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भारत समाचार वाले बृजेश मिश्रा भी ले आये पीएम मोदी का इंटरव्यू!

19 वाला आम नहीं, 24 वाला ख़ास मोदी का इंटरव्यू…

नवेद शिकोह-

19 और 24 के दरम्यान गंगा से लेकर गोमती और देश की हर नदी में खूब पानी बह चुका है। 19 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अक्षय कुमार जैसे फिल्मी कलाकरों को इंटरव्यू दे रहे थे,24 में खाटी पत्रकारों को खासकर सरकार के सामने सवाल उठाने वाले पत्रकारों को भी साक्षात्कार दे रहे है।

भारत समाचार के ब्रजेश मिश्रा का प्रधानमंत्री का इंटरव्यू आम नहीं था और ना ये इंटरव्यू “आम कैसे खाते हैं, चूस के या काट के” जैसा प्रायोजित लगने जैसा था।

ब्रजेश के नर्म लहजे में सख्त सवाल भी थे। विरोधिओं का सबसे बड़ा आरोप प्रधानमंत्री के मुंह पर दोहराते हुए ब्रजेश मिश्र ने मोदी से पूछा कि तानाशाह सुन कर आपका मन क्रोधित होता है ?
इसी तरह न्यूज 24 चैनल ने भी प्रधानमंत्री से मंहगाई और बेरोज़गारी पर सवाल किए।

पत्रकारिता के एक गुरु ने बताया था कि पत्रकारिता सत्ता के शीर्ष तक जनता के विरोध और आरोपों को पंहुचाने का सेतु है। सत्ता की खामियों और जनता की दबी-कुचली आवाज को, परेशानियों, दुश्वारियों और जरुरतों को सरकार तक पंहुचाने वाले भारत समाचार को प्रधानमंत्री ने इंटरव्यू देकर इन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि सवाल उठाने वाली मीडिया से प्रधानमंत्री दूर भागते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पत्रकार ब्रजेश मिश्रा को इंटरव्यू दिया, ये कोई आश्चर्य करने वाली बात नहीं है। ये ढाई दशक से टीवी पत्रकारिता से जुड़े हैं, इससे पहले नंबर वन अखबार में थे। एक अनुभवी और परिपक्व पत्रकार को प्रधानमंत्री का इंटरव्यू करने का मौका मिला ये कोई ताज्जुब की बात नहीं। बड़ी बात ये है कि सत्ता के सामने सवाल खड़े करने वाले चैनल भारत समाचार के बृजेश मिश्र के कड़े सवालों का भी पीएम ने मुकाबला किया।

ये बड़ी बात है और गर्व करने का विषय है कि भारत समाचार न्यूज चैनल देश के उन राष्ट्रीय ,प्रतिष्ठित, लोकप्रिय और बड़ी टीआरपी वाले चैनलों मे शुमार हो गया जिन चुनिंदा चैनलों को प्रधानमंत्री का समय मिलने का मौका मिला।

इस निष्पक्ष चैनल पर यूपी की आवाम और यहां की पत्रकारिता को गर्व है। भारत समाचार यूपी के पत्रकारों का हौसला बढ़ाता है। यकीन दिलाता है कि किसी जमीनी पत्रकार में हिम्मत,हौसला,लगन, जज्बा और योग्यता हो तो वो अपने सूबे और अपने शहर में ना सिर्फ एक चैनल स्थापित कर सकता है बल्कि एक मध्यम वर्गीय पत्रकार का ये चैनल हजारों करोड़ के कॉरपोरेट जगत के टॉप ब्रांड चैनलों में शुमार हो सकता है।

पत्रकारिता के लिए भी ये शुभ संकेत है कि दुर्भाग्यवश कॉरपोरेट कल्चर की कमजोर पत्रकारिता के दौर में किसी पत्रकार द्वारा स्थापित पत्रकारिता के सिद्धांतों वाला चैनल अपनी जगह बनाकर पत्रकारिता की रक्षा कर सकता है। निडरता और ईमानदारी से जनता को सच परोस सकता है। ये चैनल पत्रकारिकता जगत को ये भी अहसास दिलाता है कि बेरोजगारी का दंश झेल रहे मीडियाकर्मियों को एक पत्रकार किस तरह सैकड़ों पत्रकारों/मीडियाकर्मियों को रोजगार दे सकता है।

एक खाटी पत्रकार ब्रजेश मिश्रा का भारत समाचार काबिले जिक्र इसलिए है कि ये मीडिया जगत में अपवाद है। राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अधिकांश चैनल नोएडा चैनल मंडी में हैं, या मुंबई, दिल्ली जैसे देश के बहुत बड़े शहरों मे है। लखनऊ से संचालित भारत समाचार पहला चैनल है जो राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करने में कामयाब हुआ है। धारणाओं के विपरीत धारा में अपवाद की फेहरिस्त बनाने वाले इस चैनल ने पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करते हुए विपक्ष की भूमिका निभाने का कर्त्तव्य निभाया है। दस साल कि मोदी सरकार और तकरीबन आठ साल की योगी सरकार की हर कमी और प्रत्येक खामी को ये चैनल उजागर करता है। कोविड के दौर में भारत समाचार ने जनता के दुख दर्द, मौतों और सरकारों की कमियों को जिस शिद्दत से उजागर किया था देश के किसी भी मीडिया ग्रुप ने इन कड़वी सच्चाइयों को नहीं दिखाया था।

यही सब कारण है कि प्रधानमंत्री द्वारा भारत समाचार के ब्रजेश मिश्रा को इंटरव्यू देने की चर्चाएं हो रही हैं।

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