वैक्सीन से दो वर्ष में मौत की बात कोरी अफ़वाह है!

अनिल शुक्ला-

वैक्सीन की भारतीय गप्प का फ्रांसीसी संस्करण : कोविड के वैक्सीन को लेकर भारत के सोशल मीडिया में इन दिनों एक ज़ोरदार गप्प वायरल हो रही है। यह गप्प फ्रांसीसी नोबल पुरस्कार विजेता और अंतर्राष्ट्रीय वायरोलॉजिस्ट Luc Monteagnier के एक तथाकथित इंटरव्यू के हवाले से है जिसमें Luc यह कहते बताये जा रहे हैं कि जिन लोगों ने किसी भी प्रकार की कोविड वैक्सीन लगवाई है, वे 2 वर्ष के भीतर मृत्यु को प्राप्त हो जाएंगे।

मुझे यह मेसेज सबसे पहले बरेली से मेरे मित्र परिवार की सदस्य मानवी ने भेजी। वह बेहद डरी हुई थीं क्योंकि उन्होंने और उनके पति ने वैक्सीन की पहली डोज़ ले रखी है और दूसरी के नंबर का इंतज़ार कर रहे हैं। मुझे खुद भी यह सन्देश बड़ा अटपटा लगा। गूगल पर खोजा तो उसके ‘फेक’ होने के कई सारे एक्सपोज़र मौजूद थे।

फिर मैंने पेरिस स्थित अपने 2 फ़्रांसीसी मित्रों को फ़ोन करके यह मालूम किया कि क्या फ़्रांस में भी Luc का उक्त इंटरव्यू चर्चा में है? मेरी मित्र रोशलीन फ्रांसीसी रेडियो के अंग्रेजी भाषा के अंतर्राष्ट्रीय विभाग में वरिष्ठ न्यूज़ एडिटर हैं। उन्होंने ऐसे किसी भी इंटरव्यू की नाममात्र की चर्चा से भी इंकार किया! वह बोली कि फ़्रांस में Luc का क़द इतना बड़ा है और यहाँ सब जगह उनका इतना सम्मान है कि यदि उन्होंने ऐसी कोई बात कही होती तो पूरे फ़्रांस में अब तक बवाल आ जाता।

लगभग ऐसी ही प्रतिक्रिया दूसरे मित्र असील रईस की थी। भारतीय मूल के असील फ्रांसीसी नागरिक हैं और पेरिस के नामी रंगशिल्पी हैं। उन्होंने बताया कि कुछ और भारतीय दोस्तों ने भी उनसे यही बेतुका सवाल पूछा है।

मैंने ये सारी ब्रीफिंग बरेली मानवी को भेजी तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से पूछा कि तब इस भारतीय गप्प के पीछे क्या है? मैंने कहा कि ज़ाहिर है यह उन लोगों के दिमाग की कारस्तानी है जो वैक्सीन की अनुपलब्धता से बुरी तरह बदनाम हो रही सरकार को बचाना चाहते हैं और जो पहले से ही मौजूद कोविड वैक्सीन को लेकर व्याप्त भय की खाई को और भी चौड़ा कर डालना चाहते हैं।

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