संकिसा स्तूप के संबंध में झूठी और भ्रामक खबरें प्रकाशित करता है दैनिक जागरण, बुद्ध के अनुयायियों में रोष

फर्रूखाबाद। विश्व विख्यात कहे जाने वाले दैनिक जागरण, कानपुर के समाचार पत्र ने झूठी खबर प्रकाशित कर विश्व गुरू भगवान बुद्ध व उनके समर्थकों का घोर अपमान किया है। इससे बौद्धों में जबरदस्त रोष व्याप्त हो गया है। झूठी खबर का खंडन प्रकाशित न करने पर बौद्धों ने दैनिक जागरण के विरूद्ध मानहानि का मुकदमा दायर करने की रणनीति बनाई है। संकिसा मुक्ति संघर्ष समिति के संयोजक कामरेड कर्मवीर शाक्य ने दैनिक जागरण में प्रकाशित झूठी खबरों पर नाराजगी जाहिर करते हुये बताया कि आगाह करने के बाबजूद भी दैनिक जागरण ने बीते दिनों संकिसा महोत्सव सम्बंधी समाचार में भगवान बुद्ध के स्तूप को टीला एवं स्तूप परिसर में सम्राट अशोक महान के द्वारा निर्मित कराये गये राष्ट्रीय चिन्ह स्तम्भ को हाथी मंदिर बताया है।

शाक्य ने आरोप लगाया कि सनातन धर्म की कट्टर मानसिकता वाले स्थानीय पत्रकार अपने धर्म के लोगों को खुश करने एवं बौद्धों को अपमानित करने के लिये जानबूझ कर फर्जी खबर छापते हैं। दैनिक जागरण ने संकिसा प्रकरण के मामले में कभी भी निष्पक्ष समाचार का प्रकाशन नहीं किया। संकिसा स्तूप परिसर केन्द्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन है। संकिसा परिसर में पुरातत्व विभाग के कई बोर्ड भी लगे हैं। पुरातत्व विभाग ने स्तूप का जीर्णोद्वार परिसर की सुरक्षा के लिये बाउंड्री का निर्माण करवाकर आगरा निवासी जैनुद्धीन चैकीदार को तैनात किया है। तहसीलदार की रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि भगवान बुद्ध स्तूप पर संकिसा गांव के कुछ गुंडो ने 2003 से पूर्व कथित विसारी देवी मंदिर का निर्माण कराया है।

हिन्दू धर्म में कही भी विसारी देवी का उल्लेख नहीं है और न ही किवदंतियां प्रकाश में आई है। रूपयों की कमाई करने के लिये विसारी देवी के मेले का भी आयोजन किया जाता है। कथित विसारी देवी मंदिर की ओर से शिव मंदिर रानीघाट फतेहगढ़ के दंडा स्वामी परमानंद सरस्वती ने वर्ष 1994 में सिविल जज की अदालत में पुरातत्व विभाग दिल्ली के महानिदेशक, जिलाधिकारी फर्रूखाबाद, कामरेड कर्मवीर शाक्य, डॉ. मुंशीलाल शाक्य आदि के विरूद्ध मुकदमा नम्बर 572 दायर किया था। अदालत ने इस मुकदमें में स्थगन आदेश जारी कर दिया था। जिसको खारिज किये जाने पर अपर जिला जज की अदालत में रिवीजन संख्या 55/12 दायर की गई।

न्यायाधीश महेन्द्र प्रताप चैधरी ने 4 जनवरी 2013 को पुनरीक्षण वाद को व्यय सहित निरस्त कर दिया है। दैनिक जागरण ने स्टे के साथ ही उसकी अपील खारिज हो जाने का भी समाचार प्रकाशित नहीं किया। जिससे आम जनता को पता चल सके कि संकिसा की सच्चाई क्या है। दैनिक जागरण ने महोत्सव के दौरान अशोक स्तम्भ की गैरजानकार बौद्ध समर्थकों से पूजा के नाम पर रूपये चढ़वा कर लूटने बाले वेदप्रकाश गिरी को पुजारी दर्शा कर भी झूठा समाचार प्रकाशित किया है। स्तूप परिसर में किसी भी सनातन धर्मी को पूजा कराने का अधिकार नहीं है। दैनिक जागरण ने महोत्सव के दिन ही संकिसा गांव से गुजरने के दौरान एटा गंजडुडवारा के बौद्ध समर्थक पूर्व सैनिक युद्धिस्टर शाक्य व उनके शिक्षक पुत्र पंकज कुमार की  पिटाई के दौरान लूटे गये मोबाइल व नगदी का भी समाचार में उल्लेख नहीं किया।

बौद्ध समर्थको ने दैनिक जागरण के सम्पादकीय निदेशक महेन्द्र मोहन एवं प्रधान सम्पादक संजय गुप्त तथा उत्तर प्रदेश के सम्पादक दिलीप अवस्थी को राय दी है कि वह झूठे प्रकाशित किये गये समाचारों का निष्पक्षता के साथ जांच कराकर उसका खण्डन प्रकाशित करवायें। ताकि दैनिक जागरण की साख के साथ ही भगवान बुद्ध व उनके समर्थको का मनोबल बरकरार रहे।

 

आनंदभान शाक्य। 

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