बहुत घटिया सोच वाले पत्रकार काम करते हैं पत्रिका डॉट कॉम में, देखें ये शीर्षक

Advocate Jyoti Kumari-

कितना संवेदनहीन और महिला विरोधी शीर्षक है… पूरी स्टोरी ही महिला विरोधी लेखन की मिसाल है…

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नाम ग़लत… महिला का सरनेम यादव है तो निश्चित रूप से यादव सरनेम वाले की पत्नी होगी इसलिए पति का नाम सुभाष यादव लिख दिया है… जबकि सच्चाई ये है कि सुभाष खुद को सुभाष सिंह सुमन लिखते हैं और वे जाति से क्षत्रिय हैं…

महिला की योग्यता और काम की अधूरी जानकारी… पीएचडी कर रही थी महिला और पति पत्रकार…. पर वह महिला भी पत्रकार थी, आंदोलनकर्मी थी, इसकी कहीं चर्चा तक नहीं… धन्य हैं ये मीडिया संस्थान… इन लोगों को थोड़ी भी ट्रेनिंग नहीं दी जाती क्या कि खबर लिखते वक्त न्यूनतम संवेदनशीलता का दामन थामे रहें…


कोई भी गुस्सा बेटी की फिक्र से बड़ा कैसे हो सकता है… लेकिन हुआ और श्वेता यादव चली गई। सुभाष को भी जानती हूं श्वेता को जानने के पहले से। हर किसी की मदद को तैयार रहने वाला संवेदनशील इंसान है। दोनों अच्छा कमा रहे थे। लव मैरिज की थी। इतनी प्यारी बेटी। प्यार पैसा सब था। श्वेता यादव बहुत हिम्मत वाली लड़की भी थी। फिर कहाँ क्या कमी रह गई या चूक हो गई समझ में नहीं आ रहा। खबर ने हिला दिया है मुझे। श्रद्धांजलि श्वेता। सुभाष और बिटकुन खुद को संभाल पाएं।



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