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उत्तर प्रदेश

भ्रष्टाचार से निपटती योगी सरकार की जड़ों में मट्ठा डाल रहे हैं UPSIDA के ये दो अधिकारी

अश्विनी कुमार श्रीवास्तव-

योगी आदित्यनाथ सरकार में कामकाज को ऑनलाइन करके भ्रष्टाचार से निपटने की कोशिश में कमी नहीं है लेकिन भ्रष्ट अधिकारी बेखौफ हैं इसलिए यूपी में लोग सरकार से नाराज हैं। इसी का नतीजा है कि चुनाव में यूपी ने ही गठबंधन सरकार बनवाकर मोदी को कमजोर प्रधानमंत्री में तब्दील कर दिया है।

मैं पिछले एक साल से एक्स Lida लखनऊ (अब UPSIDA) के एक महाभ्रष्ट परियोजना अधिकारी बृजेंद्र कश्यप और उसके उतने ही महाभ्रष्ट सहयोगी जूनियर इंजिनियर बी एन श्रीवास्तव से जूझ रहा हूं। OBPAS आईडी LIDA/OBPAS/2023/1454 पर किए गए मेरे आवेदन पर इन दोनों अधिकारियों ने जिस तरह बेखौफ होकर OBPAS के 15 दिन में मंजूरी या आवेदन रद्द किए जाने के नियम की धज्जियाँ उड़ाने के लिए तमाम झूठी रिपोर्ट फाइल की और फिर obpas चलाने वाली निजी कंपनी को दबाव या लालच में लेकर अपनी मनमर्जी से नियम बनाए या तोड़े, इसकी सारी जानकारी बाकायदा तथ्यों और सुबूत के साथ शासन में मैंने बराबर दी।

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लेकिन इन दोनों का बाल भी बांका नहीं हुआ। ऐसे ही न जाने कितने भ्रष्ट अधिकारी यूपी के तमाम दफ्तरों में गांव, तहसील, जिला या मुख्यालय आदि स्तरों पर जनता को सता रहे होंगे और उनकी शिकायतें करने पर भी योगी सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठे रहती होगी।

अब मैंने तो मजबूर होकर आरटीआई का रास्ता अपनाया है और अगले कुछ हफ्तों बाद इसे कोर्ट भी ले जाने का फैसला कर लिया है लेकिन जनता में ऐसे चंद ही लोग होंगे जो भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसी आरपार की लड़ाई लड़ने की क्षमता या साहस रखते होंगे।

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इन दोनों महाभ्रष्ट अधिकारियों की जोड़ी ऐसी बेखौफ है कि मेरी पहली आरटीआई का जवाब नहीं दिया। इसके बाद पहली अपील की तो गोलमोल और अधूरी टिप्पणी करके फिर जवाब छिपा लिया।

अब दूसरी अपील अगले कुछ दिनों में करूंगा। फिर कुछ और नई आरटीआई भी करूंगा। क्योंकि अब इन दोनों भ्रष्ट अधिकारियों को सजा दिलवाने के लिए कोर्ट में ही ले जाना होगा।

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योगी जी तो सिस्टम ही सुधारने में व्यस्त हैं, उन्हें किसी भ्रष्ट अधिकारी पर कार्यवाही करने में पाप लगने का संकोच होता होगा शायद। या फिर वह भ्रष्ट अधिकारी उनके सजातीय उच्च अधिकारियों से वरदहस्त पाकर उस कुर्सी पर बैठा होगा, इसलिए उसको कुछ कहने से योगी जी के अपने प्रिय सजातीय अधिकारियों के नाराज होने का खतरा होगा।

बहरहाल, अपने निजी अनुभव से अगर मैं कहूं तो मायावती का शासन प्रशासन चलाने में अभी तक कोई जोड़ नहीं मिला है। मायावती के राज में क्या माफिया, क्या गुंडा, क्या पुलिस अधिकारी, क्या अधिकारी और आईएएस आदि और क्या खुद मायावती की पार्टी के नेता… मजाल नहीं थी किसी की कि कोई मुख्यमंत्री के खौफ से थर थर कांपे न।

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सपा सरकार में भी मुख्यमंत्री अखिलेश अपनी ही पार्टी के चचा और ताऊ लोगों के दबाव में कमजोर सीएम दिखते थे। अब हो सकता है कि अपने दम पर चुनाव जीतकर आने के बाद वह कमजोरी न दिखे।

लेकिन योगी जी से तो कोई भ्रष्ट अफसर डरता ही नहीं है। सरकार के दो ढाई साल बचे हैं। अभी भी योगी जी अगर अपनी इस खामी को दूर नहीं कर पाए तो सिस्टम चाहे लाख अच्छा बना लें। जनता की नाराजगी अब बढ़ेगी ही, कम तो किसी कीमत पर नहीं होगी।

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