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आदिवासियों के लिए लिखने वाले इस जाँबाज़ पत्रकार को एक साल से जेल में बंद कर रखा है!

एक साल से जेल में बंद हैं रूपेश कुमार सिंह। जनपक्षधर पत्रकारिता की कीमत चुका रहे हैं साथी रूपेश कुमार सिंह के संघर्ष को सलाम…

झारखण्ड के जाबंज पत्रकार रुपेश कुमार सिंह. भगत सिंह के तेवर वाले रुपेश की UAPA में गिरफ्तारी को आज एक साल हो गए. आदिवासियों के लिए लड़ने वाले रुपेश को नक्सल मामले में जोड़ जेल ले जाया गया. बहादुर हैं रुपेश कुमार सिंह उनकी पत्नी इप्सा शताक्षी और साथी इलिका प्रिय. जिस जमाने में कोई अडानी के यहाँ एक गार्ड बनकर अपने को सुखी समझता है इस परिवार को जूनून है आदिवासियों के लिए 24 घंटे लड़ने की. लोग बाहर से मजे लेते है, तमाशबीन बने रहते है. पर्यावरण पर चर्चा करते है, ग्लोबल वार्मिंग फलाना ढिमका पर भाषण देते है लेकिन जब आदिवासियों के लिए उसी जंगल में लड़ने की बात आती है तो पीछे से निकल लेते है. असल में कोई लडता है तो वे रुपेश कुमार सिंह जैसे लोग है. आप एक दिन जेल नहीं जाना चाहते. पुलिस, हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच जाते है. लेकिन सोचिये कोई एक जेल में है वह अपने लिए नहीं दूसरे आदिवासियों के लिए. रुपेश के फ़ोन की निगरानी भी हुई थी पैगासास से. रुपेश लड़ाका है, हार नहीं मानता. न ही उनका परिवार हार मान रहा. नकली लोगों के बारे में पढ़ना लिखना बंद कीजिये. आपके हीरो थियेटर में नहीं है, वे जेलों में बंद कर दिए गए है. रुपेश कुमार सिंह को सलाम! – विक्रम नारायण सिंह


जन पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता, आदिवासी अधिकारों के लिए निरंतर संघर्षरत रूपेश कुमार सिंह की दुबारा गिरफ़्तारी को आज एक साल पूरा हो गया है. अभिव्यक्ति की आज़ादी और असहमति की आवाज़ों का गला घोंटने वाली दमनकारी सत्ता के इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुये साथी रूपेश कुमार सिंह की रिहाई की माँग करता हूँ. -भँवर मेघवंशी


11 जुलाई 2022 का दिन था जब रुपेश गिरिडीह जिले में रिपोर्टिंग के लिए गए थे, उस वक्त उन्हें ज़रा भी ख़बर नहीं थी कि उनकी ज़िंदगी एक नई करवट लेने वाली थी। गिरिडीह की रिपोर्टिंग के बाद रुपेश काफी भावुक थे क्योंकि प्रदूषण का मंज़र वहां बहुत खराब था, पूरे इलाके के लोग औद्योगिक प्रदूषण से परेशान थे, लोग बीमार पड़ रहे थे, लोगों के घरों और खेतों के बगल में कचरे का डंप था, नदी में गंदगी फैली हुई थी। इस पूरे एक साल में हमने बहुत कुछ खोया है पर जो अनुभव पाया है उसने पुलिस प्रशासन, सत्ता और हमारी न्यायिक प्रक्रिया की जटिलता को भी समझने में हमारी बहुत मदद की है। -ilik priy

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1 Comment

1 Comment

  1. Shiv shankar sarthi

    July 18, 2023 at 7:47 am

    छत्तीसगढ़ में इस तरह की जंग कमल शुक्ला, आलोक शुक्ला आदि लोग भी लड़ रहे हैं।

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