Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

उत्तर प्रदेश

बीजेपी की हिम्मत नहीं हो रही फूलपुर लोकसभा सीट से केशव मौर्या का इस्तीफा दिलाने की

सपा-बसपा में टूट से चढ़ा सियासी पारा , बीजेपी ने मनोवैज्ञानिक बढ़त ले ली

अजय कुमार, लखनऊ

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तीन दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरे पर लखनऊ पहुंच भी नहीं पाये थे और यूपी की सियाासत में भूचाल आ गया। सपा के तीन और बसपा के एक एमएलसी ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। सपा-बसपा में टूट ने उन राजनैतिक पंडितों की नींद उड़ा दी जो अपने आप को सियासत की दुनिया का बड़ा खिलाड़ी समझते थे। सपा-बसपा आलाकमान को तो खबर नहीं लगी ही, मीडिया भी इस टूट से सन्न रह गया। बसपा से इस्तीफा देने वाले पूर्व मंत्री और विधान परिषद सदस्य जयवीर सिंह ने तो उसी दिन स्वामी प्रसाद र्मार्या के सामने बीजेपी की सदस्यता भी ग्रहण कर लीक, जिस दिन पार्टी से इस्तीफा दिया था।

सपा-बसपा में टूट से चढ़ा सियासी पारा , बीजेपी ने मनोवैज्ञानिक बढ़त ले ली

अजय कुमार, लखनऊ

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तीन दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरे पर लखनऊ पहुंच भी नहीं पाये थे और यूपी की सियाासत में भूचाल आ गया। सपा के तीन और बसपा के एक एमएलसी ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। सपा-बसपा में टूट ने उन राजनैतिक पंडितों की नींद उड़ा दी जो अपने आप को सियासत की दुनिया का बड़ा खिलाड़ी समझते थे। सपा-बसपा आलाकमान को तो खबर नहीं लगी ही, मीडिया भी इस टूट से सन्न रह गया। बसपा से इस्तीफा देने वाले पूर्व मंत्री और विधान परिषद सदस्य जयवीर सिंह ने तो उसी दिन स्वामी प्रसाद र्मार्या के सामने बीजेपी की सदस्यता भी ग्रहण कर लीक, जिस दिन पार्टी से इस्तीफा दिया था।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी कहे जाने वाले और लखनऊ में अवैध निर्माण तथा गलत वसीयत के बल पर सपा सरकार से मुआवजा लेने के आरोपी बुक्कल नवाब और निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के करीबी सपा एमएलसी यशवंत सिंह, मुलायम के करीबी और अखिलेश यादव द्वारा मेट्रो सलाहाकार के पद से हटाये गगे मधुकर जेटली सहित बसपा एमएलसी जयवीर सिंह के इस्तीफ्रे की बात सामने आई है।

यह सपा-बसपा के लिये करारा झटका और कांग्रेस के लिये गुजरात के बाद यूपी में भी खतरे की घंटी है। इस्तीफा देने वाले सभी नेताओं ने मोदी और योगी की तारीफ के कसीदे पढ़कर यह जगजाहिर कर दिया है कि वह सब जल्द ही भगवा रंग में रंग सकते हैं। आने वाले दिनों में इस कड़ी में कई और नाम  शामिल होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। सपा के तीन विधायकों के भी भाजपाई खेमे में शामिल होने की पूरी संभावना है, जिसको लेकर सपा आलाकमान चौकान्ना हो गया है। सपा-बसपा में टूट से बीजेपी को मनोवैज्ञानिक बढ़त तो मिलेगी ही, इसके अलावा विधान परिषद के चुनावी गणित पर भी इसका असर पड़ेगा।

उक्त इस्तीफों से यूपी विधान परिषद में चार सीटें खाली होंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा,मंत्री स्वतंत्र देव, मोहसिन रजा और उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या  को 19 सितंबर से पहले विधान मंडल की सदस्यता लेनी है। इन सीटों पर अब बीजेपी चार शीर्ष नेताओं की एंट्री हो सकती है, जिसमें योगी ओर दिनेश शर्मा का नाम सबसे अधिक चर्चा में है. हां, उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या को फूलपूर संसदीय सीट से इस्तीफा दिलाने की हिम्मत शायद ही बीजेपी आलाकमान जुटा पाये, ऐसे में उनको तो दिल्ली जाना ही पड़ सकता है।

समाजवादी पार्टी में यह टूट उस समय आई है, जब अखिलेश चारों तरफ से घिरे हुए थे। बाप-चचा से उनकी अनबन जगजाहिर है तो पार्टी के कई पुराने नेताओं को भी अखिलेश की सियासत समझ में नहीं आ रही है। अखिलेश द्वारा पिता मुलायम को हासिये पर डालने के बाद सपा से पूर्व में भी कई नेतओं अम्बिका चौधरी जैसे नेताओं का भी मोहभंग हो चुका है। अंबिका चौधरी के सपा छोड़ने पर मुलायम सिंह भी बेहद दुखी हुए थे और पार्टी में उनके योगदान की सार्वजनिक मंच से सराहना भी की थी।

दरअसल, पुराने समाजवादियों को मलाल इस बात का है कि सत्ता गंवाने के बाद अखिलेश अभी तक न तो कोई आंदोलन खड़ा कर पायें हैं और न भविष्य की सियासत अपने दम पर आगे ले जाने  की हिम्मत जुटा पा रहे हैं, जबकि ऐसी ही विषम परिस्थितियों से मुलायम सिंह यादव कई बार पार्टी को उबार कर बाहर ले जाने में सक्षम रहे थे। 1991 में राम लहर में सपा का बुरी तरह से सफाया हा गया था, उसके पास मात्र 04 सांसद और 19 विचाायक बचे थे, लेकिन मुलायम की नेतृत्व क्षमता पर कभी किसी ने इस तरह से उंगली नहीं उठाई थी, जैसी आज अखिलेश पर उठाई जा रही है। मुलायम सिंह और चचा शिवपाल से बेअदबी के बाद चीन के पक्ष में अखिलेश के हाल के बयान को पार्टी के कई दिग्गज उनकी अपरिपक्त्ता से जोड़ कर देख रहे हैं। सपा नेताओं के अचानक पार्टी छोड़ने को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि कुछ लोग होते हैं मौकापरस्त, फायदे के लिए बदल लेते हैं पाला। इससे पार्टी पर असर नहीं पड़ने वाला है।

बात बहुजन समाज पार्टी में टूट की कि जाये तो पार्टी में टूट का पुराना इतिहास रहा है। आज की तारीख में बसपा में कोई ऐसा नेता नहीं बचा है जिसका इतिहास कांशीराम के साथ बसपा मूवमेंट से जुड़ा रहा हो। विधान सभा चुनाव के समय तो बसपा में इस्तीफों की बाढ़ ही आ गई थी। स्वामी प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक से लेकर पार्टी छोड़ने वालों की लम्बी लिस्ट थी। इससे पहले भी एक बार बीएसपी में जबर्दस्त फाड़ हुआ था,जब बीजेपी-बसपा गठबंधन की सरकार चल रही थी। उस समय पहले मायावती छहः माह के लिये मुख्यमंत्री बनीं थी,लेकिन जब छहः महीने बाद बीजेपी को सत्ता सौंपने की बारी आई तो मायावती ने हाथ खड़े कर लिये। इसके बाद  बड़ी संख्या में विधायकों ने बसपा छोड़ कर कल्याण सिंह सरकार को समर्थन दिया था।

कांग्रेस ने पूरे घटनाक्रम को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि बीजेपी के दिग्गज नेता और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्या चुनाव लड़कर विधायक बनने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, इसीलिये बैक डोर से विधायक बनने के लिये यह सब कारनामा हो रहा है। उधर, बीजेपी ने इन इस्तीफों का बीजेपी से संबंध होने से इंकार किया है. पार्टी नेता और यूपी सरकार में मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि इन इस्तीफों के बारे में अखिलेश यादव ही जवाब दे सकते हैं, ये उनकी पार्टी का अंदरूनी मामला है।

लेखक अजय कुमार लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं.

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन