चुनाव से पहले पाकिस्तान से ‘भिड़ंत’ की भविष्यवाणी पुरानी है!

भाजपा को शशि थरूर की सलाह, कांग्रेस का अनुकरण करने की कोशिश कीजिए

पुराना ट्वीट जो सोशल मीडिया पर घूम रहा है

पुलवामा हमले के बाद उसकी जिम्मेदारी लेने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ भारत के अभियान के तहत पाकिस्तान पर वायु हमला हुआ। आतंकवादी शिविर को नष्ट करने और 200 से लेकर 600 आतंकी मार डालने की खबर फैलाई गई। फिर अजहर के बीमार होने, हमले में घायल होने और फिर मारे जाने जैसी अपुष्ट खबरें छपती रहीं। इसके बाद उसे वैश्विक आंतकवादी घोषित कराने और इस बहाने भारत की विदेश नीति की प्रशंसा करने और आतंकवाद के खिलाफ सख्त होने की छवि बनाने की कोशिश की गई।

पुलवामा को भुनाने की हड़बड़ी और बेशर्मी इतनी ज्यादा थी कि स्वामीनाथन ए अय्यर ने अपने कॉलम में यह सलाह दी कि पाकिस्तान में खाली पुरानी इमारत पर बम गिराकर गोदी मीडिया से यह प्रचार करा लिया जाए कि आतंकवादी मार दिए। इस सलाह का मकसद यह था कि चुनाव जीतने के लिए पाकिस्तान से युद्ध न छेड़ दिया जाए औऱ यह महंगा पड़ेगा। बाद में जो हुआ वह बिल्कुल ऐसा ही लगता है। दूसरी ओर, मसूद के मारे जाने और घर में घुसकर मारने, पाताल तक पीछा करने जैसे दावे किए जाते रहे। ट्वीटर पर ऐसी एक ‘भविष्यवाणी’ भी है जो 3 मार्च 2015 को किसी हरि सिंह ने की थी।

इस तरह, एक तरफ अजहर को हवाई हमले में ‘मार’ दिए जाने की खबर और दूसरी तरफ उसे अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराने की कोशिशें साथ चलती रहीं। चीन के वीटो का उपयोग किए जाने से इस कोशिश को झटका लगा पर बताया ऐसे गया जैसे भारत ने कोशिशें तो पूरी की थीं पर जैसी आशंका थी, चीन ने विरोध किया या अपने वीटो का उपयोग करके ऐसा नहीं होने दिया। भारत की कोशिशें कामयाब नहीं हुईं तो नहीं हुईं। अजहर जब बीमार है, शायद मर भी गया है तो यह बहुत बड़ा मामला नहीं है।

फिर भी, अखबारों में दूसरे दिन भी अजहर मसूद को वैश्विक आतंकवादी नहीं घोषित किए जाने का मामला छाया रहा। असल में राहुल गांधी ने चुटकी ली कि, सरकार की कूटनीति गुजरात में जिनपिंग के साथ झूला झूलना, दिल्ली में गले लगना और चीन में घुटने टेक देना रही है। चीन के खिलाफ मोदी एक शब्द भी नहीं बोलते। इसपर मोदी तो नहीं बोले अरुण जेटली ने कहा कि, इस मामले में मूल रूप से जवाहर लाल नेहरू दोषी है जिन्होंने सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की बजाय चीन का पक्ष लिया था।

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि, चीन ने 2009, 2016, 2017 व 2019 में भी मसूद के मामले में बाधा डाली थी. 2009 में तो केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। तब राहुल गांधी ने इस विषय पर कोई बयान दिया था या ट्वीट किया था? स्थिति यह है कि अभी तक सरकार या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थक सोशल मीडिया पर जो करते थे वह केंद्रीय मंत्री आम बोल चाल में और अधिकृत बयान के रूप में कहने लगे हैं। और ऐसे बयान खींच खींच कर तीन-चार कॉलम में छापे जा रहे हैं। देखें तस्वीर दैनिक हिन्दुस्तान की।

हिन्दुस्तान में प्रकाशित आरोप

इस साधारण से और रूटीन मामले में भाजपा के (कम से कम) दो बड़े मंत्री कूद पड़े। दूसरे श्री रविशंकर प्रसाद रहे। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस कर कांग्रेस नेता शशि थरूर की किताब, नेहरू दि इनवेंशन ऑफ इंडिया के हवाले से कहा, भारत के पहले प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सीट कांग्रेस की पेश की थी। जेटली ने ट्वीट किया कि कश्मीर और चीन दोनों मामलों में मूल गलती एक ही व्यक्ति ने की थी। इसके साथ मंत्री जी ने 2 अगस्त 1955 को उस समय के मुख्यमंत्रियों को लिखे एक पत्र का का हवाले से कहा कि कैसे नेहरू जी ने चीन के सुरक्षा परिषद में रहने की जरूरत बताई थी और कहा था कि चीन जैसे देश का सुरक्षा परिषद में नहीं होना अनुचित होगा। जेटली ने इसे गलत साबित करने की कोशिश के साथ कहा, क्या कांग्रेस अध्यक्ष हमें बताएंगे कि असली पापी कौन था?

कहने की जरूरत नहीं है कि यह राहुल गांधी ने जो कहा उसका जवाब नहीं था और उनके पड़दादा ने 65 साल पहले जो कुछ किया था उसके लिए उन्हें आज पापी कहने और राहुल गांधी से सवाल करने का कोई मतलब नहीं है। सोशल मीडिया में और कुछेक अखबारों में भी इसकी हंसी उड़ाई है पर हिन्दी अखबारों में यह सब नहीं है और भाजपा का चुनाव प्रचार चल रहा है। हालांकि आज शशि थरूर ने इसपर आठ हिस्से में ट्वीट कर फिर से पूरा संदर्भ बताया है और भाजपा से कहा है कि भविष्य के लिए काम करते हुए कांग्रेस का अनुकरण करने की कोशिश कीजिए।

शशि थरूर के ट्वीट्स
Since my book #NehruTheInventionOfIndia is being cited by the BJP, let’s have some context here:

शशि थरूर के ट्वीट का पहला हिस्सा
  1. China was an original Permanent Member of the Security Council from the signing of the @UN Charter in 1945.
  2. After the Communist takeover of China in 1949, the seat continued to be held by the ousted Govt of Chiang Kai-Shek based in Taiwan, which called itself the Republic of China. Nehru rightly felt that this arrangement lacked credibility & that a tiny island state could not be a Permanent Member with veto power on the Council.
  3. Nehru therefore called on the other Permanent Members to admit Communist China (PRC) to the @UN & give it the Permanent seat held by Taiwan.
  4. US understood the objection to RoC but was unwilling to admit the Communist PRC
  5. In this context it was suggested that India take over the Chinese permanent seat. Nehru felt this was wrong & would compound one injustice to China with another. He said the RoC seat should be given to PRC & India should one day get a permanent seat in its own right.
  6. Remember that India could not have replaced China on the Security Council without an amendment to the @UN Charter. Such an amendment could not have passed over the USSR’s veto, which at the time (well before the Sino-Soviet split) it would have exercised.
  7. So Nehru did not “give the Indian permanent seat to China”. There was no Indian seat to give & it was far from certain the US idea would have worked.
  8. The BJP prefers to fight over the past because they have failed India in the present & can offer no hope for the future.

So a simple request to the BJP: try and emulate @INCIndia in working for the future. Stop arguing about the past.

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट

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Comments on “चुनाव से पहले पाकिस्तान से ‘भिड़ंत’ की भविष्यवाणी पुरानी है!

  • नरेन्द्र मोदी दिसम्बर 2015 में पाकिस्तान गए थे… स्क्रिन शॉट वाले भाई साहब ने मार्च 2015 में ही बिरयानी खाने और युद्ध कराने की घोषणा कर दी थी.. दिव्य़ ज्ञान प्राप्त है इनको… बहुत ही तेज…

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