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पत्रिका के संपादकों और मैनेजरों में मजीठिया के लिए केस करने वालों को तोड़ने की होड़

खबर है कि राजस्थान पत्रिका उदयपुर के मैनेजर नायर ने मजीठिया वेज बोर्ड के लिए केस करने वाले पांच कर्मचारियो को तोड़ लिया है. अखबार मालिक निहार कोठारी अपने सभी मैनेजरों और संपादकों पर दबाव डाले हुए हैं कि वे मजीठिया के लिए केस करने वाले कर्मियों को किसी तरह समझाएं और पटाएं. संपादकीय प्रभारी राजेश कसेरा पर भी यही दबाव है. सूत्रों के मुताबिक कसेरा को तीन बार मुख्यालय बुलाकर मजीठिया की मांग करने वालों को अपने पाले में करने के लिए दबाव बनाया गया.

खबर है कि राजस्थान पत्रिका उदयपुर के मैनेजर नायर ने मजीठिया वेज बोर्ड के लिए केस करने वाले पांच कर्मचारियो को तोड़ लिया है. अखबार मालिक निहार कोठारी अपने सभी मैनेजरों और संपादकों पर दबाव डाले हुए हैं कि वे मजीठिया के लिए केस करने वाले कर्मियों को किसी तरह समझाएं और पटाएं. संपादकीय प्रभारी राजेश कसेरा पर भी यही दबाव है. सूत्रों के मुताबिक कसेरा को तीन बार मुख्यालय बुलाकर मजीठिया की मांग करने वालों को अपने पाले में करने के लिए दबाव बनाया गया.

डेस्क इंचार्ज महेश ओझा को तोडऩे का श्रेय हरीश पराशर को जाता है क्योंकि चेन्नई तबालदा करने की सूचना उन्होंने ही दी थी. ओझा के रिक्वेस्ट करने पर पराशर ने अहसान जताते हुए फिलहाल तबादला रुकवा दिया. मुकेश जैन को चीफ रिपोर्टर आनन्द शर्मा ने तोड़ा. चर्चा है कि कसेरा सिटी डेस्क इन्चार्ज विकास बोकडिय़ा को तोडऩे के लिए उसको सस्पेंड करवा दिया. अब बोकडिया ने नोटिसों का ऐसा कानूनी जवाब दिया है कि प्रबंधन फंसता नजर आ रहा है. मैनेजर नायर ने तीन चपरासियों अम्बालाल, लक्ष्मीलाल व दलीचंद को तोड़ऩे में सफलता हासिल की.

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