मजीठिया न देने पर वर्कर्स यूनियन ने इंडियन एक्सप्रेस प्रबंधन को सुप्रीम कोर्ट में घसीटा

निर्भीक पत्रकारिता का पाठ पढ़ाने वाले इंडियन एक्सप्रेस समूह ने सुप्रीम कोर्ट को आदेश के बावजूद अपने कमर्चारियों को मजीठिया सिफारिशों के अनुरूप नया वेतनमान नहीं दिया है। इसको लेकर इंडियन एक्सप्रेस यूनियन ने मई में प्रबंधन को कानूनी नोटिस थमाया था और आइटीओ स्थित इंडियन एक्सप्रेस दफ्तर के बाहर धरना-प्रदर्शन-भूख हड़ताल भी की थी। इस सबके बाद भी प्रबंधन ने कोई सकारात्मक पहल नहीं की।

प्रबंधन के रवय्ये से क्षुब्ध दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस वर्कर्स यूनियन ने सुप्रीम कोर्ट में, कोर्ट के फैसले को न मानने पर एक्सप्रेस समूह पर अवमानना का केस कर दिया। मामले की सुनवाई 8 सितंबर को हुई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इंडियन एक्सप्रेस प्रबंधन से कहा कि मामले की अगली सुनवाई तक उसे यूनियन से जो भी बात करनी है कर ले। अगर दोनो पार्टियां किसी समझौते पर नहीं पहुंचती हैं तो फिर कोर्ट इसकी सुनवाई करेगा। मामले की अगली सुनवाई 27 सितंबर को है।

कोर्ट के आदेश के अनुरूप एक्सप्रेस के नोएडा कार्यालय में प्रबंधन की ओर से यूनियन से बात करने के लिए एक नोटिस चस्पा किया गया है। वहां के प्रबंधक आरसी मलहोत्रा की ख्याती कर्मचारियों के बीच वेज बोर्ड के ‘दुश्मन’ की है। कहते हैं कि मलहोत्रा ने ही टाइम्स ऑफ इंडिया में वेज बोर्ड को खत्म किया था। मलहोत्रा ने दिल्ली/नोएडा और चण्डीगढ़ को छोड़ कर एक्सप्रेस लि. को अलग-अलग समूहों में बांट दिया है। उनकी ही शह पर एक्सप्रेस में ये खेल खेला जा रहा है। मलहोत्रा के निर्णयों को प्रबंधन द्वारा दिए जा रहे समर्थन से कर्मचारियों में काफी रोष है।

 

भड़ास को भेजे गए पत्र पर आधारित।



भड़ास व्हाट्सअप ग्रुप- BWG-10

भड़ास का ऐसे करें भला- Donate






भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*

code