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सुख-दुख

सुब्रत राय, निर्मल सिंह भंगू, पीके तिवारी भी बैंकों और जनता को जमकर लूट चुके हैं

सरकारी बैंकें इस समय एनपीए को लेकर परेशान हैं. रिजर्व बैंक भी इस मामले में बार-बार चिंता जाहिर कर चुका है. वित्तमंत्रालय इस समय से निपटने के लिए उपाय सोच रहा है. लेकिन आखिर ये एनपीए है क्या? दरअसल बैंकिंग सिस्टम जब किसी कर्ज के ब्याज को 30 दिन के अंदर भुगतान नहीं किया जाता है तो बैकें उसे नॉ़न-परफॉर्मिंग असेट्स मान लेती हैं. लेकिन ये पैसा होता किसका है? ये रकम होती है उन करदाताओं की जो अपनी गाढ़ी कमाई का हिस्सा देश के खजाने में जमा करते हैं. लेकिन सिर्फ बैंकों से कर्ज लेकर ही नहीं और भी कई बिजनेसमैन हैं जो या तो वित्तीय संस्थानों से या फिर जनता को धोखे में रखकर उनका पैसा खा जाते हैं. फिर पीड़ित या तो कोर्ट के चक्कर लगाते हैं या फिर मन मसोस कर रह जाते हैं.

<p>सरकारी बैंकें इस समय एनपीए को लेकर परेशान हैं. रिजर्व बैंक भी इस मामले में बार-बार चिंता जाहिर कर चुका है. वित्तमंत्रालय इस समय से निपटने के लिए उपाय सोच रहा है. लेकिन आखिर ये एनपीए है क्या? दरअसल बैंकिंग सिस्टम जब किसी कर्ज के ब्याज को 30 दिन के अंदर भुगतान नहीं किया जाता है तो बैकें उसे नॉ़न-परफॉर्मिंग असेट्स मान लेती हैं. लेकिन ये पैसा होता किसका है? ये रकम होती है उन करदाताओं की जो अपनी गाढ़ी कमाई का हिस्सा देश के खजाने में जमा करते हैं. लेकिन सिर्फ बैंकों से कर्ज लेकर ही नहीं और भी कई बिजनेसमैन हैं जो या तो वित्तीय संस्थानों से या फिर जनता को धोखे में रखकर उनका पैसा खा जाते हैं. फिर पीड़ित या तो कोर्ट के चक्कर लगाते हैं या फिर मन मसोस कर रह जाते हैं.</p>

सरकारी बैंकें इस समय एनपीए को लेकर परेशान हैं. रिजर्व बैंक भी इस मामले में बार-बार चिंता जाहिर कर चुका है. वित्तमंत्रालय इस समय से निपटने के लिए उपाय सोच रहा है. लेकिन आखिर ये एनपीए है क्या? दरअसल बैंकिंग सिस्टम जब किसी कर्ज के ब्याज को 30 दिन के अंदर भुगतान नहीं किया जाता है तो बैकें उसे नॉ़न-परफॉर्मिंग असेट्स मान लेती हैं. लेकिन ये पैसा होता किसका है? ये रकम होती है उन करदाताओं की जो अपनी गाढ़ी कमाई का हिस्सा देश के खजाने में जमा करते हैं. लेकिन सिर्फ बैंकों से कर्ज लेकर ही नहीं और भी कई बिजनेसमैन हैं जो या तो वित्तीय संस्थानों से या फिर जनता को धोखे में रखकर उनका पैसा खा जाते हैं. फिर पीड़ित या तो कोर्ट के चक्कर लगाते हैं या फिर मन मसोस कर रह जाते हैं.

अकेले विजय माल्या के खिलाफ ही सरकारी बैंकों ने सुप्रीमकोर्ट में शिकायत की है वह उनका पैसा दबाए बैठें हैं. विजय माल्या के ऊपर 7,800 करोड़ का रुपए का कर्ज है. लेकिन उनकी कंपनी किंगफिशर के कर्मचारी दाने-दाने को मोहताज हैं. लेकिन अय्याशी और शानो-शौकत के लिए मशहूर माल्या अपने जन्मदिन की पार्टी में करोड़ो रुपए खर्च कर दिए. इसके बाद दूसरे नंबर पर आते हैं सहारा इंडिया परिवार के मालिक सुब्रतो राय सहारा. चिटफंड से बिजनेस की शुरुआत करने वाले सुब्रतो राय जनता की गाढ़ी कमाई दबा रखी है. जिसके लिए वो दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं. सुप्रीमकोर्ट ने उनकी जमानत के लिए 10 हजार करोड़ रुपए जमा करने की शर्त रखी है. सेबी का मानना है कि सहारा पर 24 हजार करोड़ रुपए की देनदारी है. सुब्रतो राय ने फाइनेंस, होटल, मीडिया, रियल इस्टेट की कंपनियां बना रखी हैं. उनके पास हजारों करोड़ की चल-अचल संपत्ति है. लंदन और न्यूयार्क जैसे शहरों में उनको होटल है. लेकिन जनता के पैसे को वापस करने के नाम पर वह रोज नए बहाने बना रहे हैं. सुब्रतो राय भी अपने शान-शौकत के लिए जाते हैं.

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पर्ल्स समूह के मालिक निर्मल सिंह भंगू का भी काम चिटफंड से शुरू हुआ था. आज उनके पास हजारों करोड़ की संपत्ति है. हालांकि उनको भी जेल भेज दिया गया है. लेकिन जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा वापस कब मिलेगा इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है. सेबी से बिना इजाजत लिए निर्मल सिंह ने रियल इस्टेट में पैसा लगाने के लिए पोंजी स्कीम के जरिए 5 करोड़ निवेशकों लूटा. उनसे 45 हजार करोड़ रुपए इकट्ठा कर लिए. इस दौलत को लेकर वह आस्ट्रेलिया में कारोबार करने लगे.

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चिटफंड कंपनी शारदा के घोटाले ने तो कई राजनेताओं की नींद उड़ा रखी है. इसमें करीब 2,460 करोड़ हुआ है. इस कंपनी के चेयरमैन सुदीप्त सेन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. इस घोटाले में शारदा ग्रुप की 3 स्कीमों के जरिए हेराऱफेरी की गई है. ये खुलासा समूह की समरी रिपोर्ट से हुआ है. इसमें 80 फीसद निवेशकों को आजतक पैसा वापस नहीं किया गया है. महुआ प्राइवेट लिमिटेड के मालिक पीके तिवारी की कहानी भी ऐसे ही कुछ है. बैंको को धोखे में रखकर तिवारी ने 1500 करोड़ रुपए का कर्ज ले लिया. बैंकों की शिकायत के बाद उनको जेल भेज दिया गया. पीके तिवारी पर आयकर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामले भी चल रहे हैं.

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