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गुंडई के बल पर प्रबंधन ने सहारा समय राजस्थान चैनल के छह ब्यूरो जबरन खाली कराए

सहारा मीडिया से खबर है कि राजस्थान के 6 ब्यूरो को जबरन खाली करा दिया गया है। खाली कराने से पूर्व न तो संस्था ने कोई नोटिस जारी किया और न ही फोन से सूचना दी। संस्था की दो टीमें हरी मिश्रा व राजीव शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान पहुंची और आफिस जाकर सामान लेने की बात कही। ब्यूरो पैकअप से पूर्व जब ब्यूरो प्रभारियों ने लोकल कनवेंस व अन्य खर्चों का बकाया भुगतान मांगा, जो कि करीब तीन से चार लाख रूपये था, तो संस्था के अधिकारियों ने कहा कि मार्च के प्रथम सप्ताह में आपका भुगतान कर दिया जायेगा। इसके अलावा यदि आपने सामान उठाने से मना किया तो हम आपके खिलाफ सामान जबरन जप्त व चोरी का मुकदमा दर्ज करवा देंगे और संस्था से बेइज्जत करके निकाल ​देंगे। अधिकारियों ने यह भी कहा कि चुपचाप सामान पैकअप कराने में कोआपरेट करे।

सहारा मीडिया से खबर है कि राजस्थान के 6 ब्यूरो को जबरन खाली करा दिया गया है। खाली कराने से पूर्व न तो संस्था ने कोई नोटिस जारी किया और न ही फोन से सूचना दी। संस्था की दो टीमें हरी मिश्रा व राजीव शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान पहुंची और आफिस जाकर सामान लेने की बात कही। ब्यूरो पैकअप से पूर्व जब ब्यूरो प्रभारियों ने लोकल कनवेंस व अन्य खर्चों का बकाया भुगतान मांगा, जो कि करीब तीन से चार लाख रूपये था, तो संस्था के अधिकारियों ने कहा कि मार्च के प्रथम सप्ताह में आपका भुगतान कर दिया जायेगा। इसके अलावा यदि आपने सामान उठाने से मना किया तो हम आपके खिलाफ सामान जबरन जप्त व चोरी का मुकदमा दर्ज करवा देंगे और संस्था से बेइज्जत करके निकाल ​देंगे। अधिकारियों ने यह भी कहा कि चुपचाप सामान पैकअप कराने में कोआपरेट करे।

बेचारे कर्ज से परेशान और डरे ब्यूरो प्रभारियों ने पूरा सामान ट्रक में लदवा दिया। संस्था के आदेशानुसार ब्यूरो पैकअप के दौरान कैमरा व माइकआईडी तक नहीं छोड़ा। ब्यूरो पैकअप के बाद कई ब्यूरो प्रभारी जब अपने घर पहुंचे तो अपने परिवार को देखकर आंसू आ गये। पत्नी व बच्चों ने पूछा क्या हो गया तो उन्होंने पूरा हाल बताया। सही बात है, जिस परिवार के मुखिया को सैलरी के संकट से गुजरना पड़ रहा है, उस पर कंपनी की तरफ से तीन लाख रुपये का कर्जा लाद दिया जाए तो उस परिवार का दुखी होना लाजमी है। ब्यूरो पैकअप के बाद समय राजस्थान संपादक अजय शर्मा ने चलाया दुबारा चाबुक. ब्यूरो पैकअप के बाद आज सुबह समय राजस्थान संपादक अजय शर्मा ने सभी ब्यूरो प्रभारियों को कहा कि आप कल यानि 29 फरवरी को सैल्फ एक्जिट में जाकर रिजाइन कर दें और एक मार्च से स्टिगंर पोस्ट पर ज्वाइन कर लें। साथ ही कहा कि आप पहले की तरह से अपनी पीठ पर एक थैला लाद लो और उसमें एक पुराना हैंडी कैमरा रख लो और कवरेज शुरू कर दो। यह सुनकर कई रिपोर्टरों को बेहद दुख हुआ।

संपादक महोदय शायद यह भी भूल गये कि दो साल पूर्व वे नार्थ इंडिया एडीटर थे लेकिन अहंकारी किस्म की आदतों के चलते उन्हें डिमोट करते सीधा ही जयपुर ब्यूरो चीफ बना दिया गया। इन पूरे दो सालों तक वे चुपचाप बिना काम किये सैलरी व अन्य सुविधाएं लेते रहे। लास्ट के समय में तो इनकी छुट्टी होना तय हो गया था, लेकिन उपेन्द्र राय के आने से इनकी चांदी हो गई। लेकिन बेचारे रिपोर्टरों का संकट कौन दूर करेगा, यह बड़ा सवाल है। किसी ने सोचा न था कि उपेन्द्र राय कार्यकाल में ऐसे दिन देखने को मिलेंगे। क्या संस्था ब्यूरो का बकाया भुगतान 10 मार्च से पहले देगी? क्या संपादक अजय शर्मा पर उपेन्द्र राय लगाम लगाएंगे? इन दोनों बातों का फैसला आने वाले दिन तय करेंगे। फिल्हाल लावारिस ब्यूरो प्रभारी नोयडा जाने की तैयारी कर रहे हैं।

राजस्थान के पीड़ित मीडियाकर्मियों द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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