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अपने मालिक की करतूतों की पोल खुलते देख गुंडई पर उतर आए पूर्वांचल प्रहरी के पत्रकार

संपादक अखबार मालिकों के मुनीम होते हैं और पत्रकार उसके अरदली। लेकिन शनिवार को गुवाहाटी प्रेस क्लब में जो कुछ भी हुआ वह देख कर लगा कि आज के पत्रकार अपने मालिक के गुंडे होते हैं। मालिक का आदेश हो तो वे सामने वालों का सर काट लाएं।

संपादक अखबार मालिकों के मुनीम होते हैं और पत्रकार उसके अरदली। लेकिन शनिवार को गुवाहाटी प्रेस क्लब में जो कुछ भी हुआ वह देख कर लगा कि आज के पत्रकार अपने मालिक के गुंडे होते हैं। मालिक का आदेश हो तो वे सामने वालों का सर काट लाएं।

घटना है गुवाहाटी है प्रेस क्लब की है। पूर्वोत्तर मारवाड़ी सम्मेलन ने प्रेस मीट बुलाई थी। उनकी कुछ शिकायतें थीं जीएल पब्लिकेशन के मालिक और पूर्वोत्तर के मशहूर कांट्रेक्टर घासीलाल अग्रवाल के खिलाफ। उनका कहना था कि घासीलाल और उनके पत्रकार मंच के खिलाफ पिछले कई वर्षों से लगे हुए हैं। अपने अखबारों में अनाप-शनाप छापते हैं और मंच के अधिकारियों को फोन करके पैसा और विज्ञापन मांगते हैं। समाज के ही लोगों को ब्लैक मेल  करते हैं और प्रत्येक साल एक पैसे वाले व्यापारी को अपने अखबार के माध्यम से सामाजिक रूप से हलाल करता हैं।

मंच से अपनी करतूतों की पोल खुलते देख शातिर घासीलाल ने अपने 10 से 15 पत्रकारों और चमचों को प्रेस मीट के बीच भेज दिया। वे लोग हंगामें करने लगे और मंच के अधिकारी मधुसूदन सिकारिया और ओंकारमल अग्रवाल से सवाल पूछने के बदले बहस करने लगे। अखबार के कई बाहुबली पत्रकार मंच के अधिकारियों को मंच तक पहुंच कर धमकाने लगे। लेकिन वहां मौजूद पत्रकारों के विरोध और बीच बचाव के बाद मंच के पदाधिकारी बच गए।
 
मंच के लोगों का कहना था कि घासीलाल समाज सेवा के नाम पर समाज के लोगों से अखबार की धौंस जताकर पैसा वसूलता है और मनमानी रकम न देने पर अखबार के माध्यम से उसकी बेइज्जती करता है। उन्होंने बताया कि जीएलपी सोशल सर्किल का पंजीयन भी नहीं कराया गया है और सरकार से लाखों का धन ले लिया है।

लेकिन जीएल के पत्रकार सवाल के पूछने की जगह हो हल्ला मचा रहे थे और यह कह कर विरोध कर रहे थे पूरा समाज का ठेका आप ही ने ले लिया है क्या? जीएल के पत्रकारों ने ओंकारमल पर यह सवाल भी दागा कि झारखंड में अपहरण होने के बाद मुक्त होने के लिए आपने तीन करोड़ रुपए कहां से दिए। उन्होंने बताया कि झारखंड पुलिस की मुस्तैदी के कारण वे छूटे थे और एक रुपया नहीं दिया। लेकिन यह पत्रकार महाशय हल्ला कर रहे थे आपने दिया था बताईए पैसा कहां से लाए। यह सब देख कर दूसरे पत्रकार मुग्ध थे और कुछ लोग तरस खा रहे थे कि 8 से 10 हजार वाली इस नौकरी के लिए इन बेचारों को क्या-क्या करना पड़ रहा है।

मंच के जीएस एम सिकारिया ने बताया कि पत्रकार वार्ता में जीएल के पत्रकारों को बुलाया नहीं गया था बावजूद उसके लोगों ने पहुंच कर वार्ता को बाधित किया।

 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित।

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