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सुख-दुख

नवभारत टाइम्स के पूर्व संपादक उपेंद्र प्रसाद का निधन

विष्णु गुप्त-

नवभारत टाइम्स पटना के पूर्व संपादक, नवभारत टाइम्स दिल्ली के सहायक संपादक उपेंद्र प्रसाद जी का आज दिल्ली के बत्रा अस्पताल में निधन हो गया।

उपेंद्र प्रसाद जी 58 वर्ष के थे। वे हिंदी पत्रकारिता के भीष्म पितामह राजेंद्र माथुर के प्रिय शिष्य थे। मंडल और कमंडल काल में उनकी लेखनी धमाल मचाती थी। लालू, शरद यादव, नीतीश और मुलायम सिंह यादव जैसे नेता इनके प्रशंसक थे।

संकट काल में इनके साथ बेईमानी हुई, साज़िश से इन्हे हाशिए पर धकेल दिया गया , फिर भी इन्होंने अपनी वैचारिक पत्रकारिता जारी रखी।

ऐसी महान आत्मा और विभूति को नमन और विनम्र श्रद्धांजलि अंतिम संस्कार आज चार बजे लोधी रोड दिल्ली शमशान घाट पर होगा।


अवधेश कुमार-

आज सुबह मंदिर में वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र प्रसाद जी के देहांत की सूचना वरिष्ठ पत्रकार विष्णु गुप्त द्वारा मिली। इस सूचना ने कुछ क्षण के लिए स्तब्ध कर दिया। उपेंद्र प्रसाद जी नवभारत टाइम्स दिल्ली में सहायक संपादक तथा पटना में उप स्थानीय संपादक का दायित्व निर्वहन कर चुके थे।

मंडलवादी नेताओं के साथ उनके अच्छे संबंध थे और कई नेता उनसे सलाह भी लेते थे। सीताराम केसरी से उनके घनिष्ठ संबंध थे। मेरा उनका परिचय 3 दशक पुराना रहा। अच्छे संबंध रहे। अत्यंत ही विश्वास के संबंध हमारे बीच रहे। जब जैन टीवी में मेरा स्थाई जाना होता था तो वहां अक्सर मुलाकात होती थी।

वहां हम लोगों का बहस का एक समूह जैसा बन गया था। दिलीप सिंह, उपेंद्र प्रसाद, मैं ,पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और कभी-कभी भूपेंद्र धर्मानी आदि अनेक मुद्दों पर बहस करते, एक दूसरे से लड़ते थे। पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने अपने सारे पुराने मित्रों को छोड़ दिया। जब आवश्यकता होती है तो स्वयं किसी को फोन कर लेते हैं अन्यथा वे किसी का फोन तक नहीं उठाते, इसलिए उनको बताने का कोई अर्थ नहीं है।

मैंने मंदिर से ही दिलीप जी को व्हाट्सएप किया और उनका कॉल बैक आ गया। अभी हम लोग साथ उनके घर जाने वाले हैं। बहुत सारी स्मृतियां हैं। उनके जाने का समय बिल्कुल नहीं था। मेरी उम्र के ही थे। भगवान के विधान पर अपना कोई बस नहीं।

इतने मित्र छोड़कर चले गए कि लगता है जैसे धीरे धीरे हर मामले में अकेला होता जा रहा हूं। कह सकता हूं कि उपेंद्र जी का अध्ययन काफी गहरा था। अनेक विषयों पर उनकी पकड़ थी। पत्रकारिता में उनकी तरह गहराई से अध्ययन करने वाले और जानकारी रखने वाले लोगों की काफी कमी हो गई है। हालांकि लंबे समय से पत्रकारिता की मुख्यधारा में वे कहीं नहीं थे। मेरी भाव भीनी श्रद्धांजलि।

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