है।      

टाइम्स ऑफ इंडिया में मौसम की खबर बैनर शीर्षक से है। चार-चार कॉलम की दो खबरें हैं। एक का शीर्षक है हवाई अड्डे की छत (यहां रूफ यानी छत लिखा है कैनोपी नहीं) गिरने से कारें चिपटीं, चालक मारा गया; दूसरे किस्मत से बचे। दूसरी खबर का शीर्षक है, जून में एक दिन की बारिश 88 साल में सबसे ज्यादा, पांच मरे और समस्याओं की बाढ़ आई। नीट की खबर दो कॉलम में पहले पन्ने की तीसरी सबसे बड़ी खबर है। शीर्षक है, नीट मामले में विपक्ष ने चर्चा की मांग की, स्थगन को मजबूर किया इससे संसद में हंगामा।

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द हिन्दू में लीड का शीर्षक है, दिल्ली हवाई अड्डे पर छत गिरने से एक की जान गई। उपशीर्षक में बताया गया है दिल्ली में भारी बारिश के बाद टर्मिनल वन परिसर के सामने की जगह के ऊपर की कैनोपी कारों पर गिर गई; इस घटना में छह लोग जख्मी हुए हैं; कई उड़ानें रद्दे कर दी गई हैं; पुलिस ने आपराधिक उपेक्षा का मामला दर्ज किया; मृतक टैक्सी चैलक था। इसके बराबर में यानी टॉप पर हेमंत सोरेन को जमानत मिलने की खबर है। हिन्दू में मौसम की दूसरी खबर ऊपर-नीचे लेकिन अलग-अलग है। दूसरी खबर का शीर्षक है, मानसून के साथ राष्ट्रीय राजधानी में रिकार्ड बारिश से चार मरे, कई घायल।           

हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर संसद के दोनों सदन स्थगित किये जाने की खबर लीड है। शीर्षक है, नीट मामले में संसद में हंगामे के बाद दोनों सदन स्थगित किये गये। हेमंत सोरेन को जमानत मिलने की खबर भी यहीं है। 10 साल की लड़की से सामूहिक बलात्कार और हत्या की खबर तीन कॉलम में छपी है जो दूसरे अखबारों में नहीं दिखी। पहले पन्ने पर छह कॉलम में बारिश और मौत की खबर फोटो के साथ है। इसका शीर्षक, वाटरी एंड ग्रेव है। पहले पन्ने की एक खबर का शीर्षक है, 5 मरने वालों में टी1 पर टैक्सी ड्राइवर, तीन के डूबने की शंका।

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हिन्दी अखबारों में अमर उजाला में नीट या इसपर संसद में हंगामे की खबर पहले पन्ने पर नहीं है। हालांकि यहां जो खबर है वह किसी और अखबार में पहले पन्ने पर नहीं है। इस खबर के अनुसार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने मानहानि का मामला दर्ज कराया है। उपशीर्षक है, पहली बार किसी राज्यपाल ने सीएम के खिलाफ केस दर्ज कराया है। आप जानते हैं कि राजभवन की महिला कर्मचारी ने यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा था कि महिलाएं राजभवन जाने से डरती है। इस बारे में महिलाएं मुझसे शिकायत करती हैं। महिला कर्मचारी की शिकायत पुरानी है, उसके बाद हुए उपचुनाव में एक महिला सायंतिका बनर्जी भी चुनी गई हैं। राज्यपाल ने दोनों नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ लेने के लिए राजभवन आमंत्रित किया था। पर दोनों विधानसभा में शपथ लेना चाहते हैं। इससे शपथ लेना लटका हुआ है और ममता बनर्जी ने इसी संदर्भ में बयान दिया था और इस पर अब राज्यपाल ने केस कर दिया है।  नवोदय टाइम्स में बारिश की खबर बैनर है लेकिन शीर्षक में सरकार का बचाव या लाचारी दिखाने का प्रयास नहीं किया गया है। शीर्षक वही है जो आज होना चाहिये, पहली ही बारिश में वर्ल्ड क्लास राजधानी की खुली पोल। हालांकि, टाइम्स ऑफ इंडिया की प्रस्तुति बेहतर है। और कहने की जरूरत नहीं है कि यह सब उपलब्ध संसाधनों पर भी निर्भर करता है। नीट पर दोनों सदनों में हंगामा तीन कॉलम में है जबकि हेमंत सोरेन जेल से छूटे लगभग बराबर में दो कॉलम में है। बीच में दो कॉलम में खेल की खबरों का बॉक्स है। कुल मिलाकर, मौसम की खबरों के कारण नीट पर चर्चा नहीं होने या होने देने की खबर आज पिट गई। सेकेंड लीड या मौसम की खबरों के बाद दूसरे महत्व की खबर तो ठीक है लेकिन इंडियन एक्सप्रेस ने हेमंत सोरेन को जमानत मिलने की खबर को दूसरे नंबर पर रखा है। अमर उजाला सबसे दिलचस्प है जहां दोनों ही खबरें पहले पन्ने पर नहीं हैं और एक तीसरी खबर चली आई है।

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