यूपी प्रेस क्लब पर सरकारी ताला लगाने की तैयारी, एलडीए ने कराया मुकदमा

लखनऊ से एक बड़ी खबर आ रही है. यूपी प्रेस क्लब पर प्रदेश सरकार ने ताला लगाने की तैयारी कर ली है. इस बाबत यूपी प्रेस क्लब के खिलाफ एलडीए उर्फ लखनऊ विकास प्राधिकरण ने पीपी एक्ट यानि लोक संपत्ति अधिनियम में मुकदमा लिखा दिया है. एलडीए का आरोप है कि 1978 के बाद से एलडीए में न तो प्रेस क्लब का वार्षिक किराया जमा किया गया है और न ही एकमुश्त नजराना जो कि करीब नौ लाख रुपये तय किया गया था, वह ही जमा हुआ है. एलडीए ने तय किया है कि प्रेस क्लब से इस भूमि को खाली करवाया जाएगा.

दैनिक जागरण, लखनऊ संस्करण में छपी ऋषि मिश्रा की खबर के मुताबिक एलडीए के नजूल अधिकारी विश्वभूषण मिश्र का कहना है कि हाईकोर्ट में दायर की गई एक जनहित याचिका में प्राधिकरण से इस संबंध में कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की गई थी. इसके बाद में प्राधिकरण ने प्रेस क्लब की पत्रावली की जांच करवाई. तब पता चला कि साल 1958 में ये पट्टा एक रुपये पर प्रेस क्लब को किया गया था जो अगले दस साल तक जारी रहा. वर्ष 1968 में एक बार फिर से इस पट्टे को 10 साल के लिए बढ़ाया गया.

वर्ष 1978 में ये पट्टा समाप्त हो गया. इसके बाद प्रेस क्लब और एलडीए के बीच पत्राचार हुआ जिसमें प्राधिकरण ने प्रेस क्लब के सामने करीब नौ लाख रुपये एकमुश्त नजराना और 22 हजार रुपये सालाना किराया तय किया था. मगर प्रेस क्लब की ओर से ये धन कभी भी नहीं जमा किया गया. प्रेस क्लब के पास हजरतगंज के नजदीक वालाकदर रोड पर करीब 10 हजार वर्ग फीट जमीन है. विश्वभूषण मिश्र ने बताया कि लीज समाप्त हुई है. नोटिस जारी करने के बाद भी कब्जा नहीं छोड़ा जा रहा है. मजबूरी में प्रेस क्लब से कब्जा वापस लिया जाएगा. इसलिए हमने पीपी एक्ट के तहत प्रेस क्लब के खिलाफ मुकदमा दायर किया है.

लखनऊ के पत्रकार Sanjay Dwivedi फेसबुक पर सवाल करते हैं: ”कौन होगा ज़िम्मेदार प्रेस क्लब पर लगने वाले ताले पर… कौन भरता रहा अपनी जेब पत्रकारों के संघठन के नाम पर… बोटी बिरयानी की आड़ में जेब भरते महारथी क्या फसेंगे जाल में…”

एलडीए द्वारा जारी नोटिस इस प्रकार है….

मोहल्ला खास बाजार, चायना बाजार गेट स्थित नजूल भूमि का पट्टा बिल्डिंग परपजेज के अन्तर्गत दिनांक 18.6.1968 से मात्र 10 वर्ष की अवधि हेतु रु 1/- वार्षिक किराये की दर पर उ.प्र. वर्किंग जर्नजस्टि यूनियन द्वारा-सचिव के पक्ष में निष्पादित किया गया था। निष्पादित पट्टाविलेख की अवधि दिनांक 18.6.1978 का समाप्त हो जाने के उपरान्त उक्त भूमि का नवीन पट्टा आगामी 30 वर्ष की अवधि के लिए पूर्व पट्टेदार के पक्ष में नजराना (प्रीमियम) रु 8,78,460/- तथा वार्षिक किराया रु 21,961.50 निर्धारित करते हुए, किये जाने की स्वीकृति सम्बन्धी आदेश संयुक्त सचिव, नजूल अनुभाग, उ.प्र. शासन द्वारा पत्र सुख्या-2301/9-नजूल-89-170एन/83 दिनांक 09.11.1989 द्वारा जारी किये गये थे, जिसके क्रम में पूर्व पट्टेदार संस्था द्वारा वांछित नजराने की धनराशि का भुगतान न किये जाने व वार्षिक किराया अधिक होने के दृष्टिगत नवीन पट्टे का निष्पादन नहीं कराया गया है तथा वर्तमान मे रु1/- वार्षिक की रियायती दर पर पट्टा किये जाने का अनुरोध किये गया है। मौके पर प्रश्नगत भूमि पर यू.पी. प्रेस क्लब संचालित है।

नजूल भूमि के प्रबन्ध एवं निस्तारण के अन्तर्गत वर्तमान में जारी शासनादेश संख्या-1566/8-4-11-137एन/2004 दिनंाक 28.9.2011 के बिन्दु-7 में यह व्यवस्था प्राविधानित है कि ऐसी नजूल भूमि जो सामुदायिक उपयोग हेतु बस अडडों, सामुदायिक क्लबों आदि को पट्टे पर दी गयी थी और पट्टाावधि समाप्त हो चुकी है, के सम्बन्ध में यह व्यवस्था की गयी है कि पट्टागत भूमि के जिस भाग पर नियमित निर्माण किया गया है, उक्त निर्मित क्षेत्र को पट्टेदार के पक्ष में सक्रिल रेट का 100 प्रतिशत प्रीमियम एवं 10 प्रतिशत सामान्य वार्षिक किराये की दर पर 10 वर्ष के लिए नवीनीकरण किया जायेगा। निर्मित क्षेत्र के साथ लगे हुए खुले क्षेत्र की भूमि को इस शर्त के साथ पट्टेदार क पक्ष में 10 प्रतिशत प्रीमियम तथा सामान्य वार्षिक किराया लेकर 10 वर्ष क लिए नवीनीकरण किया जायेगा कि खुले क्षेत्र का अन्यथा प्रयोग करने की दशा में राज्य सरकार द्वारा पुनः प्रवेश कर निलामी/निविदा के माध्यम से निस्तारण किया जायेगा। उक्त सुविधा तभी अनुमन्य होगी जब कि उक्त क्लबों की कार्यकारिणी समिति में शासन द्वारा नामित एक सदस्य रखा जायेगा। ऐसे नवीनीकरण हेुत शासन की अनुमति आवश्यक होगी। पट्टे की शर्तों का उल्लंघन किये जाने की दशा में पट्टा स्वतः निरस्त समझा जायेगा। रियायती दर पर पट्टा दिये जाने की वर्तमान में कोई प्रभावी शासनादेशों में वर्णित नहीं है।

— द्वारा सचिव LDA

लखनऊ के पत्रकार नवेद शिकाह व्यंग्य में कहते हैं : ”सियासी लोगों का दिल बहुत बड़ा होता है। आप क्षमादान में माहिर होते हैं। पत्रकारों पर भी आपकी विशेष कृपा होती है। राजनेता अक्सर पत्रकारों की गलतियों को माफ कर देते हैं। पत्रकारों से भी गलती हो जाती है, इसलिए हम लोगों पर विशेष कृपा करते हुए प्रेस क्लब को माफ कर दीजिए। यूपी प्रेस क्लब पत्रकारों का शरण स्थल है। इसकी खिलाफ लखनऊ विकास प्राधिकरण ने एफ आई आर लिखवाई है। सुना है तमाम सरकारी विभागों ने प्रेस क्लब को अवैध करार कर नोटिस दिये हैं। इस शराब स्थली में ताला लगने का खतरा बना है। तत्कालीन मुख्यमंत्री परम आदरणीय मुलायम सिंह यादव जी की कृपा से इसका विस्तार हुआ था। मौखिक आदेश पर क्लब को कई सुविधाएं नवाज दी गईं थी। इसके अलावा भी प्रेस क्लब का संचालन करने वाले नियम कानूनों का पालन नहीं कर सके। गलती हो गयी। पत्रकारों से अक्सर गलतियां हो जाती हैं। हर पत्रकार एनेक्सी मीडिया सेंटर या विधासभा के प्रेस रूम में बैठकी नहीं कर सकता। पीने का शौकीन हर पत्रकार मंहगे बार में बैठने की हैसियत नहीं रखता। मांसाहारी पत्रकारों को नॉनवेज के दाम में कहीं रियायत नहीं मिलती, सिवाय यूपी प्रेस क्लब के। अत: उत्तर प्रदेश सरकार से प्रार्थना है कि यूपी प्रेस क्लब की अनियमितता को माफ करें। किसी भी कार्यवाही को रोक दें और यूपी प्रेस क्लब में ताला नहीं लगने दें।”

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