अमर उजाला के वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट का निधन

अमर उजाला मेरठ में कार्यरत वरिष्ठ फोटोजर्नलिस्ट मनोज देवगन का आज सुबह देहांत हो गया।

वह पिछले एक माह से बीमार चल रहे थे।

अंतिम संस्कार दोपहर एक बजे सूरजकुंड में होगा। यात्रा इनके निवास मंगलपांडे नगर एकता पार्क से शुरू होगी।

मनोज के निधन पर लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार नवेद शिकोह की ये रिपोर्ट पढ़िए-

लम्बे बालों वाले छायाकार मनोज देवगन नहीं रहे

करीब दो दशक तक लखनऊ के बेहतरीन छायाकारों में शुमार वरिष्ठ छायाकार मनोज देवगन का आज सुबह मेरठ में देहांत हो गया। वो कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। करीब बारह-चौदह वर्ष पहले मनोज देवगन का ट्रांसफर अमर उजाला लखनऊ ब्यूरो से मेरठ में हो गया था। तब से वो परिवार सहित मेरठ में बस गए थे। थिएटर के दौर से मनोज से मधुर रिश्ते रहे थे।

कालजयी नाटक एवं इंद्रजीत की तस्वीर उन्होंने ही खीची थी और अमर उजाला में प्रमुखता से छपी थी। थिएटर के सिलसिले के बाद अमर उजाला के लखनऊ ब्यूरो कार्यालय में काम करने के दौरान भी मनोज देवगन जी से दोस्ताना रिश्ता रहा था। अपने काम को समर्पित ये फोटो जर्नलिस्ट फील्ड में चट्टान की तरह जमा रहता था।

जितना भी सख्त मौसम हो..दंगा, आगजनी, गोलीबारी, लाठीचार्ज या पथराव हो रहा हो मनोज हर हक़ीकत को को अपने कैमरे में कैद करने के लिए फील्ड और स्पॉट पर डटे रहते थे।

अपने प्रोफेशन को किसी इबादत से कम ना समझने वाले देवगन हर किस्म की फोटोग्राफी के उस्ताद थे। नई पीढ़ी को सिखाने, आगे बढ़ाने और सहयोग करने का उनमें जज्बा था। हर बीट में उनके सोर्सेज और परिचित थे। और हर इवेंट में उनकी मौजूदगी नजर आती थी।

मुझे याद है जब वो लखनऊ में थे तो बड़े से बड़े अफसर, नेता, कलाकार, कार्यकर्ता या आम इंसान किसी एवेंट/घटना/कार्यक्रम की प्रेस कवरेज की कटिंग कलेक्शन की बात करता था तो कहता था कि लम्बे बालों वाले छायाकार थे इसलिए अमर उजाला जरूर देख लेना।

अलविदा मनोज भाई
श्रद्धांजलि

नवेद शिकोह


मनोज देवगन के निधन के बाद पत्रकार Sanket Mishra लिखते हैं-

मनोज देवगन सर को साथ देखते ही हर खबर आसान हो जाती थी। फोटो तो हर कोई खींच लेता लेकिन संवेदनाओं को अपनी फोटो से गजब आप उकेर देते थे। अमर उजाला लखनऊ की लांचिंग हुई उसके कुछ दिनों बाद खबर करने जाना होता था तो हमेशा मनोज सर बोलते कि अपना पैसा क्यों खर्च करोगे क्यों अपना गाड़ी का तेल फूंकोगे मेरे साथ गाड़ी पर बैठ के चलो। मनोज सर बहुत सहयोग करते थे मै एकदम नया था खबरों ,कार्यालयों और रास्तों से अनजान था लेकिन मनोज सर को देखते ही सब आसान हो जाता था सब जान जाते थे। मनोज सर आप ऐसे साथ छोड़ जाएंगे। बहुत दुखी हूं दो साल आपका साथ रहा आपकी हर बात याद आ रही है। विनम्र श्रद्धांजलि

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