रोमियो स्क्वाड वाले इशू पर अतिरेक में आकर न लिखें, यह भी सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी टाइप मुद्दा है : यशवंत सिंह

Yashwant Singh : रोमियो स्क्वाड वाले इशू पर अतिरेक में आकर मत लिखिए. यह भी सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी टाइप का ही मुद्दा है. जमीन पर लोग इसे बहुत जरूरी बता रहे हैं. कई लोगों की बात सुन कर और कई लोगों से बात करने के बाद लिख रहा हूं. आप आजादी, स्वतंत्रता, प्रेम आदि का राग अलापते रहिए लेकिन जमीन पर लोग शोहदों के आतंक से त्रस्त थे. मैं भी आप की ही तरह सोच रहा था कि रोमियो स्क्वाड के जरिए यूपी पुलिस बच्चों को परेशान कर रही है.

पर लोग कह रहे हैं कि परेशान वे बच्चे हो रहे हैं जो सुबह शाम लड़कियों के कालेज स्कूल और उनके निकलने के रास्ते पर तैनात रहते थे और पीछा किया करते थे. रही बात पार्कों बागों आदि में बैठने वाले जोड़ों की तो किसी भी अभियान में दस पंद्रह परसेंट जेनुइन लोग तो चपेट में आते ही हैं.. वो कहते हैं न गेहूं के साथ घुन का पिस जाना. सो, हे साथियों दोस्तों, अब थोड़ा प्रैक्टिकल होकर जमीनी हालात को समझ बूझ के लिखा करिए. सिर्फ घर से आफिस और आफिस से घर, इस दरम्यान पूरे वक्त फेसबुक पर वैचारिक लेखन से रियल्टी / अंडर करंट को नहीं पकड़ पाएंगे.

ठीक यही मामला बूचड़खाने का भी है. शहरी / रियाइशी इलाके में बहते खून, भयंकर बदबू से त्रस्त लोगों को लग रहा है कि बहुत सही हो रहा है… ध्यान रखिए, मुसलमान कतई भाजपा के वोट बैंक नहीं हैं. सपा राज में मुसलमान पूरी तरह सत्ता संरक्षण में पल बढ़ रहे थे और ढेर सारे वैध अवैध काम कर रहे थे, जिसमें छेड़खानी से लेकर अवैध बूचड़खाना संचालन तक है. अब इन पर गाज गिर रही तो हिंदू खुश हैं.

मुझे मुस्लिम हिंदू की भाषा में इसलिए बात करनी पड़ रही है क्योंकि ग्राउंड लेवल का सच यह हो चुका है और इसे सच बनाने में बड़ा रोल सपा बसपा कांग्रेस जैसी पार्टियों का है. मेरा बस इतना कहना है कि योगी के आने के बाद तुरंत हाय हाय करने की जगह तीन महीने तक का वेट करिए… देखिए, भांपिए.. घूमिए, फीडबैक लीजिए… फिर लिखिए… वरना एक बार फिर झटका खाएंगे… जितना बिना वजह भाजपा और योगी का विरोध करेंगे, उतना ही आप उन्हें मजबूत करेंगे…

जैजै

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं….

Kumar Rahman यशवंत जी, बरेली में शोहदों के डर से एक बच्ची के माता-पिता ने गांव छो़ड़ दिया है… इसकी वजह से उस नवीं कक्षा का छात्रा की पढ़ाई भी छूट गई है…. शाम छह बजे LIVE TODAY न्यूज चैनल पर बरेली से यह रिपोर्ट देखी जा सकती है…

Shivmangal Singh भाई साहब यूपी में ये समस्या कैंसर की तरह है हज़ारों बच्चियां स्कूल छोड़ रहीं हैं up में ऐसा लगने लगा था की बेटी का बाप होना अपराध है मुजफ्फरनगर के दंगों के पीछे छेड़खानी ही थी वहां लफंगों में दहशत होना जरुरी है

Deepak Thakur सटीक विश्लेषण। कुछ यही हालत पटना जैसे शहरों का भी है। पढने वाली बेटियों को काफी परेशानी हो रही है।

Kamta Prasad लगता है मैं भी कायदे से सोचने लगा हूँ तभी आपकी बातें पल्ले पड़ने लगी हैं, कल की भड़ास की रिपोर्ट भी ठीक ही थी कि कानून का दुरुपयोग भी होता है।

Vivek Singh बिलकुल सही बात। इलाहाबाद याद ही होगा किस तरह शाम को महिला छात्रावास के बाहर लल्ला चुंगी पर भीड़ लगती थी। वहां जो होता था वो यही सब था।

Anil Maheshwari Efforts to contain eve teasing (sexual harassment) are being viewed with suspicion but it intriguing that Anti Romeo Squad in UP is “moral policing” & Pink Squad in Kerala is progressive. She squads are also in Hyderabad for the same job. When Rajnath Singh, as UP Minister for Education tried to check copying in examination by making copying cognizable offence, the left/liberal forces in Delhi too opposed the move of Raj Nath Singh saying that a girl of 14 years, caught copying will also be put behind the bars. The result was under the pressure of the party leaders, having entrenched interest in copying and making copying as a source of livelihood compelled the Kalyan Singh government to withdraw the order. The result is before us. No value of UP degrees and certificates in the Job market.

Singhasan Chauhan बिलकुल सही और इसमें सज्जन लोगों को तो कोई परेशानी ही नहीं है परेशानी तो उनके लिए है जो आवारागर्दी करते हैं और रह चलती लड़कियों, औरतों के ऊपर फब्तियां कसते हैं इनका इलाज तो होना ही चाहिए| मैं किसी परती विशेष का समर्थक नहीं हूँ मगर सही काम की हमेशा तारीफ होनी चाहिए चाहे वो किसी भी परती या धर्म से हो.

Ravindra Singh Basera Dev पिछले साल दिसंबर में दिल्ली से देहरादून जा रहा था। रास्ते में बस की खिड़की से बाहर झांक रहा था तो क्या देखता हूं कि मेरठ के किसी स्कूल की छुट्टी हो रही थी। लड़कियों का स्कूल था, कतार बना कर लड़कियां घर को लौट रहीं थी। कुछ लड़कों को सड़क किनारे लड़कियों की कतार में से किसी को खोजते देखा, सोचा कि शायद किसी खास लड़की का इंतजार हो, और मैं अपने लड़कपन के दिन याद करते हुए मन ही मन मुस्कुरा दिया। लेकिन बस के जरा आगे बढने पर दृश्य बड़ा विचलित करने वाला था, लड़के बाइक लेकर एक्सेलेटर दबा, बार बार लडकियों की कतार के चक्कर काट रहे थे, लडकियों की कतार के ठीक बगल में, बीच-बीच में किनारे खड़े दोस्तों का झुंड बनाकर लड़के, छेड़ाखानी करते, हाथ खींचते और लड़कियों को झुंड में घेरने की कोशिश करते दिख रहे थे। चूंकि यह छुट्टी का समय था तो बस के थोड़ा और आगे बढने पर देखा कि, और भी कई स्कूलों की छुट्टी उसी समय हो रही थी। और मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं था यह देख कर कि सभी जगह वही पहले स्कूल के जैसे हालात थे। यह सब शहर के बीचों बीच चल रहा था, लोग आ जा रहे थे, सब सामान्य कामकाज की भांति चल रहा था। और लड़कों के गिरोह किसी संगठित गैंग की तरह जहां तहां लड़कियों से यूँ ही पेश आते दिखे। इसे पश्चिमी उप्र के शहरों और कस्बों की Teen Age संस्कृति के रूप में आप समझ सकते हैं। लेकिन आज जब योगी सरकार के Anti Romeo Squad के गठन का समाचार सुना तो एक-बारगी लगा कि बड़ा प्रतिगामी कदम है, प्यार पे पहरा बिठाने का Frustrated बजरंगी Lumpens का संघी Vigilante Justice वाला Agenda जैसी कि छवि, लिबरल- लेफ्टिस्ट मीडिया वाले इस कदम की आम जनता विशेषकर मध्यम वर्ग के युवाओं के मन में बना रहे हैं। मुझे फिर अचानक, मेरठ शहर का वह स्कूल से लौटती लड़कियों से Road Romeos के दुर्व्यवहार का दृश्य याद आ गया और मुझे Anti Romeo Squad का मतलब समझ में आ गया, और यह भी कि क्यों इस कदम को इतनी तत्परता से योगी सरकार ने उठाया है।

Suresh Gandhi बिलकुल सही कहा आपने विरोध सिर्फ सपाई व काग्रेसी बलात्कारी कर रहे है सच तो यह है इनके खिलाफ ही रपट दर्ज करनी चाहिए क्योंकि वोट खातिर बलात्कारियों चोर उचक्को भ्रष्टाचारियों चापलूसो व डकैतों को सपोर्ट करना इनका सगल बन गया है

Ravi Prakash Singh यशवंत जी किसी गर्ल होस्टल के बहार जब लडकिया सब्जी फल खरीदती है तो उस फल की साइज सोहदे(रोमियो) पूछते है कल से नजर नहीं आये ।

Nitin Thakur किसी को मैंने जवाब दिया था.. उसका अंश है- मैं आपसे ये कहूंगा कि मैं नहीं जानता कि आप योगी से कितने परिचित हैं और कितने नहीं। कम से कम मैं उनसे और उनके विचार से ठीक ठीक परिचित हूं। कोई भी सरकार नहीं चाहेगी कि उसे शासन में कॉलेज की लड़कियों के साथ शोहदे बद्तमीज़ी करें। शोहदे किसी के सगे नहीं होते और कोई उन्हें नहीं पालता। ये हिंदू और मुसलमान दोनों होते हैं और जाति भी हर तरह की होती है। शासन के पास पहले से पुलिस है। पुलिस ने पहले से ही महिलाओं के लिए हेल्पलाइन नंबर दिए हैं। मेरे अपने शहर में लड़कियों के कॉलेज के बाहर बसपा और सपा दोनों सरकारों के दौरान मैंने पुलिस जीप को खड़े पाया है। दूसरे कॉलेजों के आसपास भी हमेशा इस तरह के अभियान चलते ही रहे हैं। ये अलग से जो एंटी रोमियो वाला ड्रामा है वो किस एक समुदाय विशेष के खिलाफ चलाया जा रहा है वो मैं तो जानता ही हूं और जिन्होंने योगी को सुना है उन्हें भी मालूम ही है। ये स्क्वैड दरअसल लव जिहादी खोज रही है। चूंकि चुनावी प्रचार में ये बात ज़ोर से कहकर वोट आए तो योगी ने कही भी जिसकी मैं तारीफ करता हूं… लेकिन अब यही बात शासन में बैठकर योगी बोल नहीं पाएंगे। वैसे भी घर बैठकर आपने कैसे तय कर लिया कि ये स्क्वैड अपराधी को ही धरेगा? इसमें वही पुलिसवाले काम करेंगे जो आम तौर पर किसी को भी उठाकर टॉर्चर करने के लिए बदनाम हैं। अब क्योंकि ये स्क्वैड अधेड़ उम्र के लोगों और लड़कियों के परिवार को ठीक लग रहा है तो वो असल बात मिस कर रहे हैं पर जो लोग योगी एंड टीम की बातें लगातार सुनते और समझते आ रहे हैं वो जानते हैं कि महिला सुरक्षा के नाम पर दरअसल क्या रोकने की कोशिश हो रही है? और रोकने की क्या.. वो खतरा तो खुद हिंदूवादियों ने चिल्ला-चिल्लाकर खड़ा किया और अब उस आभासी खतरे के खिलाफ एक स्क्वैड भी खड़ा किया है। तालियां बजाइए कि घर में तालिबान हुआ है। जो काम बजरंग दल और शिवसेना के ज़िम्मे था वो अब यूपी पुलिस से कराइए। छेड़छाड़ या किसी और तरह के अपराध की रोकथाम से भला किसको इनकार होगा मगर उसके नाम पर शुरू हुई मोरल पुलिसिंग को आप एक हद के आगे बढ़ने से रोक नहीं सकेंगें। जिस दिन वो आपके घर पहुंचेगी तो आप वैसे ही पोस्ट लिखेंगे जैसे नोटबंदी में घाटा होने पर सरकार के खिलाफ लिखने लगे थे। तब तक आप सरकार के साथ हैं क्योंकि आप नोटबंदी से पहले बहुत मसलों पर भी थे और अब ज़रा सा उबरते ही फिर किसी भी तरह से कदमताल करने लगे हैं। शुभकामनाएं।

Arun Yadav तब राष्ट्रवाद की डोर पकड़कर द गाल फ्रांस का राष्ट्रपति बना था। छात्र, मजदूर और लेखकों का आंदोलन उफान पर था तथा प्रसिद्ध दार्शनिक ज्यॉ-पाल सार्त्र ने इनका नेतृत्व संभाला। द गाल को सलाह दी गई कि सार्त्र को गिरफ्तार किया जाए। समझदार राष्ट्रपति द गाल ने कहा कि सार्त्र की गिरफ्तारी पूरे फ्रांस की गिरफ्तारी होगी, ऐसा नहीं होगा। सत्ता द्वारा साहित्य को दिया गया यह बहुत बड़ा सम्मान था। राष्ट्रवाद की डोर पकड़कर सत्ता पर काबिज होनेवाले सत्तासीनों को द गाल से सबक लेना चाहिए और देश में दाभोलकर, पनसारे और कलबुर्गी की हत्याएँ बंद होनी चाहिए।

Bijendra K Singh दूध का जला छाछ को भी फूंक कर पीता है… लेकिन यशवंत जी ने जमीन की बात की है… सच्चाई भी है… ईव टीसिंग भी सच्चाई है… लव जिहाद भी… BBC की तो पूरी डॉक्युमेंट्री है… जै जै, अब सिटियाबाज लौंडो की खैर नहीं है, वाकई लोग योगी के इस कदम को उपयोगी बताते हुए सराह रहे हैं।

Shrikant Asthana आपसे सहमत हूं। मुद्दे से भी बहुत असहमत नहीं हूं कि शोहदे-लफंगे समस्या हैं पर सारे लड़के-लड़कियां तो लफंगे नहीं हैं! जिस तरह से इस मसले का इम्प्लीमेंटेशन हो रहा है वह बहुत खतरनाक है। भाई-बहन भी एक साथ निकलते हुए डर रहे हों तो उस स्थिति को सहज या अच्छा तो कतई नहीं माना जा सकता।

Arvind Kumar ये वो लडके है जिनके लिए मुलायम सिंह यादव जी ने कहा था कि लडके हैं गलती हो जाती है

Nagendra Singh हर बात का विरोध ठीक नही सही को सही और गलत को गलत कहने दम होनाचाहिए।

Shanu Shrivastava आप हमेशा बेबाक और सच ही क्यों लिखते हैं सर। सैलूट। वैसे लिखते रहिये। कुछ लोग ही तो हैं जो आज भी भीड़ का हिस्सा नही बने।

Shambhunath Nath सोलह आना ग्राउंड रिपोर्ट।

पंकज कुमार झा सुंदर … अब तक का सबसे बेसी समझदार पोस्ट.

Nakul Chaturvedi ये हुई न बात..

Anshuman Shukl एक दम सही लिखे हो। हद दर्जे की बदतमीजी हो रही थी और किसी का डर भी नहीं था। अब डर तो होगा।

अवधेश पाण्डेय 🙂 Sir… aapke charan kahan hain….

Shivmangal Singh साहब बच्चियों के उत्पीड़न की पराकाष्ठा हो गयी थी

Michal Chandan बेहतरीन आंकलन है आपका।

Arun Khare सौ टका सही

Purushottam Asnora सोलह आने सच.

Ranjeet Chaudhary Sahi tarkaaa

Vibhuti Narain Chaturvedi सत्य वचन । # Yashwant Singh

Sneha Mishra true sir

Abhay Ashish Jain Aap ki baat mai dum hai

Awadhesh K. Yadav सही पकड़े है।

Prakash Singh Yahi sach hai …

Harsh Kumar आप तो ऐसे ना थे?

Taukir Alam Sahi bat

Vishal Ojha ये सही ठोके आप

Raghab Jha बिल्कुल सही।

Mayank Pandey Pahlee bar samajhdaari ki baat… Jai jai

प्रयाग पाण्डे सौ आना सच।

Ashok Aggarwal दमदार

Anupam Srivastava first time your bhadas on right dirction

Amit Singh सत्य वचन।

Kamlesh Kumar O Positive ज बात खरी खरी जानेमन कहीन

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