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मोदी जी की गौरक्षकों को फटकार केवल राजनीतिक हथकंडा!

लखनऊ 7 अगस्त, 2016 : मोदी जी की गौरक्षकों को फटकार केवल राजनीतिक हथकंडा है. यह बात एस.आर. दारापुरी, राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने प्रेस को जारी ब्यान में कही है. उन्होंने आगे कहा है पूरे देश में गौरक्षा समितियों का गठन भारतीय जनता पार्टी के तत्वाधान में ही किया गया था और उन्हें पूरा सरकारी संरक्षण दिया गया था. वास्तव में भाजपा ने गौरक्षा को अपने विरोधियों को दबाने और आतंकित करने के लिए एक हथियार के रूप में अपनाया था. इसी लिए दो साल तक पूरे देश में गौरक्षकों की गुंडागर्दी निर्वाध चलती रही.

लखनऊ 7 अगस्त, 2016 : मोदी जी की गौरक्षकों को फटकार केवल राजनीतिक हथकंडा है. यह बात एस.आर. दारापुरी, राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने प्रेस को जारी ब्यान में कही है. उन्होंने आगे कहा है पूरे देश में गौरक्षा समितियों का गठन भारतीय जनता पार्टी के तत्वाधान में ही किया गया था और उन्हें पूरा सरकारी संरक्षण दिया गया था. वास्तव में भाजपा ने गौरक्षा को अपने विरोधियों को दबाने और आतंकित करने के लिए एक हथियार के रूप में अपनाया था. इसी लिए दो साल तक पूरे देश में गौरक्षकों की गुंडागर्दी निर्वाध चलती रही.

गौरक्षा के नाम पर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, झारखण्ड, उत्तराखंड, तमिलनाडु, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में मुसलामानों और दलितों की हत्याएं की गयीं तथा उन्हें प्रताड़ित किया गया जिस पर न तो किसी सरकार ने कोई प्रभावी कार्रवाही की और न ही भाजपा के किसी नेता ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त की. इससे गौरक्षकों के हौसले बहुत बुलंद हो गए और यह धरना बनी कि यह सब भाजपा की रजामंदी से ही हो रहा है.

गुजरात में गौरक्षकों द्वारा गोहत्या के आरोप में चार दलितों की निर्मम पिटाई के मामले को लेकर दलितों द्वारा व्यक्त किये गए प्रतिरोध ने भाजपा के गौरक्षा के मुद्दे की हवा निकाल दी है. इससे गुजरात में दलितों का एक बड़ा जनांदोलन उठ खड़ा हुआ है जिस में मुसलमान भी शामिल हैं. इस प्रतिरोध की गूँज पूरे देश में सुनाई दे रही है और दलितों द्वारा इसका समर्थन किया जा रहा है. निकट भविष्य में गुजरात, उत्तर प्रदेश और अन्य कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं जिन में दलित प्रतिरोध का असर पड़ना ज़रूरी है. इसीलिए मोदी जी ने दलितों की नाराज़गी को कम करने के लिए गौरक्षकों को फटकार लगायी है और अधिकतर गौरक्षकों को अपराधी और गुंडे कहा है.

मोदी जी की गौरक्षकों को यह फटकार उनका गौरक्षा की राजनीति को  लेकर कोई नीति परिवर्तन नहीं है बल्कि यह केवल एक राजनीतिक हथकंडा है. यह भी प्रश्न उठता है कि मोदी जी को इस निष्कर्ष पर पहुँचने और अपना मुंह खोलने में दो वर्ष का समय क्यों लगा? अब पासा पलटने और चुनाव के नजदीक आने पर ही उन्हें इस गुंडागर्दी की निंदा करने की ज़रुरत क्यों महसूस हुयी?

एस.आर. दारापुरी
राष्ट्रीय प्रवक्ता,
आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट
मोबा: 9415164845
[email protected]

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