राजीव शर्मा-
आज (13.09.2022) का दैनिक भास्कर पढ़ते हुए एक ख़बर का शीर्षक चौंकानेवाला लगा। अख़बार के जयपुर संस्करण में छठे पृष्ठ पर ख़बर थी- ‘दुख में संभल; उपलब्ध कराते हैं निशुल्क टेंट, अब तक 300 को कराया।’


हालांकि ख़बर में जिस संस्था का ज़िक्र किया गया है, वह बहुत अच्छा काम कर रही है।
ख़बर में यह बताया गया है कि संस्था ज़रूरतमंद लोगों को टेंट से संबंधित चीज़ें उपलब्ध कराती है, लेकिन शीर्षक में ‘संभल’ शब्द ग़लत है। यहाँ सही शब्द ‘संबल’ होगा, जिसका अर्थ होता है- ‘सहारा, सहायक वस्तु’। इस शब्द का उपयोग विशेष रूप से कठिन परिस्थितियों में दिए गए सहारे के लिए किया जाता है।
उदाहरण- भूकंप पीड़ितों के लिए भोजन की व्यवस्था से उन्हें बड़ा संबल मिला है।
‘सँभल’ शब्द इससे बिल्कुल अलग है। सँभलना का अर्थ होता है- ‘सावधान होना, बिगड़ी स्थिति को ठीक करना’।
उदाहरण- सँभलकर चलो, यह रास्ता आसान नहीं है।
इस तरह ख़बर के शीर्षक में ‘संभल’ शब्द कहीं भी नहीं जुड़ रहा।
.. राजीव शर्मा ..
जयपुर
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अजय कुमार मण्डलोई
September 15, 2022 at 11:09 am
महोदय,
हिंदी भाषा के अखबारों मे मानक एवं शुद्ध हिन्दी भाषा का स्तर गिरता जा रहा है। कई हिंदी शब्दों के स्थान पर अंग्रेजी के ही शब्द छाप दिए जाने लगे हैं। पिछले 10 15 वर्षों से इनका चलन ज्यादा बढ़ गया है। मुझे एक शासकीय स्कूल की प्राचार्या ने बताया कि उनके शिक्षकों को भी अब ठीक ढंग से हिंदी पढ़ाना नहीं आती है। मैं जब १९९८-२००७ तक नई दुनिया का पत्रकार था उस समय शुद्ध हिंदी के शब्द सीखने के लिए छात्र एवं अन्य लोग नईदुनिया पर ही विश्वास करते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। ऐसे में आने वाली पीढ़ी शुद्ध एवं मानक हिंदी कैसे सीखेगी ? इसलिए हिंदी माध्यम और हिंदी भाषा से जुड़े सभी अखबारों के लिए भारतीय प्रेस परिषद द्वारा शुद्ध हिंदी लेखन करने को लेकर दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। वहीं हिंदी अखबारों के संपादकों एवं डेस्क प्रभारियों को हिंदी का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए तभी हिंदी भाषा बचेगी अन्यथा अनावश्यक एवं आवश्यकता नहीं होने पर भी एवं बेफिजूल के खिचड़ी शब्दों के प्रयोग करने एवं हिंदी भाषा लिखने में गलतियां करने के कारण इसका धीरे धीरे पतन होने लगेगा अतः इसके लिए संबंधित जिम्मेदारों के द्वारा प्रयास किया जाना आवश्यक है। वहीं प्रमुख हिंदी भाषी प्रदेश उत्तर प्रदेश से जुड़े होने के बावजूद एक प्रमुख समाचार पत्र दैनिक जागरण समूह द्वारा जब से हिंदी भाषा और अपनी संपादकीय गुणवत्ता के लिए मशहूर रहे मध्य प्रदेश के प्रमुख हिन्दी दैनिक नई दुनिया का अधिग्रहण किया गया है तभी से प्रावधान शब्द को हमेशा प्रविधान लिखा जाने लगा है और भी कई गलतियां होती है लेकिन इस शब्द की अमूमन रोज़ रोज़ गलती देखने मे आती है इससे दुःख होता है। मैं स्वयं पिछले २४ वर्ष से पत्रकारिता कर रहा हूं।