सहारा मीडिया में फिर तख्ता पलट, उपेंद्र रॉय का इस्तीफ़ा, सुमित रॉय बने नए हेड, पढ़ें सुब्रत रॉय का पत्र

‘बदलते रहो’ का नारा सुब्रत रॉय लगाते रहते हैं। इसी क्रम में अब उन्होंने सुमित रॉय को नया मीडिया हेड नियुक्त किया है। सुमित रॉय इसके पूर्व भी सहारा मीडिया के हेड रह चुके हैं।

इस बीच पता चला है कि कई महीनों से आफ़िस नहीं जा रहे उपेंद्र रॉय ने इस्तीफ़ा दे दिया है। उपेंद्र इस वक्त विदेश में हैं। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने मौखिक रूप से पहले ही बता दिया था कि अब उनका सहारा में रह पाना सम्भव नहीं है।

सहारा ग्रुप के चेयरमैन सुब्रत राय ने सहारा ग्रुप के वर्तमान कार्मिक हेड सुमित राय को सहारा मीडिया ग्रुप का फिर से हेड बना दिया है। अब तक सहारा ग्रुप के मीडिया हेड रहे उपेंद्र राय को नए मीडिया हेड सुमित राय को रिपोर्ट करने के लिए कहा है। ऐसा सुब्रत रॉय द्वारा जारी आदेश में लिखा है। पर उपेंद्र राय ने इस्तीफ़ा दे दिया है। इस तरह एक बार फिर से उपेंद्र रॉय का सहारा से नाता टूटा है।

पढ़ें सुब्रत रॉय का पत्र-



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Comments on “सहारा मीडिया में फिर तख्ता पलट, उपेंद्र रॉय का इस्तीफ़ा, सुमित रॉय बने नए हेड, पढ़ें सुब्रत रॉय का पत्र

  • अरुण श्रीवास्तव says:

    एक कहावत है ‘ खाली बनिया का करय, इ कोठली का धान उ कोठली करय’। लेकिन सहारा में यह तब भी होता रहा जब सहारा के बड़े साहब सहारा श्री ” खाली बनिया ‘ नहीं हुआ करते थे।
    राष्ट्रीय सहारा के शुरुआती दौर में ब्यूरो में रिपोर्टर रहे रणविजय सिंह को स्थानीय संपादक और जूनियर रिपोर्टर स्वतंत्र मिश्रा को मैनेजर बना दिया। हद तो तब हो गई जब एक कार्टूनिस्ट को दिल्ली का संपादक बना दिया। यही नहीं इस परम्परा को जारी रखते हुए मनोज तोमर को लखनऊ का संपादक बनाते हुए समूह संपादक तक ले गए। देहरादून में कभी दैनिक जागरण में फोटोग्राफर रहा जितेंद्र नेगी चौड़े से स्थानीय संपादक की कुर्सी पर विराजमान है।
    दरअसल अब अखबारों को संपादक नहीं एक अदद गुलाम चाहिए।

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  • Ravindra Kumar Sharma says:

    कोई भी आकर पिंजर में मांस नहीं भर सकता, सहारा को छोड़ चुके कर्मचारी , इन्वेस्टर अपना पैसा मांगने भीतर ना आ पाए इसलिए सुमित राय ने 24 घंटे गेट बंद करवा दिया और अंदर आने वाले अपने कर्मचारियों को चैक करके घुसने देता है, इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकता। टीवी चैनल दिखता नहीं, अखबार का कोई सर्कुलेशन नहीं, वैसे तो यह भी जांच का विषय है, जब सर्कुलेशन नहीं तो रील और सरकारी एड कैसे प्राप्त कर रहा है सहारा, खैर इतना भी एड नहीं पाते की दस लोगों की सेलरी दे पायें। सुमित राय वैसे सुलझे हुए व्यक्ति के रूप में जाने जाते रहे हैं, लेकिन अब टायर में इतने पंचर हो चुके हैं कि चलने योग्य ही नहीं बचा, अब तो बची खुची जमीन बेचकर हम लोगों का पैसा दे दे और राम राम जपें और कुछ पाप कम करें सहाराश्री
    पूर्व कर्तव्योगी कार्यकर्ता

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